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छायाचित्र और रपट:-जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल से डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on शनिवार, जनवरी 08, 2011 | शनिवार, जनवरी 08, 2011

डॉ. दुर्गा प्रसाद जी को पूरा माना देते हुए हम उनके सहयोग से इस उत्सव की कुछ ख़ास तस्वीरें यहाँ आपके लिए प्रकाशित कर रहे हैं.यदि आपके पास भी कुछ और छायाचित्र हो जो इस समारोह में लिए गए हों कृपया हमें यहाँ apnimaati.com@gmail.com भेजिएगा.



रपट सैजन्य:-
दैनिक भास्कर ,जयपुर
 देश-दुनिया में मशहूर जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का उद्घाटन शुक्रवार सुबह यहां डिग्गी पैलेस में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, सांसद डॉ. कर्णसिंह, पर्यटन मंत्री बीना काक और नामी साहित्यकारों ने दीप जलाकर किया। दैनिक भास्कर के सहयोग से आयोजित इस साहित्य मेले में दक्षिण एशिया के करीब डेढ़ सौ रचनाकार, साहित्यकार, कॉपरेरेट व फिल्म जगत की हस्तियां शरीक हो रही हैं।

पांच दिवसीय फेस्टिवल के पहले दिन 22 अलग अलग सत्रों में 50 से अधिक साहित्यकारों, रचनाकारों, गीतकारों व शायरों ने विभिन्न विषयों पर संवाद किया। सबसे अधिक रोमांच दैनिक भास्कर संवाद में रहा, जिसमें मशहूर गीतकार गुलजार और अनुवादक पवन वर्मा ने नज़्मों के साथ उनके अनुवाद के दौरान आने वाली दिक्कतों के बारे में बताया। इससे पहले फेस्टिवल के उद्घाटन में डॉ. सिंह ने कहा कि भारत की अद्वितीय सांस्कृतिक पृष्ठभूमि है। यहां की सभी 25 भाषाओं में साहित्य रचा जा रहा है, जैसा किसी और देश में नहीं। समृद्धि के इस स्तर पर कोई भी भाष छोटी-बड़ी नहीं होती, बल्कि अपने-अपने क्षेत्र की अपनी जुबान ही महत्वपूर्ण होती है।अगर सभी प्रांतीय भाषाओं को सम्मेलन का हिस्सा नहीं बनाया गया तो इसको सफल नहीं माना सकता। डॉ. सिंह ने कुछ कविताएं भी सुनाई। कोलंबिया यूनिवर्सिटी में संस्कृत के प्रोफेसर शैलेन पॉलोक ने कहा कि जयपुर में राजा जयसिंह द्वितीय के समय में बैठकें, गोष्ठियां और विभिन्न भाषाओं में चर्चा का माहौल था, जिसकी बदौलत राजस्थान का साहित्य, कला व संस्कृति समृद्ध है। पॉलोक ने वाल्मीकि रामायाण व अन्य संस्कृत साहित्य से कई संस्कृत श्लोक पढ़े और उनका भाव समझाया। उन्होंने कहा कि भारत में साहित्य एडवेंचर की तरह लिखा जाता है, जिसमें अच्छा इनसान बनने की सीख दी जाती है। 


अनुवादकों की कमी: डॉ. कर्ण सिंह ने कहा कि साहित्य बहुरंगी और बहुमुखी भी है, पर यहां अनुवादकों की कमी है। उनको बहुत काम की आवश्यकता है। गद्य और पद्य के बीच बड़ा अंतर है। गद्य पढ़ने और पद्य सुनने के लिए है और सुनने की क्षमता बहुत महत्व रखती है। 

यूनिवर्सिटी बने: पॉलोक ने कहा कि आईआईएम और आईआईटी की तरह यहां इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्लासिकल स्टडीज खोलने की भी संभावनाएं तलाशी जानी चाहिए। 

गुलजारमय हुआ माहौल: फेस्टिवल में दो सत्र दैनिक भास्कर संवाद के थे। एक में गुलजार और पवन वर्मा तथा दूसरे में नंद भारद्वाज, आईदान सिंह व सुमन बिस्सा ने नज्मों के अनुवाद व राजस्थानी संस्कृति पर संवाद किए। गुलजार ने कुछ दिलकश नज्में पढ़ीं और उनमें आने वाले जटिल व ठेठ ग्रामीण या भारतीय शब्दों के अनुवाद में आने वाली कठिनाइयों पर चर्चा की गई।



जैसे जैसे वे नज्में पढ़ते गए, श्रोताओं की दाद व तालियों से माहौल गुलजारमय हो गया। इसके अलावा पटकथा लेखक व शायर जावेद अख्तर ने उर्दू जुबान की अहमियत पर रौशनी डालते हुए उसको मजहबी नहीं इलाके वार बताया। अन्य सत्रों में पाकिस्तानी लेखक अली सेठी, उर्वशी बुटालिया, नमिता गोखले, नवतेज सरना, विश्वजीत सिंह, निरुपमा दत्त आदि ने अन्य विषयों पर चर्चा की।


नकवी को बड़ा सम्मान 
सबसे बड़ा साहित्य सम्मान डीएससी साउथ एशियन लिटरेचर अवार्ड पाकिस्तान के एच.एम. नकवी को उनकी पहली पुस्तक ‘होम बॉय’ के लिए दिया गया है। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में शनिवार शाम नकवी को 50 हजार डालर (करीब 22.59 लाख रुपए) का पुरस्कार डीएससी लि. के चेयरमैन एच. एस. नरूला ने दिया। डिग्गी पैलेस में दुनियाभर के साहित्यकारों के बीच पुरस्कार जूरी प्रमुख नीलांजना रॉय ने नकवी के नाम की घोषणा की।इस पुरस्कार के लिए पिछले दिनों ही अंतिम छह नामों की घोषणा की गई थी। इनमें अमित चौधरी, मुशर्रफ अली फारूकी, तानिया जेम्स, मंजू कपूर, नील मुखर्जी व एच.एम. नकवी शामिल थे। पुरस्कार प्राप्त करने के बाद नकवी ने कहा, वे गदगद हो उठे हैं।
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