रपट:-दक्षिण एशिया के विशेषज्ञ दल की उदयपुर यात्रा - Apni Maati Quarterly E-Magazine

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रपट:-दक्षिण एशिया के विशेषज्ञ दल की उदयपुर यात्रा

उदयपुर । 
ब्रिटेन, श्रीलंका, वियतनाम, नेपाल तथा भारत के चुनिंदा 20 युवा पर्यावरण विशेषज्ञों के दल की राय हैं कि यदि उदयपुर के विस्तार व शहरीकरण में पर्यावरण की उपेक्षा जारी रही तो शहर रहने व जीने लायक नहीं रह जायेगा। विश्व विख्यात संस्था सेंटर फॉर साइंस एण्ड एनवायरमेट, नई दिल्ली के तत्वावधान में दो दिवसीय प्रवास पर आया यह दल भारत के चुनिंदा शहरो की विकासात्मक समस्याओं का अध्ययन कर रहा  हैं। दल को सम्बोधित करते हुए पूर्व विदेश सचिव जगत मेहता ने कहा कि वर्तमान व भावी पीढ़ियों को बचाने के लिए उदयपुर के पानी व पहाड़ों का संरक्षण जरूरी है। भारत सहित पूरे दक्षिण एशिया में जंगलो के बडे़ पैमाने पर हुए विनाश ने सम्पूर्ण क्षैत्र की पर्यावरण स्थिति को बदल दिया है। विकास एवं पर्यावरण में संतुलन बनाये रखना एक बड़ी चुनौती है जिससे पानी व जंगल को बचाकर ही निपटा जा सकता है।

दल ने डा. मोहनसिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट के तत्वावधान में सिटी पैलेस तथा ट्रस्ट कार्यालय में विशेषज्ञों से मुलाकात की तथा उदयपुर के बदलते परिवेश को समझा। भीलों का बेदला स्थित 400 एकड़ में फैले विद्या भवन प्रकृति साधना केन्द्र में रूक कर सर्वप्रथम दल ने उदयपुर के मूल पर्यावरण को समझने का प्रयास किया तथा विगत दो दिनों में शहर के बढ़ते हुए विस्तार, मार्बल स्लरी डम्पिंग यार्ड, आयड़ नदी, पिछोला, फतहसागर झीलों का गम्भीरता से अध्ययन किया।
ट्रस्ट कार्यालय में स्थित परिचर्चा में अतिरिक्त आबकारी आयुक्त सुमतिलाल बोहरा ने कहा कि प्राथमिक कक्षाओं से ही पर्यावरण शिक्षा देने के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पश्चात पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ी है। विद्याभवन सोसायटी के अध्यक्ष रियाज़ तहसीन ने कहा कि प्रकृति के साथ रह कर ही पर्यावरणीय शिक्षा दी जा सकती है। विद्याभवन प्रकृति साधना केन्द्र इसी दिशा में एक कदम है। 

सिटी पेलेस में महाराणा मेवाड़ चेरिटेबल फाउण्डेशन के आयोजकत्व में उदयपुर की पर्यावरण स्थिति में हुए बदलाव विषयक परिचर्चा में सरोवर विज्ञानी डा. एल.एल. शर्मा ने कहा कि विगत 30 वर्षो में उदयपुर में भारी मात्रा में वायु व ध्वनि प्रदूषण बढ़ा है। जिसकी परीणिति गम्भीर बीमारियों में हो रही है। फाउण्डेशन के सचिव भूपेन्द्र सिंह आहुवा ने उदयपुर के इतिहास का परिचय प्रस्तुत करते हुए कहा कि यहां राणाओं ने पानी के संरक्षण पर सर्वाधिक ध्यान दिया तथा परस्पर जुड़े झीलों, नदियों, तालाबों  के बेहतरीन जल प्रबंधन तंत्र को विकसित किया। ट्रस्ट सचिव नन्दकिशोर शर्मा ने पर्यावरण को बचाने में उदयपुर की स्वैच्छिक संस्था की भूमिका की जानकारी दी तथा डॉ. मोहनसिंह मेहता के योगदान का स्मरण किया। झील संरक्षण समिति के अनिल मेहता ने आयड़ ग्रीन ब्रिज योजना पर प्रस्तुतीकरण देते हुए कहा कि उदयपुर में प्रशासन, संस्थाऐं, उद्योग तथा नागरिक आयड़ व झीलों को बचाने के लिए साथ कार्य कर रहे है पर इस संबंध व परस्परता को और अधिक मजबूत बनाने की जरूरत है। हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड की पर्यावरण प्रबंधक डॉ. फातिमा लियाकत ने जल प्रदूषण के आंकड़ो तथा पर्यावरणीय सुधार के तरीकों से अवगत कराया। दल के प्रमुख आदित्य एवं शर्मिला सिन्हा ने उदयपुर के अनुभव से अवगत कराया।

दल ने तेजशंकर पालीवाल, भंवरसिंह राजावत के नेतृत्व में सिटी पेलेस से लाल घाट, गणगौर घाट, चांदपोल क्षेत्र में पिछोला की स्थिति को जाना तथा गडिया देवरा क्षैत्र में सिवरेज की समस्या पर चिंता व्यक्त की। 
दल ने चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स इण्ड्रस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष रमेश चौधरी, हिन्दुस्तान जिंक के पूर्व खनन निदेशक एच.वी. पालीवाल, राजनीतिक विज्ञानी अरूण चतुर्वेदी, वास्तुविद् बी.एल.मंत्री, समाज विज्ञानी हेमराज भाटी से भी संवाद किया तथा भविष्य के उदयपुर पर चर्चा की।

नन्दकिशोर शर्मा
9414160960
डा. मोहनसिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट का आयोजन

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