अखबारी चर्चा:-चित्तौड़ में राजस्थानी की मान्यता को लेकर बयानबाजी - अपनी माटी Apni Maati

India's Leading Hindi E-Magazine भारत की प्रसिद्द साहित्यिक ई-पत्रिका ('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

नवीनतम रचना

शुक्रवार, जनवरी 28, 2011

अखबारी चर्चा:-चित्तौड़ में राजस्थानी की मान्यता को लेकर बयानबाजी

साहित्यकार बताते हैं कि राजस्थानी भाषा का 2500 वर्ष पुराना इतिहास है। इसमें लिखित लाखों हस्तलिखित ग्रंथ संग्रहालयों में सुरक्षित पड़े हुए हैं। आजादी से पूर्व संपूर्ण राजपूताना की रियासतों की राजभाषा राजस्थानी ही थी। भाषा विज्ञान के आधार पर राजस्थानी स्वतंत्र भाषा है। राजस्थानी लिपि मुडिय़ा से ही हमारी देवनागरी लिपि बनी है और गुजराती, पंजाबी की गुरुमुखी, मराठी, हिन्दी, नेपाल का इतिहास, मध्यकाल का इतिहास राजस्थानी लिपि मुडिय़ा में लिखा गया है। राजस्थानी की स्वतंत्र और समृद्ध व्याकरण है। शिकागो विश्वविद्यालय, अमेरिका के दक्षिण एशियाई भाषा विभाग में राजस्थानी व्याकरण चलती है। अमेरिका की लाइब्रेरी आफ कांग्रेस ने अपने सर्वेक्षण में विश्व की समृद्धतम 13 भाषाओं में से एक राजस्थानी को माना है। पद्मश्री सीताराम लालस का राजस्थानी भाषा का विशाल शब्दकोष है। जिसमें दो लाख 50 हजार शब्द है। राजस्थानी भाषा के मेवाड़ी, वागड़ी, मालवी, मारवाड़ी, ढूढाणी, हाड़ौती, मेवाती, ब्रज, भीली, खानाबदोषी बोलियां इसके अंग है।

सौजन्य:-

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

Responsive Ads Here