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बुधवार, जनवरी 05, 2011

आयोजन रपट:-''सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखना जरूरी'':- शेखावत

तारानगर। 
''राजस्थान की एक समृद्ध लोक परम्परा है जिसमें गीत, संगीत एवं नृत्य मोती रूप में जड़े हैं। आज सबसे जरूरी है कि हम अपनी इस परम्परा को जिंदा रखें और समुचित प्रोत्साहन देते हुए अपना प्रदेश की पहचान को कायम रखा जाए। राजस्थान ही वह प्रदेश है जो सम्पूर्ण विश्व में स्थापत्य, संस्कृति एवं लोककला के बूते पर अपना विशिष्ट स्थान रखता है तथा पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है।''

उक्त विचार मंगलवार रात स्थानीय चौधरी अतिथि गृह रंगमंच पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या अपणायत में जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं शिक्षाविद डॉ. लोकेश शेखावत ने व्यक्त किए। शेखावत ने प्रयास संस्थान और राजस्थान संगीत, नाटक अकादमी के इस आयोजन की उपादेयता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि थली अंचल का भी राजस्थानी संस्कृति में अपना विशिष्ट योगदान है। आज युवा पीढ़ी सांस्कृतिक दिशा में मन से काम कर रही है, उल्लेखनीय यही है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए नगरपालिका अध्यक्ष जसवंत स्वामी ने कहा कि हमारा लोक ही वह थाति है जिसके कारण हम विशिष्ट बने हुए हैं। लोक का हम हिस्सा हैं अतएव हमारा दायित्व बनता है कि हम लोक संस्कृति के विभिन्न रूपों को जिंदा रखें तथा प्रोत्साहन के लिए आगे आएं। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि साहित्यकार भंवरसिंह सामौर, बीआरजीबी प्रबंधक ओमप्रकाश गोस्वामी, समाजसेविका कलावती टोकसिया, हौम्योपैथ डॉ. अमरंिसह शेखावत, संन्यास आश्रम के स्वामी रतनदास महाराज ने भी राजस्थानी संस्कृति के स्वरूप को बचाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के आगे दीप प्रज्जलन से शुरू हुए कार्यक्रम में जोधपुर के बूंदु खां लंगा व साथियों ने लोकगीत गायन एवं खड़ताल वादन, अलवर के उमर फारूख ने भपंग वादन, पादरला-पाली के मूलदास एवं साथियों ने तेरहताली नृत्य, किशनगढ़ के वीरेन्द्रसिंह व साथियों ने घूमर एवं चरी नृत्य, जोधपुर की मोहनी देवी व रूपनाथ ने भवाई नृत्य, डीग-भरतपुर के अशोक शर्मा व साथियों ने मयूर नृत्य तथा जोधपुर के पारसनाथ व साथियों ने कालबेलिया नृत्य की प्रस्तुति देकर सांस्कृतिक संध्या में रंग जमाए। 

कार्यक्रम संयोजक विश्वनाथ भाटी ने शाब्दिक तथा पवन कुमार जैन भाया, सुनील बुंदेला, डूंगरराम गोदारा, सुरेन्द्र स्वामी, नरेन्द्र भाटी, किशोर निर्वाण, देवकरण जोशी, हरिसिंह सिरसला, लच्छीराम एडवोकेट, दिलीप लखारा, ने माल्यार्पण कर अतिथियों का स्वागत किया। प्रयास संस्थान के अध्यक्ष दुलाराम सहारण ने धन्यवाद दिया। कार्यक्रम का संचालन आकाशवाणी जोधपुर के वरिष्ठ उद्घोषक भानु पुरोहित ने किया।

कड़ाके की ठण्ड में भी गर्म हुई शाम
सांस्कृतिक संध्या अपणायत में जब लोक कलाकार मंच पर आकर कला का जौहर दिखाने लगे तो उपस्थित जनमानस को कड़ाके की ठण्ड का आभास ही दूर हो गया। लगातार तालियों की गड़गड़ाहट ने वातावरण को ऊर्जायुक्त कर दिया और शरीरों में दौड़ रही सिहरन गायब-सी हो गई।

आठ साल की बाल कलाकार सुशीला की धाक
कालबेलिया नृत्य की कलात्मक लय को बखूबी समझते हुए जब जोधपुर की आठ साल की बालिका सुशीला मंच पर रंग जमाने लगी तो सबके के मुंह से वाह, वाह निकला। सुशीला की कला दर्शको को दंग कर गई तथा हरेक उज्ज्वल भविष्य को लेकर आशान्वित हुआ।

कांच की किरचियों ने बांधां समां
राजस्थान का परम्परागत भवाई नृत्य की प्रस्तुति में जोधपुर की मोहनी देवी ने जब सिर पर मटकों का संतुलन बनाते हुए पैरों को कांच के गिलासों पर साधा तथा लयात्मक प्रवाह में उन्हें किरचियों में तब्दील किया तो दर्शक हतप्रभ रह गए। मोहनी देवी ने तलवारों की धार पर नाचकर तो मानो साधना का सबूत प्रस्तुत कर दिया।

रपट:-दुलाराम सहारण
अध्‍यक्ष
प्रयास संस्‍थान
चूरू 
9414327734

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