आयोजन रूपरेखा:-''कविता समय'',ग्वालियर - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

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आयोजन रूपरेखा:-''कविता समय'',ग्वालियर








आगामी 25-26 फरवरी को ग्वालियर में  दख़ल विचार मंच तथा प्रतिलिपि पत्रिका के सहयोग से समकालीन कविता पर केन्द्रित एक राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘कविता समय’ का आयोजन  पड़ाव स्थित कला वीथिका में  किया जा रहा है। कविता का यूटोपिया और संकटविषय पर केन्द्रित इस आयोजन में देश भर के कवि तथा आलोचक हिस्सा लेंगे। देश भर में अपनी तरह के इस अनूठे दो दिवसीय आयोजन में नामवर सिंह, अशोक बाजपेयी, ज्ञानेन्द्रपति, आलोक धन्वा, वीरेन डंगवाल, अरुण कमल, नरेश अग्रवाल, राजेश जोशी, असद जैदी, कुमार अंबुज, लीलाधर मंडलोई, मदन कश्यप, बोधिसत्व, जितेन्द्र श्रीवास्तव,  गिरिराज किराडू, पंकज राग, गीत चतुर्वेदी सहित चालीस से अधिक कवि तथा आलोचक हिस्सेदारी करेंगे। इस दौरान न केवल समकालीन कविता की चुनौतियों तथा संकटों पर गहन विचार विमर्श होगा अपितु 25 से अधिक कवियों का विभिन्न सत्रों के काव्यपाठ भी होगा। ज्ञातव्य है कि ग्वालियर से शुरु हो रही यह शृंखला प्रतिवर्ष अलग-अलग शहरों में आयोजित होगी।

इस आयोजन के दौरान शहर के युवा कलाकारों के लिये कविता पोस्टर की एक कार्यशाला जाने-माने कलाकार विनय अम्बर (जबलपुर) तथा पंकज दीक्षित (अशोकनगर) के निर्देशन में संपन्न होगी तथा इन कलाकारों की कविता पोस्टर प्रदर्शनियाँ भी लगाई जायेंगी। इसके अलावा शिल्पायन प्रकाशन, दिल्ली तथा प्रतिलिपि प्रकाशन, जयपुर अपनी पुस्तकों की प्रदर्शनियाँ भी लगायेंगे और जयपुर के जाने-माने युवा पेंटर तथा कवि अमित कल्ला कविता आधारित पेंटिग्स का प्रदर्शन भी करेंगे। 


आमंत्रित कवि तथा आलोचक गण

पच्चीस-छब्बीस फरवरी,2011
  1. नामवरसिंह
  2. अशोकबाजपेयी
  3. ज्ञानेन्द्रपति
  4. आलोकधन्वा
  5. नरेशसक्सेना
  6. वीरेन डंगवाल
  7. असद जैदी
  8. राजेश जोशी
  9. अरुण कमल
  10. दिनेश कुमार शुक्ल
  11. कुमार अंबुज
  12. नरेन्द्र जैन
  13. मदन कश्यप
  14. लीलाधर मंडलोई
  15. एकांत श्रीवास्तव
  16. विमल कुमार
  17. बोधिसत्व ( सदस्य, संयोजनसमिति)
  18. बद्रीनारायण
  19. पवन करण ( सदस्य, संयोजनसमिति)
  20. सिद्धेश्वर सिंह
  21. हरिओम राजोरिया
  22. शरद कोकास
  23. प्रियंकर पालीवाल
  24. निरंजन श्रोत्रिय
  25. नरेश चंद्रकर
  26. विवेकगुप्ता
  27. प्रेमचंद गांधी
  28. जितेन्द्र श्रीवास्तव
  29. शिरीष कुमार मौर्य
  30. आशीष त्रिपाठी
  31. गिरिराज किराडू ( सदस्य, संयोजनसमिति)
  32. बहादुर पटेल
  33. अरुण शीतांश
  34. पंकज पाराशर
  35. संजय कुंदन
  36. पीयूष दईया
  37. केशव तिवारी
  38. यतीन्द्र मिश्र
  39. अजेय
  40. हेमंत कुकरेती
  41. गीत चतुर्वेदी
  42. अरुणदेव
  43. आर चेतनक्रांति
  44. अंशु मालवीय
  45. व्योमेश शुक्ल
  46. उमाशंकर चौधरी
  47. कुमार अनुपम
  48. रविकांत
  49. अंशुल त्रिपाठी
  50. हरे प्रकाश उपाध्याय
  51. विशाल श्रीवास्तव
  52. बिमलेश त्रिपाठी
  53. महेश वर्मा
  54. निशांत
  55. ज्योति चावला
  56. प्रभात
  57. संध्या नवोदिता
  58. पवनमेराज
  59. अशोक कुमार पाण्डेय ( सदस्य, संयोजन समिति)


