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रपट:-प्रोफेसर (डॉ.) निकोलस ग्रे उदयपुर में एक व्याख्यान के दौरान


राजस्थान के गांवों की अर्थव्यवस्था को सुधारने व वास्तविक विकास के लिये कृषि का विकास, जल संग्रहण तथा पानी का सदुपयोगय ही सही रास्ता है ये विचार मोहनसिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट तथा वेल्स फॉर इण्डिया द्वारा आयोजित सार्वजनिक व्याख्यान में प्रोफेसर (डॉ.) निकोलस ग्रे ने व्यक्त किये। 

डॉक्टर ग्रे ने बदलते भारत मे विकास एवं गरीबी विषय पर बोलते हुए कहा कि बढ़ते हुए शहरों के कारण प्रकृति प्रदत्त सम्पदाओं में कमी आई है तथा सुपरमार्केट से स्थानीय उत्पादों की कीमते गिरी है नही ऐसे मॉल्स मे विदेशी कृर्षि उत्पादों की खरीद से किसानों की हालत पर असर पड़ा है उन्होने कहा कि भारत के लिये यह अवसर होगा कि खेती पर ज्यादा तवज्जो दी जाय। 
विकास न्याय के साथ शान्ति का रास्ता विषयक उद्बोधन में प्रोफेसर (डॉ.) मेरी ग्रे ने युगांड़ा फिलिस्तीन, खांडा आदि देशों की अर्थव्यवस्था के उदाहरण देते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर आम जन को प्रभावित करने वाली आवश्कताओं और समस्याओं पर काम नही किया जायेगा तो न्यायपूर्ण  विकसित तथा शान्तिप्रिय समाज की कल्पना बेमानी है। उन्होने अपने विस्तृत उद्बोधन में जनता न पर्यावरण पर बोलते हुए जल की महत्ता के बारे में बताया साथ ही विकसित राष्ट्रो की नकल से सावधानी बरतने की सलाह दी। 

सभा की अध्यक्षता करते हुए पूर्व विदेश सचिव जगत मेहता ने कोटड़ा की हालात पर चर्चा की और जल संरक्षण के नाम पर किये जाने वाले  रस्मी कार्यो को दीर्घकालिक आवश्यकताओं के लिये नाकाफी बताया। सभा का प्रारम्भ ट्रस्ट के अध्यक्ष वियज मेहता के स्वागत उद्बोधन से हुआ जहां मेहमानों का डॉ. तेज राजदान, ओम प्रकाश शर्मा, नारायण आमेटा ने किया। अतिथियों का परिचय ट्रस्ट सचिव नंद किशोर शर्मा ने किया तथा धन्यवाद वेल्स फार इन्डिया के अध्यक्ष डॉ. विल्सन ने किया। सभा का संचालन डॉ. विनिता ने किया। 
स्त्रोत:-नंद किशोर शर्मा

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