तीसरा प्रमोद वर्मा आलोचना सम्मान कमला प्रसाद जी के लिए घोषित - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

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तीसरा प्रमोद वर्मा आलोचना सम्मान कमला प्रसाद जी के लिए घोषित

रायपुर । 

प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था ‘प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान’ द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर आलोचना के लिए दिया जानेवाला महत्वपूर्ण सम्मान जाने-माने आलोचक डॉ. कमला प्रसाद, भोपाल को दिये जाने का निर्णय लिया गया है । आज रायपुर में इसकी घोषणा की गई । चयन समिति में केदार नाथ सिंह, दिल्ली, श्री गंगाप्रसाद विमल, दिल्ली, डॉ. धनंजय वर्मा, भोपाल, श्री विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, गोरखपुर व संस्थान के चैयरमैन विश्वरंजन और संयोजक  जयप्रकाश मानस थे । यह सम्मान उन्हें आगामी 14-15 मई को भिलाई में फ़ैज़ अहमद फ़ैज और केदारनाथ अग्रवाल पर होनेवाले राष्ट्रीय विमर्श के अवसर पर प्रदान किया जायेगा । ज्ञातव्य हो कि वरिष्ठ वर्ग में यह सम्मान अब तक श्रीभगवान सिंह, भागलपुर और श्री मधुरेश, बरेली तथा युवा वर्ग में यह सम्मान श्री कृष्णमोहन, वाराणासी तथा ज्योतिष जोशी, दिल्ली को प्राप्त हो चुका है । इस सम्मान के तहत 21 हज़ार की नगद राशि, प्रतीक चिन्ह, शाल, श्रीफल तथा प्रमोद वर्मा समग्र भेंट किया जाता है ।   


14/02/1938, सतना (म.प्र.) में जन्मे श्री कमला प्रसाद एम.ए., पीएच. डी.व सागर विश्वविद्यालय से डी. लिट हैं । उनकी अन्य प्रकाशित कृतियाँ हैं - साक्षात्‍कार- वार्तालाप, बच्चों की पुस्तक- जंगल बाबा, विनिबंध-यशपाल, अवधेश प्रताप सिंह । उन्हें इसके पूर्व म. प्र. सा‍हित्य अकादमी का नंददुलारे वाजपेयी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है । वे वर्तमान में  एल-31, निर्मला नगर, मौसम कॉलोनी के पास भदभदा रोड, भोपाल, म. प्र. में रहकर सृजनरत हैं । उनका टेलीफोन है :91-755-2772249, 91-9425013789 और ईमेल  है : vasudha.hindi@gmail.com

अनुशंसा

प्रमोद वर्मा आलोचना सम्मान की चयन समिति द्वारा सर्वसम्मति ने निर्णय लिया गया कि इस वर्ष का आलोचना सम्मान (वरिष्ठ)डॉ. कमला प्रसाद को दिया जाये -   

डॉ. कमला प्रसाद आधुनिक हिन्दी की प्रगतिशील परंपरा के महत्वपूर्ण और सुप्रसिद्ध आलोचक हैं। जिनकी साहित्यिक उपस्थिति पूरे हिंदी क्षेत्र में जानी-पहचानी जाती है । श्री कमला प्रसाद ने आलोचना के अलावा साहित्य के जिन तीन प्रमुख क्षेत्रों – अकादमिक दक्षता, संपादन और संगठनात्मक कौशल में जिस तरह अपना योगदान दिया है वह विशेष रूप उल्लेखनीय और उनके व्यक्तित्व का असाधारण पहलू है ।   
साहित्य-शास्त्र, छायावाद-प्रकृति और प्रयोग, छायावादोत्तर काव्य की सामाजिक सांस्कृतिक पृष्ठभूमि, दरअसल, साहित्य और विचारधारा, रचना और आलोचना की द्वंद्वात्मकता, आधुनिक हिंदी कविता और आलोचना की द्वंद्वात्‍मकता, समकालीन हिंदी निबंध, मध्ययुगीन रचना और मूल्य, कविता तीरे, आलोचक और आलोचना जैसी कृतियों से उनकी प्रतिबद्ध दृष्टि और मानवीय मूल्यों के प्रति निष्टा, गहरी निर्णय क्षमता व व्यापकता चरितार्थ होती है ।

 उन्होंने अवधेश प्रताप विश्वविद्यालय, रीवां में पहले प्राध्यापकय और तत्पश्चात अध्यक्ष के रूप बहुमूल्य अकादमिक भूमिका का निर्वाह कर नयी पीढ़ी का सशक्त मार्गदर्शन किया है ।
 उनके कुशल संयोजन एवं संपादन में निकलने वाली पत्रिका वसुधा भारतीय मनीषा के लिए एक ज़रूरी पत्रिका के रूप में सिद्ध हुई है । इन सारे और बहुकोणीय क्षेत्रों में सतत् संलग्न रहने के अलावा रचनात्मक लेखन कार्यों में भी वे निरंतर सक्रिय हैं ।

 चयन समिति ने सर्वसम्मति निर्णय लिया गया हैं कि प्रमोद वर्मा संस्थान द्वारा स्थापित अखिल भारतीय स्तर का तीसरा और वर्ष 2010-2011 का ‘प्रमोद वर्मा स्मृति आलोचना सम्मान’ ख्यात आलोचक डॉ. कमला प्रसाद, भोपाल को प्रदान किया जाये ।

निर्णायक मंडल-
सर्वश्री केदार नाथ सिंह, श्री गंगाप्रसाद विमल, डॉ. धनंजय वर्मा, विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, विश्वरंजन
संयोजक –
जयप्रकाश मानस

जयप्रकाश मानस
संपादक, www.srijangatha.com
कार्यकारी संपादक, पांडुलिपि (त्रैमासिक)

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