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रपट:-कवि शमशेर बहादुर सिंह के जन्‍मशती,कोटा:-नन्द भरद्वाज,जयपुर

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on गुरुवार, जनवरी 27, 2011 | गुरुवार, जनवरी 27, 2011


हिंदी और राजस्थानी के कवि
नन्द भारद्वाज 
कवि शमशेर बहादुर सिंह के जन्‍मशती समारोहों की श्रृंखला में कोटा में 12-13 फरवरी को  राजस्‍थान साहित्‍य अकादमी और विकल्‍प के साझा प्रयास से एक सार्थक राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी आयोजित हुई,जिसमें राजस्‍थान और बाहर से आए कई वरिष्‍ठ साहित्‍यकारों ने शिरकत की। संगोष्‍ठी में शमशेर के सामाजिक सरोकारों और उनके जनधर्मी रचनाकर्म पर रचनाकारों ने विस्‍तार से अपना विवेचन प्रस्‍तुत‍ किया.


शमेशर बहादुर सिंह के शताब्दी स्मरण में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय साहित्यिक संगोष्ठी में ‘शमशेर की कविताओं में जन चेतना’ विषय पर साहित्यिकारों ने अपने विचार रखे और पत्रवाचन किए। साहित्यकारों ने कहा कि शमशेर सम्पूर्ण कलाकार थे। जन संघर्षों में भी जनता के साथ सक्रिय रूप से खड़े नजर आते थे। राजस्थान साहित्य अकादमी तथा विकल्प जन सांस्कृतिक मंच द्वारा आयोजित इस संगोष्ठी के समापन सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि व केंद्रीय साहित्य अकादमी के सदस्य अंबिका दत्त ने की। उन्होंने कहा कि शमशेर का साहित्य समीक्षक व आलोचकों को चुनौती देता था कि वे समीक्षा के औजारों में सुधार कर लें। ‘शमशेर का गद्य और विचार भूमि’ विषय पर डॉ.बीना शर्मा ने कहा कि शमशेर को दुर्बोधता व सौंदर्य का कवि कहकर पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता। अतुल चतुर्वेदी ने कहा कि उनके लेखन में मानवीय पक्ष बहुत सशक्त है, जयपुर से आए प्रेमचंद गांधी ने कहा कि वे सचेत जनपक्षधरता के कवि ही नहीं थे अपितु जनसंघर्षों में जनता के साथ सक्रिय रूप से खड़े रहते थे। शैलेन्द्र चौहान ने कहा कि शमशेर वामपंथी तो थे लेकिन, वे वाम चेतना को पचा कर रचनाकर्म करते थे। मनु शर्मा ने कहा कि शमशेर के साहित्य को समझने के लिए चित्रकला को समझना जरूरी है। विकल्प के अध्यक्ष महेन्द्र नेह ने कहा कि केवल शमशेर ही हैं जो यह बताते हैं कि किस तरह एक महत्वाकांक्षी लेखक परंपरा, विश्व साहित्य का सघन अध्ययन करते हुए वाल्मीकि, तुलसी व शेक्सपियर जैसा महान साहित्यकार बन सकता है। इस विषय पर डॉ. गीता सक्सेना, कवियित्री कृष्णा कुमारी, भगवती प्रसाद गौतम, विवेकशंकर व विजय जोशी ने पत्रवाचन किया और अपने वक्तव्य प्रस्तुत किए।


संगोष्ठी के चौथे सत्र में शमशेर जीवन कला और सौंदर्य विषय पर कवि व्यंग्यकार अतुल कनक ने कहा कि शमशेर की रूमानियत व्यक्तिगत नहीं अपितु सत्यम,शिवम, सुंदरम है। डॉ. राजेश चौधरी ने कहा कि शमशेर ने हर रचना के साथ नया प्रयोग किया। रौनक रशीद ने कहा कि वे गजल जैसी परंपरागत विधा के साथ पूरा न्याय करते थे। वरिष्ठ ब्लॉगर दिनेश राय द्विवेदी ने कहा कि शमशेर का अभावों से परिपूर्ण जीवन अभावग्रस्त जनता के साथ उनका सामंजस्य स्थापित करता था। सुरेश सलिल ने कहा कि उनमें मानवीय सौंदर्य से राजनैतिक दृष्टि का विकास दिखाई देता है.


''शमशेर बहादुर सिंह का विस्तार इतना है कि उनके बारे में लिखा जाना कभी खत्म नहीं हो सकता। अभी एक शताब्दी हुई है लेकिन, एक और शताब्दी के बाद भी उन पर लिखा जाता रहेगा। वे हर विद्या में अनूठे थे, उनका लेखन सूक्ष्म से सूक्ष्मतर व्याख्या चाहता है।''


यह कहना था साहित्यकार शमशेर बहादुर सिंह की जन्म शताब्दी पर आयोजित राष्ट्रीय साहित्यिक संगोष्ठी के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं दूरदर्शन जयपुर में पूर्व निदेशक नंद भारद्वाज का। राजस्थान साहित्य अकादमी और विकल्प जन सांस्कृतिक मंच के सयुंक्त तत्वावधान में हो रही इस दो दिवसीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में भारद्वाज ने कहा कि शमशेर को प्रेम और सौंदर्य का कवि भी कहा जाता है, लेकिन, उनका प्रेम मानवता और प्रकृति के प्रति था। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कर रहे प्रमुख साहित्यकार रामकुमार कृषक ने कहा कि शमशेर अपने समकालीनों में सरोकार के स्तर पर सर्वाेपरि है। उनकी रचनाएं स्वयं व जन मानस को अभिव्यक्त करने का माध्यम भर हैं। वे नए समाज की रचना चाहते थे। विशिष्ठ अतिथि कवि समीक्षक सुरेश सलिल ने शमशेर के साहित्य और जीवन का परिचय दिया।


दूसरे सत्र में हिंदी गजल में शमशेरियत विषय पर संगोष्ठी में रामकुमार कृषक ने कहा कि शमशेर की गजलों में भाषाई द्वैत नहीं है। वस्तुत: उनकी गजलें हिंदी में लिखी गई उर्दू की गजलें हैं। वे जनता के दर्द को, उसकी वजह को बखूबी बयां करते हैं। प्रोफेसर हितेष व्यास ने स्पष्ट किया कि शमशेर के लिए हिंदी और उर्दू दो भाषाएं नहीं थी अपितु एक जान दो शरीर थे। शायर पुरुषोत्तम यकीन ने कहा कि शमशेर ने अपने समकालीनों पर खूब लिखा। सलीम खान फरीद ने कहा शमशेर सूक्ष्म सौंदर्यबोध के कवि थे। हरेप्रकाश गौड़ ने कहा कि शमशेर शुरू में रोमांस के कवि थे.


फोटो सौजन्य:-नन्द भारद्वाज 






कवि और सृजनधर्मी रवि कुमार के
कविता पोस्टर प्रदर्शनी का विमोचन नन्द भारद्वाज द्वारा. 





रपट साभार 

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