कवितायन:-डॉ. सत्यनारायण व्यास,चित्तौड़गढ़ - अपनी माटी

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गुरुवार, जनवरी 27, 2011

कवितायन:-डॉ. सत्यनारायण व्यास,चित्तौड़गढ़

सन दो हज़ार चार में निधि प्रकाशन,8,पासवान जी का रास्ता,रावजी का हाता,उदयपुर-313001 से छपे उनके कविता संग्रह ''देह के उजाले में'' से .व्यास जी का संपर्क सूत्र:-29,छ्तरीवाली खान,सैंथी,चित्तौडगढ 01472-241532 है.
बिम्ब रचती प्रकृति

कुहरे का कम्बल ओढ़े
अधलेटे पहाड़ की गोद में 
अठखेली करता है
भोर का सूरज,
ओस के पानी से मुंह धोकर पत्तियां
स्कूल की बच्चियों सी कुनमुनाती है

किलकिला पक्षी का नीला रूमाल बाँध
तालाब में झाँकता आवारा पेड़
डरती हैं मछलियाँ
काँप उठतीं हमदर्दी से
नीले मोतियों-सी छोटे फूलों की
पानी पर लेटी बेल

हरी काई के डेक पर
नौसेना की परेड-सा
सारसों का दल
टिटहरी के तीखे बैंड की धुन पर
कवायद करता है,
उजली धूप में  तने हुए ठहरे-से पंखों पर उमड़ा
बगुलों का झुण्ड
जाता है ड्यूटी पर

गयी रात के पदचिन्हों को मिटाती
चल पड़ी है अनगिन
पांवों की जोड़ियाँ
धूल के शाश्वत ग्रन्थ पर
अपना इतिहास लिखतीं

तालाब के पार खेतों में
लहराता है
हर साल संसद में पेश होने वाला 
घाटे का बजट,
हँसता है
पास की नंगी पहाड़ी पर  बैठा गिद्ध 
ख़ूनसनी चोंच पत्थर पर रगड़
डैने फड़फड़ाते हुए

कम से कमतर होता तालाब का पानी
हर रोज़ उगल देता है
कुछ और मरे घोंघे
कींचड़ सने शंख-सीपी
और सड़े हुए डंठल 

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