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रपट:-पद्मश्री पर डॉ. चंद्रप्रकाश देवल का अभूतपूर्व अभिनंदन:-दुलाराम सहारण

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on गुरुवार, जनवरी 27, 2011 | गुरुवार, जनवरी 27, 2011

रपट:-युवा साहित्यकार
 दुलाराम सहारण
चूरू, 6 फरवरी।


राजस्थानी भाषा और साहित्य में उल्लेखनीय योगदान के लिए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.चंद्रप्रकाश देवल को हाल में ही भारत सरकार की ओर से पद्मश्री सम्मान की घोषणा के बाद उनके चूरू आगमन पर जिलेभर में उनका भव्य और अभूतपूर्व अभिनंदन हुआ। चार फरवरी (शुक्रवार) को तारानगर व राजगढ तथा पांच फरवरी (शनिवार) को रतनगढ, सुजानगढ व चूरू में साहित्य एवं भाषाप्रेमियों ने उनका जोरदार स्वागत किया। स्वागत से अभिभूत डॉ. देवल ने कहा कि उनका सम्मान राजस्थानी भाषा का सम्मान है लेकिन भारत सरकार उनको पद्मश्री की बजाय राजस्थानी को मान्यता की घोषणा करती तो उन्हें अधिक खुशी और गर्व की अनुभूति होती। उन्होंने कहा कि राजस्थानी को मान्यता तो मिलकर ही रहेगी क्योंकि मातृभाषा की मान्यता हमारी अस्मिता का सवाल है, हमारी पहचान का प्रश्न है। 

अपणायत के अपनेपन से अभिभूत हुए डॉ देवल 
तारानगर के इंद्रलोक भवन में अपणायत संस्थान की ओर से एक भव्य समारोह का आयोजन कर इलाके के साहित्यप्रेमियों ने डॉ. देवल का जोरदार अभिनंदन किया। संस्थान की ओर से उन्हें  साफा बांधा गया और शॉल, श्रीफल, साहित्य एवं सम्मान पत्र भेंट किया गया। स्वागत से भावविभोर डॉ. देवल ने कहा कि यदि अब भी राजस्थान के लोग और यहां के जनप्रतिनिधि एकजुट होकर संकल्प कर लें तो भाषा की मान्यता कोई मुश्किल बात नहीं है।  डा. देवल ने लोगों से जनगणना के दौरान मातृभाषा के कॉलम में राजस्थानी लिखवाने की अपील की। सेवानिवृत्त प्राचार्य बुधमल हंसावत की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार भंवरसिंह सामौर, साहित्य अकादेमी में राजस्थानी भाषा परामर्श मंडल के सदस्य दुलाराम सहारण, व्यापार मंडल के अध्यक्ष जुगलकिशोर चाचाण ने भी विचार व्यक्त करते हुए डॉ. देवल के राजस्थानी साहित्य की समृद्धि में योगदान की सराहना की। उपखण्ड अधिकारी रामगोपाल प्रजापति ने कार्यक्रम स्थल पर देवल का अभिनंदन किया। कार्यक्रम का संचालन संस्थान अध्यक्ष विश्वनाथ भाटी ने किया। इस दौरान संस्थान सचिव देवकरण जोशी, साहित्यकार किशोर निर्वाण, नरेंद्र भाटी, परमेश्वर प्रजापत, उम्मेद धानियां, जयहिंद सैनी, सुनील बुंदेला सहित साहित्यप्रेमी नागरिकों ने भागीदारी की।  

राजगढ में साहित्य समिति की ओर से हुआ अभिनंदन समारोह
राजस्थानी के ओजस्वी कवि मेघराज मुकुल के नाम से पहचाने जाने वाले राजगढ कस्बे में साहित्य समिति की ओर से भव्य समारोह का आयोजन कर डॉ चंद्रप्रकाश देवल का अभिनंदन किया गया। मंगतूराम स्वामी ने राजस्थानी पगड़ी बांधकर लोकप्रिय साहित्यकार डॉ देवल का स्वागत किया। वरिष्ठ साहित्यकार भंवर सिंह सामौर की अध्यक्षता में हुए समारोह में प्रतापसिंह कस्वां एवं अनिल शर्मा विशिष्ट अतिथि थे। युवा साहित्यकार दुलाराम सहारण ने इस मौके पर कहा कि डा. देवल ने अपनी उपलब्धि से राजस्थान व राजस्थानी को गौरवान्वित किया है। उन्होंने कहा कि डॉ देवल का राजस्थानी भाषा एवं साहित्य की समृद्धि और उसे लोकप्रिय बनाने में अद्भुत योगदान है। डॉ देवल ने इस मौके पर कहा कि राजस्थानी सिर्फ एक भाषा ही नहीं अपितु हमारी संस्कृति की अनमोल धरोहर है, जिसका संरक्षण हम सबका प्रथम कर्तव्य है। इस दौरान आरपी वर्मा, सत्यनारायण शांडिल्य, राम अवतार वर्मा, रामकुमार पूनिया, विजय सिंह चौहान, गिरधारी सारड़ा, अनवर बेग, पुरुषोत्तम पांडिया, किशनलाल सारड़ा सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी मौजूद थे। 

