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रपट:-गुलाब कोठारी की पुस्तक का विमोचन

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on शनिवार, जनवरी 08, 2011 | शनिवार, जनवरी 08, 2011

गुलाब कोठारी 

जयपुर। पत्रिका समूह के प्रधान सम्पादक गुलाब कोठारी के काव्य संग्रह आद्या द्वितीय का सोमवार को विमोचन हुआ। जयपुर के भगवत सिंह मेहता सभागार में आयोजित एक गरिमामय समारोह में देश के लब्धप्रतिष्ठित कवि और राजनेता बालकवि बैरागी, राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और कवि शिव कुमार शर्मा तथा वेद विज्ञानी दयानंद भार्गव विपुल ने इस काव्य संग्रह का विमोचन किया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए बालकवि बैरागी ने कहा कि यह काव्य संग्रह उत्तरायण के सूर्य की दृष्टि है और ईश्वर लाखों में से किसी एक को ही यह दृष्टि देता है।

बैरागी ने कहा कि कोठारी की दो वर्षीय पौत्री आद्या को समर्पित इस काव्य संग्रह की कविताएं एक चौखट में मढ़ी गई जगमग ज्योति से भरपूर हैं। चौखट में तीन अबोध शिशु हैं और चौथे आप, मैं या समस्त संसार है। इन तीन बच्चों के बीच की अबोध चहल-पहल ने कोठारी को प्रेरित व संचालित किया। कोठारी ने बच्चों की बाल सुलभता के बहाने अपने पाठकों और परिपक्व समाज को माया के प्रकाश भाव से अवगत कराया है और अध्यात्म व दर्शन पर चिंतन किया है। इन कविताओं के माध्यम से भारतीय अध्यात्म सम्पदा की अतुल वर्षा समाज पर की गई है।

बैरागी ने कहा कि कवि ने इन कविताओं में अपने बच्चों के बहाने भारत के सभी बच्चों के भविष्य पर चिंता व्यक्त की है और साथ ही वे भारतीय तीज-त्योहारों, बच्चों के ईष्र्या भाव और रिश्तों के महत्व पर भी मनोहारी भाव से कलम चलाते नजर आते हैं। बैरागी ने कहा कि यह काव्य संग्रह सिर्फ अध्यात्म या दर्शन ही नहीं बल्कि कन्या भू्रण हत्या जैसी सामाजिक विषमताओं पर भी सारस्वत प्रहार करता है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक को पाठक तो मिलेंगे, लेकिन आलोचक नहीं मिलेंगे, क्योंकि पराई पूंजी पर चलने वाले आलोचकों के पास वैदिक और आध्यात्मिक सम्पदा मिलना मुश्किल है।

उन्होंने कहा कि आद्या प्रथम और द्वितीय के बीच गुलाब कोठारी की एक और पुस्तक कृष्ण तत्व की वैज्ञानिकता भी आई है और यह हिन्दी साहित्य की महत्वपूर्ण घटना है। लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार द्वारा विमोचित यह पुस्तक आज देश-विदेश में सम्मान पा रही है।

समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थान उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश और कवि शिव कुमार शर्मा ने कहा कि कोठारी ने पौत्री के माध्यम से अध्यात्म व दर्शन की चर्चा की है और वेदों का सार सामने रखा है। उन्होंने सुझाव दिया कि कोठारी कविताओं के साथ गीत भी लिखें। उन्होंने कहा कि आज गीत कम लिखे जा रहे हैं।

पाठ्यक्रमों से भी ऎसी गीतात्मक कविताएं गायब हो रही हैं। उन्होंने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि नई पीढ़ी में कविता के प्रति आसक्ति नहीं है, जबकि पहले जो गीत लिखे जाते थे, खासतौर पर जो गीत हम बचपन में किताबों में पढ़ते थे, वे हमें आज भी याद हैं। शर्मा ने पत्रिका समूह के संस्थापक कर्पूर चंद्र कुलिश को याद करते हुए कहा कि कुलिश ने मेरे माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें हिन्दू को परिभाषित करने और बिना कोई संशोधन किए चित्रित संविधान को सामान्य संविधान में बदलने के बारे में आपत्ति की गई थी।

पुस्तक का परिचय देते हुए वेद विज्ञानी और जैन दर्शन के विद्वान दयानंद भार्गव विपुल ने कहा कि अपनी पोती को कविता की नायिका बना कर कोठारी ने सृष्टि की रचना का मंत्र दिया है और जीवन के रहस्यों की बात की है। ऎसा प्रयोग साहित्य में अन्यत्र देखने को नहीं मिलता है। पौत्री आद्या और कविता आद्या का सृजन साथ-साथ चलता है। उन्होंने कहा कि ये कविताएं हिन्दी में जरूर हैं, लेकिन इन पर वैदिक दृष्टि की छाया नजर आती है। भारतीय चिंतन में सृष्टि सृष्टा से भिन्न नहीं है। सृष्टि के किसी भी घटक की स्तुति सृष्टा की ही स्तुति है। आद्या सृष्टि का ही एक घटक है जिसे कोठारी कवि दृष्ट से देख रहे हैं और उसके माध्यम से वेदों, उपनिषदों का ज्ञान हमारे समक्ष ला रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जिस तरह गुलाब के कई रंग होते हैं, उसी तरह गुलाब कोठारी जब साधक होते हैं तो सफेद हो जाते हैं और जब बच्चों के साथ होते हैं तो गुलाबी और गुलाब के साथ कांटा भी होता है, इसलिए जब वे सम्पादकीय लिखते हैं तो कांटे की तरह काम करते हैं और किसी का भी फूला हुआ गुब्बारा पिचका देते हैं।

प्रारम्भ में पत्रिका समूह के प्रधान सम्पादक गुलाब कोठारी, डिप्टी एडीटर भुवनेश जैन, रीडर्स एडीटर आनंद जोशी ने अतिथियों का स्वागत किया। अंत में निदेशक एचपी तिवाड़ी ने स्मृति चिह्न भेंट किए। समारोह का संचालन डिप्टी एडीटर सुकुमार वर्मा ने किया..

रपट पत्रिका से साभार 
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