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कवि राम अकेला की एक रचना

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on मंगलवार, मार्च 22, 2011 | मंगलवार, मार्च 22, 2011

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2 टिप्‍पणियां:

  1. सिरस्टी रो सार
    आप जैड़ा कलमाकर
    लिखै तौ चालै दुधार
    राजस्थान री नारी है बिन आधार
    दो दो भासावां रो दुविधा कोझो व्यौपार
    छिन लियो सारो आतमविसवास डूबै छै मंझधार
    दे दो पाछी उणरी भाषा पछै देखो थै राजस्थान रो नुवो अवतार !

    उत्तर देंहटाएं
  2. bahut hi sundar kavita hai apki bahut bahut bhadii apko
    asha karta hu app mere blog pe bhi time nikal ke ayege

    उत्तर देंहटाएं

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