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पत्रिका समूह के पुरुस्कारों की घोषणा

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on शुक्रवार, जनवरी 07, 2011 | शुक्रवार, जनवरी 07, 2011

प्रतिवर्ष साहित्य के क्षेत्र में सृजनात्मक लेखन के लिए दिए जाने वाले पुरस्कारों की कड़ी में इस साल के पुरस्कारों की घोषणा की गई है। कहानी में पहला पुरस्कार हिंदी के जाने माने कथाकार जोधपुर के डॉ. सत्यनारायण की कहानी "अंगूठा" को तथा कविता में पहला पुरस्कार दिल्ली के युवा कवि आर.चेतनक्रांति की कविता "क्या" को दिया जाएगा।कहानी में दूसरा पुरस्कार दिल्ली के युवा कथाकार गौरव सोलंकी की कहानी "कद्दूकस" को तथा कविता में यह पुरस्कार सवाई माधोपुर के युवा कवि प्रभात को उनके "बाल गीत" के लिए दिया जाएगा। ये पुरस्कार पत्रिका समूह के परिशिष्टों में वर्ष भर में प्रकाशित कहानियों और कविताओं के लिए दिए जाते हैं।
प्रथम पुरस्कार के रूप में 11-11 हजार रूपए और द्वितीय पुरस्कार के रूप में 5-5 हजार रूपए और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे। सृजनात्मक साहित्य पुरस्कार 8 जनवरी को पं. झाबरमल्ल शर्मा स्मृति व्याख्यान माला के तहत जयपुर में होने वाले समारोह में प्रदान किए जाएंगे। 
डॉ.सत्यनारायण अपने अनूठे गद्य और कथा शिल्प के लिए जाने जाते हैं। फिलहाल वे जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर में अध्यापन करते हैं। उनकी "हमतुम" परिशिष्ट में प्रकाशित पुरस्कृत कहानी "अंगूठा" रिश्तों में गायब होती संवेदनाओं की दास्तान हैं, जहां पिता की मौत के बाद भाई आपस में बंटवारा कर रहे हैं।चेतनक्रांति का नाम संवेदनशील कवियों में हैं। उनकी हमलोग परिशिष्ट में प्रकाशित कविता "क्या" उन जीवन मूल्यों की ताकत की पहचान है जो तमाम भागदौड़ और लालच के बावजूद मनुष्य की संवेदनाओं में कहीं बचे रहते हैं। 
कहानी में दूसरा पुरस्कार प्राप्त करने वाले गौरव सोलंकी राजस्थान में पले बढ़े हैं और फिलहाल दिल्ली में रहते हैं। उनकी पुरस्कृत कहानी "कद्दूकस" अपने शिल्प के साथ ही मौजूदा समाज की विडंबना पर कटाक्ष करती है कि किस तरह सांप्रदायिक दंगों की कोई वजह नहीं होती और जो वजह होती है वह किसी की समझ में कभी नहीं आती।कविता में दूसरे स्थान पर पुरस्कृत प्रभात राजस्थान में सवाई माधोपुर के हैं। उनकी हमलोग परिशिष्ट में प्रकाशित पुरस्कृत कविता "बाल गीत, चुनिया का नाटक देखे दुनिया" ब्ाच्चों के जरिए संवेदनाओं को छूने की कोशिश है, जो इस दुनिया को मासूम बनाए रखने में मदद करती है। 
इस साल कहानी के निर्णायक मंडल में मुंबई में रहने वाले जाने माने कथाकार सूरज प्रकाश, साहित्यिक पत्रिका कथादेश के संपादक हरिनारायण और जयपुर के आलोचक डॉ.दुर्गाप्रसाद अग्रवाल थे। कविता के विजेताओं को निर्णय करने वालों में दिल्ली के वरिष्ठ कवि और पत्रकार मंगलेश डबराल, वरिष्ठ कवि ऋतुराज और जयपुर के कवि एवं दूरदर्शन जयपुर के निदेशक हरीश करमचंदाणी थे।
पत्रिका समूह की ओर से दिए जाने वाले सृजनात्मक साहित्य पुरस्कारों के क्रम में यह 15वें पुरस्कार हैं। 1996 से शुरू इन पुरस्कारों में कहानी में यादवेन्द्र शर्मा चंद्र, से.रा. यात्री, सावित्री परमार, यश गोयल, ज्ञानप्रकाश विवेक, साबिर हुसैन, मुरलीधर वैष्णव, सावित्री रांका, कुंदन सिंह परिहार, महीप सिंह, संगीता माथुर, रत्न कुमार सांभरिया, चरण सिंह पथिक तथा शोभा नारायण को यह पुरस्कार मिल चुका है। 
कविता में उमेश अपराधी, गोविंद माथुर, अंबिका दत्त, गोपाल गर्ग, गुरमीत बेदी, रामनाथ कमलाकर, माधव नागदा, भगवती लाल व्यास, हरीश करमचंदाणी, मंगल सक्सेना, गोपालदास नीरज, ताराप्रकाश जोशी, डॉ.मंगत बादल और अखिलेश तिवारी सम्मानित हो चुके हैं। पिछले साल से ही कहानी एवं कविता के लिए द्वितीय पुरस्कार भी शुरू किए गए थे। पहली बार द्वितीय पुरस्कारों में कहानी में शरद उपाध्याय एवं कविता में मीठेश निर्मोही को यह पुरस्कार दिए गए।

समाचार:-पत्रिका से पाठकों के हित में साभार 
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