Latest Article :
Home » , , , , » आमने-सामने:-कवि राजकुमार सचान ‘होरी’ से रिज़वान चंचल की बातचीत

आमने-सामने:-कवि राजकुमार सचान ‘होरी’ से रिज़वान चंचल की बातचीत

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on शनिवार, जनवरी 08, 2011 | शनिवार, जनवरी 08, 2011


(लोगों की भावनाओं को छूने और उनके विचारों को आंदोलित करने वाली कविता भले ही आज दुनिया भर में छोटे से वर्ग तक सिमटती जा रही है लेकिन समीक्षकों के अनुसार साहित्य की इस विधा का कोई विकल्प नहीं हो सकता । प्रस्तुत है कविता की भूमिका,महत्व व लोकप्रियता पर वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं प्रसाशनिक अधिकारी वर्तमान में अपर आयुक्त आजमगढ़ राजकुमार सचान ‘होरी’ से जनजागरण मीडिया मंच के महासचिव रिजवान चंचल द्वारा का गई वार्ता के प्रमुख अंश )

राजकुमार सचान  
होरी जी कविता का पाठक वर्ग कम होता जा रहा है ऐसा क्यों ? 
देखिये अच्छे काव्य को समाज के हर वर्ग तक लाने की जरूरत है कविता के पाठक को साहित्य में सहृदय कहा जाता है और यह वर्ग आज से नहीं कालिदास के समय से कम संख्या में ही रहा है। कविता के पाठकों में उस समय वृद्धि होती है जब कविता किसी आंदोलन से जुड़ जाती है। आजादी के आंदोलन के समय यही स्थिति उत्पन्न हुई और कविता लोगों से सीधे जुड़ गई। लेकिन इतिहास में ऐसे दौर अधिक समय तक नहीं चलते। आज हमारा समाज आंदोलन विहीन है इसलिए कविता भी एक सीमित वर्ग तक सिमट कर रह गई है। 

आधुनिक दौर के शीर्ष कवियों की रचनाओं को व उनके नाम तक से अधिकतर लोगों के परिचित नहीं होने के बारे में आपका क्या कहना है?
सचान ने कहा कि ऐसा नहीं है कवियों और उनकी रचनाओं को जानने वाले लोग छोटे-छोटे कस्बों तक में मिल जाते हैं भले ही उनकी संख्या कम हो। श्री सचान ने कहा कि जिस बाजारवाद की चर्चा आज समाज में प्रासंगिक हो उठी है कविता में आज से दो दशक पहले ही इसके बारे में चिंताएं प्रकट की जाने लगी थीं। उन्होंने कहा कि पुरानी पीढ़ी के कवियों के साथ भी यही स्थिति होती थी लेकिन चूंकि उनकी रचनाएं पाठ्यक्रमों में शामिल हैं इसलिए लोग उनके नामों से भलीभांति परिचित हैं। उन्होंने कहा कि बहुतों का यह मानना काफी हद तक सही है कि आज की कविता न तो उनकी भाषा में लिखी जा रही है न ही समसामयिक मुद्दे उठा रही है तथा संप्रेषणीयता का भी अभाव है।

वर्तमान में कविता के दो स्पष्ट वर्ग हैं धनाड्य वर्ग जिसकी कविता पत्र पत्रिकाओं में छाई हुई है व काव्य पुस्तक का रुप लिये हुये है दूसरा खास वर्ग वह जिनकी रचनायें एक सीमित दायरे  में ही पढ़ी और सराही जाती है ऐसे लोग जो विपन्नता के चलते न तो ज्यादा छप पाते है और न ही काव्य पुस्तक ही छपवा पाते हैं के प्रति आप का क्या दृस्टिकोण है?
जबाब में होरी ने  कहा कि पूर्व से ही यहां वाचिक कविता की लंबी परंपरा रही है। लेकिन आज इस परंपरा में भी काफी हद तक विकृतियां आई हैं मंचों पर लोग हास्य के नाम पर फूहड़ कविताएं और गीत सुना रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले आम स्कूल कालेजों में कवि सम्मेलनों का आयोजन होता था लेकिन आज इनका आयोजन बेहद महंगा हो जाने के कारण सिर्फ धनी वर्ग ही इन्हें आयोजित करवा पाता है यह बात सही है किन्तु धनी वर्ग की साहित्य में खास रूचि नहीं होती और आयोजकों की रूचि के अनुसार कवि सम्मेलनों में फूहड़ कविताओं का बोलबाला रहता है। उन्होंने कहा कि पत्र पत्रिकाओं रेडियो और टेलीविजन में कविता को अधिक स्थान देकर कविता को उसका सही स्थान दिलाया जा सकता है। 

