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रपट:-''लोकतंत्र मज़बूती की ओर है'':डॉ. संजय कुमार के व्याख्यान उदयपुर में -नन्द किशोर शर्मा

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on शुक्रवार, जनवरी 28, 2011 | शुक्रवार, जनवरी 28, 2011

उदयपुर, 19 फरवरी
पहला:-
बिहार विधान सभा के चुनावों में जदयू गठबन्धन की जीत कानून व्यवस्था, सड़क निर्माण, प्रशासन की स्वच्छ छवी और भ्रष्टाचार में आ रही कमी का परिणाम थी। उक्त विचार विकासशील समाज अध्ययन पीठ नयी दिल्ली के फैलो डॉ. संजय कुमार ने डॉ. मोहनसिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा आयोजित ‘‘ बिहार चुनाव 2010 के परिणाम’’ विषयक व्याख्यान में व्यक्त किये । 

कुमार ने व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करते हुये बतलाया कि बिहार मे सम्पन्न विधान सभा चुनाव में विकास एक बड़ा मुद्दा रहा वरन  सत्तारूढ़ सरकार के नेता की स्वच्छ छवी और कार्यप्रणाली को भी लोगों ने पसन्द किया। राष्ट्रीय स्तर पर नीतिश कुमार का आकलन करते हुये कहा कि विगत 2 वर्षो में हुये विधानसभा चुनावों में जीते सत्तारूढ़ मुख्यमंत्रियों में नीतिश की लोकप्रियता सबसे ज्यादा है। नीतिश की महादलित समर्थक नीतियों ने बिहार 2010 चुनाओं में जीत दिलवाई।

 प्रश्नों के उत्तर देते हुए डॉ. संजय ने बताया कि बिहार में रहने वाले लोगों एवं राष्ट्रीय स्तर पर बिहार के बारे में सोच में बदलाव आया है। अब लोग मानने लगे है कि बिहार विकास के मार्ग पर बढ़ रहा है। रविभण्डारी, हिम्मत सेठ, एस.एल. गोदावत, ईस्माईल दुर्गा, बसन्तीलाल फूकडा आदि ने व्याख्यान पश्चात् चर्चा में भाग लिया। व्याख्यान के प्रारम्भ में सुखाड़िया विश्वविद्यालय के प्रो. संजयलोढ़ा ने स्वागत करते हुयें बिहार विधान सभा 2010 परिणामों पर विचार व्यक्त किये।संयोजन ट्रस्ट सचिव नन्द किशोर शर्मा ने किया। धन्यवाद ट्रस्ट अध्यक्ष विजय मेहता ने ज्ञापित किया। 
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दूजा व्याख्यान 

देश में दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों  भाजपा व कांग्रेस के जनाधार में व्यापक परिवर्तन हो रहे हैं। पारंपरिक रूप से ब्राह्मण व अन्य उच्च वर्ग के वोट भाजपा को मिला करते थे, लेकिन वर्ष 2009 के चुनाव नतीजों में भाजपा के प्रति समर्थन घटा है।विकासशील समाज अध्ययन पीठ के फैलो संजय कुमार ने यह बात ‘भारतीय राजनीति में राजनीतिक दलों का बदलता सामाजिक आधार’ विषयक व्यायानमाला में मु य वक्ता के रूप में कही। उन्होंने राजस्थान के संदर्भ में बताया कि प्रदेश में ब्राह्मण एवं अन्य उच्च वर्ग आज भी भाजपा को ही वोट करते हैं। जबकि सर्वेक्षण के मुताबिक राजस्थान के जाट मतदाता दोनों राजनीतिक दलों के मध्य बंटे हुए हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता भी दोनों दलों में बंटे थे, लेकिन वर्ष 09 के चुनावों के बाद इस इस वर्ग का रुझान कांग्रेस की तरफ हुआ है। 

अगर कांग्रेस के मुकाबले कोई क्षेत्रीय दल आ जाए तो इसका फायदा उस दल को मिल जाता है। देश के अन्य राज्यों पर संजय कुमारने बताया कि पिछले दस वर्षों में बहुजन समाज पार्टी का जनाधार भी बढ़ा है। कांगे्रस को बसपा से दलित वोट बैंक को लेकर टक्कर मिली है। उन्होंने कहा कि देश के जिन इलाकों में प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला होता है वहां दलितों का समर्थन कांग्रेस को मिलता है,लेकिन जिन इलाकों में क्षेत्रीय दल आ गए हैं यह समर्थन उस ओर जाता प्रतीत हो रहा है। वर्ष 09 के बाद यह समर्थक वर्ग थोड़े प्रतिशत में क्षेत्रीय दलों की ओर आकर्षित हुआ है। मुस्लिम मतदाताओं के संदर्भ में सर्वेक्षण में यह तथ्य भी सामने आयाहै कि मुस्लिम वोट बैंक का रुझान भी कुछ हद तक क्षेत्रीय दलों की तरफ हुआ है। आर्थिक वर्गों पर संजय कुमार नेकहा क उच्च व मध्यम वर्ग का भाजपा का जनाधार वर्ष 09 से घटता लग रहा है एवं इसका फायदाकांग्रेस को मिला है। वर्ष 99 व 2004 में युवा मतदाता वर्ग में भाजपा के प्रति रुझान बढ़ा था जोवर्ष 09 में पुन: घट गया।

साइंस कॉलेज के डीन प्रो.मधुसूदन शर्मा ने बताया कि भारतीय लोकतंत्र काफी परिप व हो गया है तथा आने वाले समय में जाति, धर्म की बजाय आर्थिक मुद्दे, पर्यावरण,रोजगार से संबंधित मुद्दे चुनाव के आधार होंगे। कार्यक्रम में भाजपा के धर्मनारायण जोशी, डा. मीना गौड़,डा. नफीसा हातिमी, नरेश भार्गव ने भी विचार रखें। प्रो. जैनब बानू ने अतिथियों का स्वागत किया तथा कार्यक्रम का संचालन डा. संजय लोढ़ा ने किया।

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