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सौर ऊर्जा के बूते रातभर चमकेगा चित्तौड़ दुर्ग

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on गुरुवार, मार्च 10, 2011 | गुरुवार, मार्च 10, 2011



विश्वविख्यात दुर्ग पर कई प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल अब रात के अंधेरे में सौर ऊर्जा से संचालित होने वाली फ्लड स्ट्रीट लाइटों से चमकने लगा है। इसके साथ ही राज्य का यह पहला फोर्ट बन गया है, जहां पर अब बिना खर्चे के रात को भी स्मारक दूधिया रोशनी में जगमगा रहे हैं। दुर्ग पर स्थित स्ट्रीट लाइटें भी जल्द ही सौर ऊर्जा से रोशन होने जा रही हैं।

सौर ऊर्जा को ज्यादा से ज्यादा उपयोग में लेने की कवायद यहां स्थित विश्वप्रसिद्ध दुर्ग पर अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इसी प्रयास के बीच दो महीने पहले दुर्ग के कई प्रमुख स्मारकों को रात्रि में दूधिया रोशनी से चमकाने की योजना के तहत सौर ऊर्जा के उपयोग की तकनीक शुरू की गई थी। राजस्थान रिन्यूवल एनर्जी कारपोरेशन ने किले पर सौर ऊर्जा की तकनीक से प्रमुख इमारतों स्मारकों को रात में लाइटों के माध्यम से चमकाने का कार्य शुरू किया। केन्द्र राज्य सरकार से अनुबंध होने के बाद कंपनी के तकनीकी अधिकारी कर्मचारी इस योजना के तहत कार्य पूरा कर चुके हैं। इन दिनों अब सौर ऊर्जा के माध्यम से रात्रि को प्रमुख स्मारकों को फ्लड लाइटों के माध्यम से चमकाने का कार्य अंतिम चरण में है। पहले चरण में विक्ट्री टावर (विजय स्तंभ) के अलावा कुंभा महल की मुख्य दीवार तथा कीर्ति स्तंभ को रात में फ्लड लाइटों से चमकाने का कार्य हो चुका है। इसके लिए इन स्मारकों के पास सोलर फ्लड लाइटें लगा दी गई है।

विजय स्तंभ के सामने स्थित टिकट विंडो के ऊपर सौर ऊर्जा के लिए सोलर पावर प्लांट स्थापित कर दिया है। वहीं अब दुर्ग पर इमारतों के पास सड़क किनारे 25 स्ट्रीट लाइटें भी लगाई दी गई है, जो सौर ऊर्जा से ही चल रही है। साथ ही कालिका माता मंदिर, वायरलेस रूम के पास पार्किंग स्थल, पद्मिनी महल के गार्डन, व्यू पोइंट, तोपखाना, विजय स्तंभ के अंदर, कुंभामहल के गार्डन में भी इस तरह की लाइटें लगाई जा रही हैं। वहीं पुरातत्व विभाग के कार्यालय में भी ये लाइटें लगने के बाद चालू हो गई है। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सौर ऊर्जा तकनीक से फ्लड स्ट्रीट लाइटे चलने से बड़ी मात्रा में बिजली की बचत होगी। वहीं बिजली का बिल भी जमा नहीं कराना पड़ेगा।

अकेले पुरातत्व विभाग कार्यालय में प्रतिमाह आने वाले चार से पांच हजार रुपए के बिल की बचत भी होने लगी है। मशीनों के रखरखाव में खर्चा भी कम आएगा। सौर ऊर्जा से फ्लड लाइटों को चलाने के लिए फिलहाल पांच साल के लिए कंपनी से अनुबंध किया गया है। चित्तौडग़ढ़ दुर्ग राज्य का पहला दुर्ग बन गया है, जहां पर सौर ऊर्जा की तकनीक से रात को बिना बिजली की खपत तथा खर्चे के बिना प्रमुख स्मारक चमक रहे हैं।

साभार:-भास्कर न्यूज,चित्तौडग़ढ़
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