बाकी पूरी बातचीत में जैसा मैंने उनको जाना:-
होरी के व्यंग पात्र हैं पत्रकार, सम्पादक, कवि व साहित्यकार:-साहित्य जगत में अनोखी पहचान बनाये खासकर काव्य मंचों की शोभा बढ़ा रहे स्थापित दोहाकार, व्यंग के सशक्त हस्ताक्षर, प्रशासनिक पद पर रहते हुए भी निर्भीक रचनाओं को प्रस्तुत करने वाले चर्चित कवि वर्तमान में अपर आयुक्त  राजकुमार सचान ‘होरी’ को पुरातन काव्य रचनाओं की घिसीपिटी मान्यताओं पर आज के परिवेश में सार्थकता के साथ प्रहार करते हुये सबने सुना है तथा उनकी 30 से अधिक प्रकाशित पुस्तकों में पढ़ा व पाया  गया है कि वे व्यंग रचनाओं में पूरी निर्भीकता के साथ किसी वर्ग को अनदेखा नहीं करते अब तक राजनेताओं पर राजनीति पर, समाज में व्याप्त कुरीतियों पर, समाज में बढ़ती अन्ग्रेजियत आदि पर व्यंग लेख प्रकाशित होते रहे हैं लेकिन राजकुमार सचान ‘होरी’ ने जो व्यंग लेख लिखे हैं वे उन लोगों पर हैं जो अब तक दूसरों पर व्यंग लेख लिखते रहे हैं। होरी के व्यंग पात्र हैं पत्रकार, सम्पादक, कम्पीजीटर, समीक्षक तथा लेखक कवि एवं साहित्यकार। 

निर्द्वंद कवि सचान इन तमाम विशेषताओं  को समेटे गद्य लेखक के रूप में भी काफी चर्चा में है। ‘काइकु’ के सम्पादन और हम भारत के लोग,हम कहां ,अनवरत , शब्द-शब्द के दंश सहित दर्जनो पुस्तकें वे लिख चुके है उन्होंने जहां पूर्व की भांति बच्चों के लिए सरल सुबोध कहानियां लिखी हैं वहीं उनके गम्भीर वैचारिक लेखों की भी उनकी कई किताबें प्रकाशित हई हैं। 

होरी की प्रेरणा से सामाजिक संस्थाओं सुखरानी फाउण्डेशन, व भारतीय राष्ट्र भाषा विकास संगठन ने मिल कर हिन्दी मनीषियों को सम्मानित कर हिन्दी साहित्य जगत को उत्साहित करने का भी पुनीत कार्य किया है। होरी ने हिन्दी जगत संकीर्ण नहीं हैं इसे अपनी पुस्तकों को उर्दू अनुवाद में प्रकाशित कर सिद्ध किया है और अब उर्दू शायरों को भी ‘होरी’ पत्रिका में स्थान देकर खुली विचार धारा का प्रमाण दे रहे है। अक्सर राजनेताओं व राजनीति , समाज में व्याप्त कुरीतियों आदि पर ही व्यंग लिखे जाते  रहे हैं लेकिन राजकुमार सचान ‘होरी’ ने जो व्यंग लेख लिखे हैं वे उन लोगों पर हैं जो अब तक दूसरों पर व्यंग लेख लिखते रहे हैं।  पत्रकार, सम्पादक, कम्पीजीटर, समीक्षक तथा लेखक कवि एवं साहित्यकार होरी के व्यंग पात्र हैं। यह होरी की ईमानदारी है कि व्यंग लेखन में उन्होंने स्वयं अपने आपको भी नहीं बक्शा न तो लेखक के रूप में और न अधिकारी के रूप में । जो व्यक्ति स्वयं को भी न छोडे़ उससे  अधिक स्पष्टवादी साहित्यकार कौन हो सकता है। उनके द्वारा ह्दय की बात को निर्भीक रूप से कह देना उनके भीतर छुपे साहित्यकार को दर्शाता देता है । देशज शब्दावली व मुहाबरों का प्रयोग उनको  साहित्यकार के रूप में प्रतिष्ठित करता है तथा विचारों को सरलता से सामान्य जगत से गहनता में उतार ले जाने वाला कौशल उनकी कलात्मक क्षमता एवं विद्वता को भी प्रमाणित करता है। होरी की जीवन शैली में उनका साधारण रहन सहन एवं कथन के अनुकूल आचरण यह सिद्ध करता है कि होरी मात्र साहित्यकार नहीं उनके व्यक्तित्व में महान व्यक्ति के गुण भी मौजूद है।
रिज़वान चंचल 


Share this article :

0 comments:

Speak up your mind

Tell us what you're thinking... !

संस्थापक:माणिक

संस्थापक:माणिक
अपनी माटी ई-पत्रिका

सम्पादक:जितेन्द्र यादव

सम्पादक:जितेन्द्र यादव
अपनी माटी ई-पत्रिका

एक ज़रूरी ब्लॉग

एक ज़रूरी ब्लॉग
बसेड़ा की डायरी:माणिक

यहाँ आपका स्वागत है



ज्यादा पढ़ी गई रचना

यहाँ क्लिक करके हमारी डाक नि:शुल्क पाएं

Donate Apni Maati

रचनाएं यहाँ खोजिएगा

हमारे पाठक साथी

सम्पादक मंडल

साहित्य-संस्कृति की त्रैमासिक ई-पत्रिका
'अपनी माटी'
========
प्रधान सम्पादक
सम्पादक
सह सम्पादक
तकनिकी प्रबंधक
========
संपर्क
apnimaati.com@gmail.com
========

ऑनलाइन

Donate Us

 
Template Design by Creating Website Published by Mas Template