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रपट:-कुमार अजय के कविता संग्रह ‘संजीवणी’ का विमोचन,चुरू

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on गुरुवार, जनवरी 27, 2011 | गुरुवार, जनवरी 27, 2011

चूरू, 5 फरवरी। 
कुमार अजय 
भारत सरकार की साहित्य अकादेमी नई दिल्ली से प्रकाशित राजस्थानी के युवा साहित्यकार कुमार अजय के कविता संग्रह ‘संजीवणी’ का विमोचन शनिवार को सूचना केंद्र में प्रयास संस्थान की ओर से आयोजित समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार पद्मश्री डॉ चंद्रप्रकाश देवल ने किया। 

इस मौके पर डॉ देवल ने कहा कि साहित्यकार का मन समाज की दशा और दिशा पर पसीजता है, झुलसता है और रोता है, तब किसी रचना की उत्पत्ति होती है। वह किसी फायदे के लिए नहीं लिखता है, यही कारण है कि समाज में साहित्यकार को युगों-युगों तक याद किया जाता है। उन्होंने सुकरात और पाणिनी का उदाहरण देते नए रचनाधर्मियों को हिदायत दी कि उनमें अंतिम क्षण तक सीखने की ललक होनी चाहिए और चाहे कैसी भी परिस्थितियां हो, साहित्यकार को सच, नीति और न्याय के पक्ष में खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्थानी में किसी भी नई रचना और पोथी को देखकर उनका खून बढता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ भाषाविद सुनीति कुमार चाटुर्ज्या ने राजस्थानी को उत्कृष्ट भाषा माना था। राजस्थानी में अद्भुत सामर्थ्य है लेकिन दुर्भाग्य से यही भाषा मान्यता को तरस रही है। उन्होंने कहा कि राजस्थानी की मान्यता हमारी अस्मिता का सवाल है और लोकतंत्र का तकाजा है। उन्होंने कहा कि आजादी की जंग में राजस्थान ने अगणित योद्धा दिए हैं। आजादी के बाद भी देश की हिफाजत के लिए शहीद होने वाले लोगों में सर्वाधिक संख्या राजस्थानियों की है, फिर भाषा की मान्यता के नाम पर हमें पीछे क्यों धकेला जाता है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के लोगों ने अपने आत्मोत्सर्ग से वीर रस की अभिव्यक्ति दी है, ऐसा उदारहण दुनिया की किसी दूसरी भाषा में नहीं मिलता। 

डॉ मुमताज अली की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रख्यात साहित्यकार त्रिभुवन ने कहा कि पाकिस्तान सहित दुनिया के कई देशों में राजस्थानी बोली जाती है  और राजस्थानी का साहित्य बड़ा ही अद्भुत है। उन्होंने कहा कि राजस्थानी के शब्दों की अभिव्यक्ति क्षमता देखकर दुनिया भर के भाषाविद चकित रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान के लोगों और राजनेताओं को राजस्थानी की मान्यता का संकल्प लेना होगा। 
विशिष्ट अतिथि अतिरिक्त कलक्टर बी एल मेहरड़ा ने कहा कि कलम की ताकत तलवार से भी अधिक मानी गई है और साहित्य समाज को राह दिखाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शीघ्र ही राजस्थानी को संविधान की आठवीं अनुसूची मे मान्यता मिल जाएगी। विशिष्ट अतिथि चूरू प्रधान रणजीत सातड़ा ने कहा कि राजस्थानी की मान्यता के लिए युवाओं को आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्थान के साहित्यकारों ने दुनियाभर में अपने साहित्य की छाप छोड़ी है। 

विमोचित पुस्तक की समीक्षा प्रस्तुत करते हुए युवा साहित्यकार राजीव स्वामी ने कहा कि ‘संजीवणी’ एक रचनाकार के निजी संघर्षों और कड़वे-मीठे अनुभवों का सार्वजनिक बयान है। उन्होंने कहा कि अजय की प्रत्येक रचना कवि की उसके परिवेश के प्रति चौकन्नी नजर की परिचायक है। 
अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रयास संस्थान के संरक्षक भंवर सिंह सामौर ने कहा कि डॉ देवल ने राजस्थानी साहित्य को समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि कुमार अजय की पहली ही पुस्तक की रचनाओं में काफी परिपक्वता दिखाई दे रही है। बैजनाथ पंवार ने आभार जताया। प्रयास के अध्यक्ष दुलाराम सहारण ने अतिथियों का परिचय दिया। 

इस मौके पर मुख्य अतिथि डॉ देवल को हाल में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान की घोषणा के उललक्ष्य में साफा बांधकर व शॉल, साफा, श्रीफल, प्रतीक चिन्ह व मान पत्रा देकर सम्मानित किया गया। विभिन्न संस्थाओं की ओर से डॉ देवल का स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संचालन कमल शर्मा ने किया। 

इससे पूर्व दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। सुरेंद्र पारीक रोहित ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी रामप्रसाद शर्मा, रामगोपाल बहड़, पत्राकार गुरुदार भारती,  दुलाराम सहारण, हरिसिंह सहारण, महावीर सिंह नेहरा, धर्मपाल शर्मा, चिमनाराम, सुधींद्र शर्मा सुधि,  बीरबल नोखवाल, सीताराम जांगिड़, श्याम सुंदर शर्मा ने माल्यार्पण का अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर पत्रकार माधव शर्मा, नारायण कुमार मेघवाल, बन्नेखां, सुनीता दादरवाल सहित बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, साहित्यकार, पत्राकार एवं नागरिक मौजूद थे।
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