पूरी दुनिया के साहित्य और समाज में कविता की जगह न सिर्फ कम हुई है उसके बारे में यह मिथ भी तेजी से फैला है कि वह इस बदली हुई दुनिया को व्यक्त करने, उसे बदलने के लिए अनुपयुक्त और भयावह रूप से अपर्याप्त है. खुद साहित्य और प्रकाशन की दुनिया के भीतर कथा साहित्य को अभूतपूर्व विश्वव्यापी केन्द्रीयता पिछले दो दशकों से मिली है. एक अरसे तक कविता-केन्द्रित  रहे हिंदी परिदृश्य में भी कविता के सामने प्रकाशन और पठन की चुनौतियाँ कुछ इस तरह और इस कदर दरपेश हैं कि हिंदी कविता से जुड़ा हर दूसरा व्यक्ति उसके बारे में अनवरत ‘संकट की भाषा’ में बात करता हुआ नज़र आता है.  लेकिन मुख्यधारा प्रकाशन द्वारा प्रस्तुत और बहुत हद तक उसके द्वारा नियंत्रित इस ‘चित्रण’ के बरक्स ब्लॉग, कविता पाठों और अन्य वैकल्पिक मंचों पर कविता की  लोकप्रियता, अपरिहार्यता  और असर हमें विवश करता है कि हम इस बहुप्रचारित ‘संकट’ की एक खरी और निर्मम पड़ताल करें और यह जानने कि कोशिश करें कि यह कितना वास्तविक है और कितना  बाज़ार द्वारा  नियंत्रित एक मिथ. और यदि यह साहित्य के बाज़ार की एक ‘वास्तविकता’ है तो भी न सिर्फ इसका प्रतिकार किया जाना बल्कि उस प्रतिकार के लिए जगह बनाना, उसकी नित नयी विधियाँ और अवसर खोजना और उन्हें क्रियान्वित करना कविता से जुड़े हर कार्यकर्ता का - पाठक, कवि और आलोचक – का साहित्यिक, सामाजिक और राज(नैतिक) कर्त्तव्य है.

दखल विचार मंच और प्रतिलिपि द्वारा की गई पहल “कविता समय”  का उद्घाटन-आयोजन २५-२६ फरवरी को ग्वालियर में हो रहा है और इसका उद्देश्य इन सभी दिशाओं में विचार विमर्श और कार्रवाई करने का है. इस दो दिवसीय आयोजन में  ‘कविता के संकट’ के विभिन्न पहलुओं पर जिरह और कविता पाठ के कई सत्रों अलावा कविता प्रकाशन के वैकल्पिक अवसरों पर एक ठोस कार्य-योजना घोषित की जाएगी.
सहभागिता के आधार पर हो रहे इस  आयोजन में भाग लेने के लिए देशभर के पचास कवि-आलोचकों की सहमति प्राप्त हो चुकी है जो संकेत है कि इस आयोजन को लेकर हिंदी जगत में उत्सुकता और उत्साह है और हम इस आयोजन से कुछ ठोस परिणामों की उम्मीद कर सकते हैं. आगंतुक लेखकों में जहाँ एक ओर नामवर सिंह, अशोक बाजपेयी, ज्ञानेन्द्रपति, आलोक धन्वा, वीरेन डंगवाल, मंगलेश डबराल, नरेश सक्सेना, राजेश जोशी, असद जैदी, कुमार अंबुज, लीलाधर मंडलोई, मदन कश्यप, सविता सिंह, सुमन केसरी जैसे वरिष्ठ हैं वहीँ दूसरी तरफ विशाल  श्रीवास्तव, महेश वर्मा, पवन मेराज, संध्या नवोदिता, ज्योति चावला जैसे नवागंतुक भी शामिल हैं.  दिल्ली के फिल्मकार नितिन पमनानी पूरे आयोजन पर आधारित एक फिल्म का निर्माण कर रहे हैं और जयपुर से आ रहे चित्रकार अमित कल्ला इस पूरे आयोजन के दौरान कविताओं पर केन्द्रित पेंटिंग बनायेंगे और  जबलपुर से आये कलाकार विनय अम्बर तथा अशोकनगर के पंकज दीक्षित कविता-पोस्टर प्रदर्शनी लगायेंगे. आयोजन के दौरान एक पुस्तक प्रदर्शनी भी आयोजित की जा रही है जिसमें शिल्पायन, प्रतिलिपि बुक्स और अन्य प्रकाशनों की किताबें उपलब्ध रहेंगी


सूचना स्त्रोत:-अशोक कुमार पाण्डेय 

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