अश्वनी शर्मा की एक ज़रूरी ग़ज़ल - अपनी माटी Apni Maati

India's Leading Hindi E-Magazine भारत की प्रसिद्द साहित्यिक ई-पत्रिका ('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

नवीनतम रचना

आगामी अंक


अश्वनी शर्मा की एक ज़रूरी ग़ज़ल


अश्वनी शर्मा  
राजस्थान प्रशासनिक सेवा अधिकारी 
11/177,भृगु पथ 
मानसरोवर,जयपुर 
सूर्य प्रकाशन मंदिर,
बीकानेर से 1999 में 
प्रकाशित कृति-
 ग़ज़ल संग्रह,'अँधेरे की चीख'
--------------------------------
                     

वो कहते है जीवन का आधार नहीं है
मैं कहता हूँ कोई सलीकेदार नहीं है
 
जो सिक्कों में बदल नहीं पाया वजूद को 
ये निश्चित है बंदा दुनियादार नहीं है
 
रिश्ते नाते,कसमे वादे,देव पुजारी 
क्या बाकी है जिस का कि व्यापार नहीं है
 
जो सपनों कि ताक़त पर जीना चाहे है
क्या पायेगा सपनों का आकार नहीं है
 
सत्यानाशी के जंगल को क्या कोसेंगे 
पेड़ कौन सा है जो कांटेदार नहीं है
 
अगर मुहब्बत ही जीने कि शर्त्त बने तो 
बहुतेरों को जीने का अधिकार नहीं है
 
खुली किताबों जैसे जब जी चाहे पढ़ लो 
मंजे हुए किरदारों जैसे यार नहीं है  

1 टिप्पणी:

  1. अगर मुहब्बत ही जीने की शर्त्त बने तो
    बहुतेरों को जीने का अधिकार नहीं है.....वाह अश्वनी जी....ये आपका अपना... अलग अंदाज़.....बहुत ख़ूब..

    जवाब देंहटाएं

ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

Responsive Ads Here