मान्यता का शुभदिन अब दूर नहीं
किशोर कल्पनाकांत सरीखे राजस्थानी भाषा के जुझारूओं की भूमि रतनगढ़ में डॉ देवल ने अपने अभिनंदन समारोह में कहा कि राजस्थानी को संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता का दिन अब अधिक दूर नहीं है। उन्होंने कहा कि आजादी के समय नेतृत्वविहीन होने के कारण राजस्थान की जीभ काट ली गई और हमारी जुबान को संविधान में शामिल नहीं किया गया। काव्ययोगी किशोर कल्पनाकांत स्मृति शोध संस्थान के तत्वावधान में गांधी बाल निकेतन में हुए समारोह में विधायक राजकुमार रिणवां, पालिका अध्यक्ष शिव भगवान कम्मा, राजस्थनी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के पूर्व अध्यक्ष सीताराम महर्षि, सत्यनारायण इंदौरिया, शिक्षाविद चंपालाल उपाध्याय, कुलदीप व्यास, श्याम पारीक व प्रो. कल्याणसिंह चारण ने शॉल, श्रीफल, साफा व साहित्य भेंट कर स्वागत किया।

सेठिया की जन्मभूमि साहित्यकारों के लिए तीर्थ स्थल
राजस्थानी के महाकवि पद्मश्री कन्हैयालाल सेठिया की जन्मभूमि सुजानगढ़ के साहित्यप्रेमियों ने भी लोकप्रिय साहित्यकार डॉ. देवल का भव्य स्वागत किया। मरुदेश संस्थान के तत्वावधान में कस्बे के खांडल भवन सभागार में शनिवार को हुए कार्यक्रम में कस्बे की विभिन्न संस्थाओं की ओर से डॉ देवल का अभिनंदन किया गया। सोनादेवी सेठिया कन्या महाविद्यालय की प्राचार्य संतोष व्यास की अध्यक्षता में हुए इस समारोह में नोरतनमंल कंचन देवी डोसी फाउण्डेशन के मुख्य ट्रस्टी नोरतनमल डोसी मुख्य अतिथि, पालिकाध्यक्ष डॉ. विजय राम शर्मा, समाजसेवी विनोद गोठड़िया, भगवती प्रसाद शर्मा व साहित्यकार दुलाराम सहारण विशिष्ट अतिथि तथा भंवर सिंह सामौर मुख्य वक्ता  थे। चंद्रप्रभा सोनी व यशोदा माटोलिया ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। इस मौके डॉ. देवल ने कहा कि सेठियाजी की जन्मभूमि किसी भी साहित्यकार के लिए तीर्थस्थल से कम नहीं है। इस धरा पर अभिनंदन उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है। पालिकाध्यक्ष ने इस अवसर पर सुजानगढ़ में कन्हैयालाल सेठिया राजस्थानी भाषा भवन के लिए सहयोग का आश्वासन दिया। मरुदेश संस्थान के अध्यक्ष घनश्यामनाथ कच्छावा ने आभार जताया। इससे पूर्व संस्थान सचिव कमलनयन तोषनीवाल, किशोर सैन, रजनीश भोजक, रतनलाल सैन, सुमनेश शर्मा व पूनमचंद सारस्वत ने अतिथियों का माल्यार्पण का स्वागत किया। 

इस दौरान एनके चतुर्वेदी, कवि बोदूलाल आनंद, के भंवरलाल काछवाल, सुरेन्द्र भार्गव, राकेश शर्मा, पूसाराम स्वामी, प्रो. आशा र्भागव, चौधरी सुल्तान खां राही, एडवोकेट हेमंत शर्मा, तनसुखराय रामपुरिया, रफीक राजस्थानी, जयप्रकाश, सूर्यप्रकाश मावतवाल, गुरुप्रसाद, दानमल भोजक, राकेश गौड़, मांगीलाल पुरोहित, शिव कुमार तिवाड़ी, रतनलाल सैन, कुंदनमल स्वामी व कवि हाजी शमशुद्दीन स्नेही ने डॉ. देवल का अभिनंदन किया। 

