वसुधा के सम्पादक और प्रलेस के राष्ट्रीय महासचिव कमला बाबू नहीं रहे - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

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वसुधा के सम्पादक और प्रलेस के राष्ट्रीय महासचिव कमला बाबू नहीं रहे

हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार और आलोचक कमला प्रसाद का शुक्रवार 25 मई की सुबह नई दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया । कैंसर से पीड़ित प्रसाद का लम्बे समय से इलाज चल रहा था. वह मध्यप्रदेश से प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका वसुधा के सम्पादक और प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय महासचिव थे । उन्हें हाल ही में प्रमोद वर्मा स्मृति आलोचना सम्मान देने की घोषणा की गई थी जो उन्हें आगामी 14-15 मई को भिलाई के एक विशेष आयोजन में प्रदान किया जाना था । मध्य प्रदेश के सतना जिले के गांव धौरहरा में 1938 में जन्मे प्रसाद की प्रमुख कृतियां साहित्य शास्त्र, आधुनिक हिन्दी कविता और आलोचना की द्वन्द्वात्मकता, रचना की कर्मशाला, नवजागरण के अग्रदूत भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हैं ।

आज एक शोक सभा में प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान, छग राष्ट्र भाषा प्रचार समिति, साहित्य अकादमी चिंदम्बरा, पाण्डुलिपि, सद्-भावना दर्पण, साहित्य वैभव, सृजन-सम्मान, सृजनगाथा डॉट कॉम, गुरु घासी दास साहित्य अकादमी, छग साहित्य अकादमी, नारी का संबल, राष्ट्रीय न्यूज सर्विस, टापर्स एजूकेशन सोसायटी, अष्टांक साफ्टवेयर ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है ।
प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष श्री विश्वरंजन ने श्री कमला प्रसाद के निधन को एक योग्य पीढ़ी निर्माता साहित्य गुरु और आलोचक का अवसान बताते हुए कहा है कि उन्होंने प्रगतिशील वसुधा के माध्यम से विचारणीय साहित्य की ओर नये लेखकों को मोड़ने में उल्लेखनीय भूमिका निभायी है । साहित्य अकादमी दिल्ली के सदस्य और सद्-भावना दर्पण के संपादक गिरीश पंकज ने कहा कि वे एक कुशल और प्रतिभासंपन्न संपादक थे । उन्होंने मानवीय गरिमा के लिए सदैव संघर्ष और कड़ी मेहनत से हिन्दी पट्टी का मार्गदर्शन किया है । भाषाविद् डॉ. चित्त रंजन कर ने श्री प्रसाद को एक गंभीर अध्येता और हिन्दी का अकादमिक विद्वान शिक्षक बताते हुए कहा है कि उन्होंने ताउम्र एक गंभीर और चिंतनशील शिक्षक की भूमिका निभायी है । आलोचक डॉ. प्रभात त्रिपाठी ने उनके निधन को प्रगतिशील आलोचना और मागर्शन का अर्धविराम निरूपित किया है । सृजनगाथा के संपादक और पाण्डुलिपि जयप्रकाश ने उनके शांत-श्लिष्ट व्यक्तित्व की चर्चा करते हुए उन्हें एक दृष्टिवान विचारक बताया है । इसके अलावा डॉ. सुशील त्रिवेदी, अनिल विभाकर, डॉ. बलदेव, डॉ. बिहारी लाल साहू, डॉ. सुधीर शर्मा, राम पटवा, रमेश अनुपम, अशोक सिंघई, रवि श्रीवास्तव, मुमताज, नासिर अहमद सिंकदर, बी. एल. पाल, कमलेश्वर साहू, सुरेश पंडा, चेतन भारती, वारीन्द्र वर्मा, डॉ. कल्याणी वर्मा, सुरेंद्र वर्मा, राजेश सोंथलिया, शंभूलाल शर्मा वसंत, तपेश जैन, जी. एस. अलहूवालिया, सुरेश तिवारी, शकुंतला तरार, पंकज ताम्रकार, पंकज ताम्रकार, दिनेश माली, आदि राज्य के संस्कृतिकर्मियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है
सृजनगाथा पत्रिका से साभार

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