सम्मान:-कथाकार मैत्रेयी पुष्पा और मनोज रूपड़ा को ‘वनमाली सम्मान’ - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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सम्मान:-कथाकार मैत्रेयी पुष्पा और मनोज रूपड़ा को ‘वनमाली सम्मान’



सूचना:-विनय उपाध्याय, 
संयोजक
वनमाली सृजन पीठ, 
भोपाल द्वारा जारी
संपर्क - 09826392428 


भारत भवन में पांच मार्च को होगा राष्ट्रीय अलंकरण प्रसंग कथा विमर्श, रचना पाठ, संस्मरण, कहानी और कविता मंचन के सत्र होंगे । साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में समान रूप से सक्रिय वनमाली सृजन पीठ द्वारा स्थापित ‘वनमाली सम्मान’ प्रख्यात उपन्यासकार सुश्री मैत्रेयी पुष्पा को उनके समग्र लेखकीय अवदान तथा सुपरिचित युवा कथाकार मनोज रूपड़ा को कहानी लेखन के लिए दिया जाएगा। हिन्दी के समकालीन रचना परिदृश्य में इन दोनों लेखकों ने अपने समय के अहम सवालों और चिंताओं को अपनी कृतियों में बेबाकी से मुखरित किया है। वनमाली सम्मान ५ मार्च को भारत भवन में आयोजित गरिमामय समारोह में भेंट किया जाएगा। समग्र लेखन के लिए सम्मान स्वरूप 51,000/- रूपए की राशि और प्रशस्ति तथा युवा कहानी लेखन के लिए 31,000/- रूपए की राशि और प्रशस्ति भेंट की जाती है।

मैत्रेयी पुष्पा 
सम्मान की निर्णायक जूरी में कवि-आलोचक राजेश जोशी, कथाकार मुकेश वर्मा, आलोचक रामप्रकाश त्रिपाठी, कवि-पत्रकार महेन्द्र गगन तथा वनमाली सृजन पीठ के अध्यक्ष-उपन्यास लेखक संतोष चौबे शामिल थे। सृजन पीठ के संयोजक विनय उपाध्याय के अनुसार सम्मान अलंकरण के साथ ही 4 से 6 मार्च तक भारत भवन (भोपाल) में कथा विमर्श, रचना पाठ, वनमाली संस्मरण प्रसंग और कहानी तथा कविता यात्रा के मंचन जैसी सृजनात्मक गतिविधियां होंगी। इस अवसर पर विभिन्न आयामों पर एकाग्र वनमाली स्मृति ग्रंथ के साथ ही कथाकार संतोष चौबे द्वारा सम्पादित समकालीन कहानी आलोचना के वैचारिक पहलुओं पर एकाग्र पुस्तक का लोकार्पण भी किया जाएगा। इसी के साथ रंगमंचीय कलाओं पर केन्द्रित ‘रंग संवाद’ का नया अंक भी जारी होगा। उल्लेखनीय है कि वनमाली के नाम से चालीस से साठ के दशक में हिन्दी कथा जगत के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर रहे जगन्नाथ प्रसाद चौबे की स्मृति में सृजन पीठ की स्थापना भोपाल में की गई है। ‘वनमाली सम्मान’ की स्थापना

उनके कृती-व्यक्तित्व और सर्जनात्मक योगदान के प्रति आरदपरक स्मृति का प्रतीक है। पूर्व में अस़गर वज़ाहत,स्वयंप्रकाश, शशांक, उदयप्रकाश जैसे अप्रतिम कथाकार इस सम्मान से विभूषित किए जा चुके हैं। यह सम्मान प्रत्येक तीन वर्ष में दिया जाता है। राष्ट्रीय स्तर के इस सम्मान समारोह में देशभर से आये लेखक रचनाकार शामिल होंगे। अपने नौ उपन्यासों और तीन लघु कथा संग्रहों के साथ हिन्दी के मौजूदा परिवेश में प्रमुख उपस्थिति दर्ज करने वाले मैत्रेयी पुष्पा अपने लेखन में स्त्री विमर्श और मौलिक अधिकारों को लेकर बेलौस आवाज़ उठाती रही हैं। हिन्दी अकादेमी दिल्ली के साहित्य कृति सम्मान सहित एक दर्जन से भी ज्यादा पुरस्कारों से अलंकृत मैत्रेयी की कृतियों ईसुरी फाग, त्रिया हठ, कस्तूरी कुण्डल बसे, बेतवा बहती रही, चाक, अलमा कबूतरी और अगनपाखी में कथा विषय वस्तु तथा शिल्पगत प्रयोग का नया फलक तैयार हुआ है। इन पुस्तकों ने पाठकों के बीच नया वैचारिक उद्वेलन पैदा किया है। उनकी कहानी ‘फैसला’ पर आधारित टेली फिल्म ‘वासुमति की चिट्ठी’ का निर्माण भी किया गया है।  

मनोज रूपड़ा
मनोज रूपड़ा कहानी लेखन में बिल्कुल नए आग्रहों के साथ प्रवेश करने वाले प्रतिभाशाली रचनाकार है। दो कहानी संग्रहों ‘दफन और अन्य कहानियां’ तथा ‘साज़ नासाज़’ के बाद उपन्यास ‘प्रति संसार’ ने उन्हें विशेष पहचान दी जिसे भारतीय ज्ञान पीठ ने प्रकाशित किया है। इस कृति में वे राजनीति और समाज से टकराते आवाम के ज्वलंत प्रश्नों और भूमंडलीकरण, सूचना क्रांति तथा बाज़ारवाद से घिरे मनुष्य की संवेदना की नई परिभाषा गढ़ते हैं। हाल ही उनकी चौथी पुस्तक ‘टावर ऑफ सायलेंस’ प्रतिलिपि प्रकाशन नई दिल्ली से आई है जिसमें श्री रूपड़ा ने गल्प का अद्भुत प्रयोग किया है।

(दोनों को 'अपनी माटी' परिवार की तरफ से हार्दिक शुभकामनाएं,और वनमाली सृजन पीठ के सतत सृजनशील बने रहने कामनाएं -सम्पादक )

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