चूरू में हुआ अभिनंदन 
चूरू के सूचना केंद्र में प्रयास संस्थान की ओर से आयोजित समारोह में डॉ. चंद्रप्रकाश देवल का अभिनंदन किया गया। उन्हें साफा बांधकर तथा शॉल, श्रीफल, प्रतीक चिन्ह व मान-पत्र देकर सम्मानित किया गया। सैकड़ों साहित्यप्रेमियों, बुद्धिजीवियों और पत्रकारों की मौजूदगी में हुए समारोह में डॉ. देवल ने कहा कि राजस्थानी भाषा विश्व की श्रेष्ठ भाषाओं में से एक है। वीर और शृंगार रस का जो अद्भुत मिश्रण राजस्थानी  के दोहांें में मिलता है, वह दुनिया भर की तमाम भाषाओं और साहित्यकारों के लिए एक चुनौती है। उन्होंने कई शब्दों के उदाहरण और उनकी अभिव्यक्ति सामर्थ्य की व्याख्या करते हुए कहा कि ऐसी बेजोड़ क्षमता दुनिया की किसी भी दूसरी भाषा में नहीं है। डॉ. मुमताज अली की अध्यक्षता में हुए इस समारोह में प्रख्यात पत्रकार-कवि त्रिभुवन, साहित्यकार भंवरसिंह सामौर, अतिरिक्त जिला कलक्टर बी. एल. मेहरड़ा, पंचायत समिति प्रधान रणजीत सातड़ा, साहित्यकार बैजनाथ पंवार व प्रयास संस्थान के अध्यक्ष दुलाराम सहारण ने डॉ. देवल के योगदान की सराहना की। समारोह में विभिन्न संस्थाओं की ओर से डॉ. देवल का अभिनंदन किया गया। संचालन संस्थान सचिव कमल शर्मा ने किया।

सम्मान शृंखला में पूर्व सभापति रामगोपाल बहड़, नगरश्री के सचिव श्यामसंुदर शर्मा, हिन्दी साहित्य संसद के शिवकुमार मधुप, हौम्योपैथ डॉ. अमरसिंह शेखावत, सरपंच महावीर नेहरा, पंचायत समिति सदस्य सफी मोहम्मद गांधी, सरपंच चिमनाराम, कादम्बिनी क्लब के राजेन्द्र शर्मा मुसाफिर, शिक्षाविद़ बाबूलाल शर्मा, एडवोकेट धर्मपाल शर्मा, हरिसिंह सिरसला, देवकांत पारीक, सुधीन्द्र शर्मा सुधि सहित अनेक भाषाप्रेमियों ने भाग लिया। 

राजस्थानी के सशक्त हस्ताक्षर हैं डॉ. देवल 
14 अगस्त 1949 को उदयपुर जिले के गोटीपा गांव में जन्मेµडॉ. चंद्रप्रकाश देवल राजस्थानी के जाने-माने कवि हैं। राजस्थानी में पागी, कावड़, मारग, तोपनामा, उडीक पुराण, झुरावौ तथा हिंदी में आर्त्तनाद, बोलो माधवी, स्मृति गंधा, अवसान जैसी कृतियों के रचयिता डॉ. देवल विश्व साहित्य की दर्जनों पुस्तकों का राजस्थानी में अनुवाद कर चुके हैं। महाकवि सूर्यमल्ल मिश्रण प्रणीत ‘वंश भास्कर’ के नौ खंडों का सात हजार पृष्ठों में डॉ. देवल द्वारा किए गए संपादन को राजस्थानी साहित्य में मील का पत्थर माना जा रहा है। डॉ. देवल को पागी के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार, काळ में कुरजा के लिए साहित्य अकादेमी के अनुवाद पुरस्कार, बोलो माधवी के लिए राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर के सर्वोच्च मीरा पुरस्कार, राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर के सर्वोच्च सूर्यमल्ल मिश्रण पुरस्कार, लखोटिया ट्रस्ट, नई दिल्ली के लखोटिया पुरस्कार, कमला गोइन्का फाउण्डेशन, मुम्बई के मातुश्री कमला गोइन्का राजस्थानी साहित्य पुरस्कार सहित अनेकों पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं। वर्तमान में देवल भारत सरकार की साहित्य अकादेमी में राजस्थानी भाषा परामर्श मंडल के संयोजक हैं। 25 जनवरी, 2011 को राजस्थानी भाषा एवं साहित्य में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार की ओर से उन्हें पद्मश्री सम्मान दिए जाने की घोषणा की गई है।


(देवल जी को इस सम्मान पर 'अपनी माटी ' परिवार की तरफ से हार्दिक बधाइयां और राजस्थानी को मान्यता मिलने के हित बहुत सी शुभकामनाएं-सम्पादक) 
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