रपट:-जल नीति पर विद्याभवन,उदयपुर में सेमिनार - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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रपट:-जल नीति पर विद्याभवन,उदयपुर में सेमिनार

उदयपुर (22 मार्च)।

समग्र जल संसाधन प्रबंधन की अवधारणा के अनुरूप राज्य में जल का संरक्षण करने एवं जल स्वावलम्बी समाज बनाने, राज्य के प्रत्येक व्यक्ति की समुचित सामाजिक-आर्थिक प्रगति सुनिश्चित करने एवं जलनीति के अनुरूप राज्य का विकास करने के लिए सरकार, विशेषज्ञ एवं संस्थाऐं मिलकर कार्य करेंगे। राज्य जल नीति को प्रभावी क्रियान्वयन प्रत्येक स्टेकहोल्टर की सक्रिय व गतिशील सहभागिता से ही संभव है। राज्य जल अभिकरण व्यापक सहभागिता पर आधारित होना चाहिए। यह विचार मंगलवार, विश्व जल दिवस पर आयोजित सेमीनार में उभरे। सेमीनार का आयोजन इण्डिया वाटर पार्टनरशिप के सहयोग से झील संरक्षण समिति, विद्याभवन पॉलिटेक्निक तथा डा. मोहनसिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा किया गया।

सेमीनार की अध्यक्षता करते हुए पूर्व विदेश सचिव जगत मेहता ने कहा कि दूरगामी दृष्टिकोण तथा लोकतान्त्रिक, सहभागी, पारदर्शी प्रबंधन व्यवस्था से ही झीलों, तालाबों, नदियों तथा भूजल स्त्रोतों का संरक्षण सम्भव है। सीटीएई के डीन जल विज्ञानी प्रो. आर.सी. पुरोहित ने जल नीति को अहम् दस्तावेज बताते हुए आहवान किया कि हर व्यक्ति जल प्रहरी बन जल संरक्षण में सहभागिता निभाए।जलदाय विभाग के अधिशाषी अभियन्ता मकबूल खान पठान ने कहा कि पुरानी टूटी-फूटी जल वितरण लाइनों को जलनीति की भावना के अनुरूप बदला जाएगा तथा लीकेज क्षति को न्यूनतम किया जाएगा। सिंचाई विभाग के अभियन्ता बलराम खतूरिया तथा सुनील मेहता ने कहा कि पंचायत स्तर पर जन प्रतिनिधियों को जलनीति के प्रावधानों से अवगत कराने एवं उन्हें जल प्रबंधन से जोड़ने पर राज्य सरकार निरन्तर कार्यक्रम कर रही है। 

भूजल विशेषज्ञ डा. पी. के सिंह ने कहा कि विगत बरसात में लबालब हुए कई कुंओं में जलस्तर भारी रूप में गिर चुका है। यह दर्शाता हैं कि भूजल प्रबंधन एवं एक्विफर रिचार्ज पर जलनीति के अनुरूप शीघ्र कदम उठाने होंगे। जल संसाधन विभाग के पूर्व अधीक्षण अभियन्ता जी.पी.सोनी ने कहा कि जलनीति को लागू करने के लिए साझा भाव से कार्य करने की जरूरत है। 

पॉलिटेक्निक के प्राचार्य एवं आयोजन सचिव अनिल मेहता ने समग्र जल संसाधन प्रबंधन ( आई.डब्ल्यू.आर.एम. ) के विभिन्न आयामों का विस्तृत विवेचन करते हुए बताया कि आई.डब्ल्यू.आर.एम. पर क्षमता संवर्धन के लिए अगस्त माह तक विभिन्न कार्यशालाऐं होगी। जिनमें पंचायत राज प्रतिनिधियों, किसानों, अभियंताओं, राजनीतिज्ञों तथा प्रशासनिक अधिकारियो का जल प्रबंधन पर प्रशिक्षण एवं क्षमता संवर्धन किया जाएगा। डा. मोहनसिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट के सचिव नन्दकिशोर शर्मा ने समग्र जल संसाधन प्रबंधक में समाज विज्ञानियों एवं स्वैच्छिक संस्थाओं की भूमिका को रेखांकित किया। जन सहभागिता का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए झील संरक्षण समिति के डा. तेज राजदान ने आयड़ नदी सुधार योजना पर फिल्म प्रदर्शन किया। 

कृषि विज्ञान केन्द्र के ए.एस.जोधा ने वैज्ञानिक खेती एवं बागवानी, भूजल विभाग के पूर्व निदेशक ओ.पी.माथुर ने प्रभावी जल नियामक आयोग बनाने, अलर्ट संस्थान के जितेन्द्र मेहता तथा वन, अधिकारी डा. सतीश शर्मा ने जैव विविधता एवं जल के मध्य संबंध, चांदपोल नागरिक समिति के तेजशंकर पालीवाल तथा ज्वाला जनजागृति संस्थान के भंवरसिंह राजावत ने झीलों, तालाबों में प्रदूषण तथा डा. नैन्सी राजदान ने जल प्रबंधन में महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला।

नंद किशोर शर्मा 
सचिव
आयोजक संस्थान                              

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