किरण राजपुरोहित 'नितिला' की सध्य लिखित रचनाएं - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

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किरण राजपुरोहित 'नितिला' की सध्य लिखित रचनाएं



किरण राजपुरोहित 'नितिला' 
(सृजनधर्मी रचनाकार हिंदी और राजस्थानी में 
समान अधिकार के साथ बरसों से लेखनरत )
 ,












.
....हिंडोळा , ऐ आळी













चाँदणी पकड़ आगळी 
चाँद  री 
नर्तन करै 
आंगणे
सांवळी चदरिया
लुक गी कठेइ
ओळा में,
आंख्यां टमकावती 
रात बैठी
चुपचाप
बातां करे ज्यां 
आपूंआप,
रुनझुण म्हारी पायल 
ओरुं चंचल हूंगी ,
झिलमिल 
तारां आळी ओढणी 
अर उणारी निजरां
रा प्रेम हिंडोळा 
आळी ! कियां न झूलू म्हें ?
लागो थे...











दुनिया री भीड़ में एकली होइ 
साथी लाग्या मनै थे
काळी रातां में
चंदा सा होया म्हारे माय
तीखो तड़के तावड़ा में
छियां बणया म्हारे थै
सावण री तपत में
झिरमिर बरस्या हिया में
गीत लिखियो जद  लेखणी 
हर आखर गीत थारां
मिजराब सूं सितार छिड़यो
सैं रागां में सुर थांरो
देख्यो अंतस रे गोखे सूं 
म्हारे माय थे इ थे...
परेम री बानगी












चानणी रात 
में जगमगावै
प्रीत रा तारा
अर बरसे 
रंग रंग न्यारा,
धवळी रात 
सोवै नुवां रंग 
जागे रस राग 
चांद ली सोगंध
बरसूं टपा टप
जागूं देह देह
खिलूं हिया माय
रच द्यूं उगुणां में
इक रेख 
कायम रैवे 
जुगां तांई 
परेम री  बानगी! ...
(छायाचित्र भी किरण जी हाथों के ही लिए हुए हैं.)

2 टिप्‍पणियां:

  1. Kiran ji aap ri sari rachnava...ati sundar.ar hiye basne vali lagi.ap ro lekhn gazab ro he...! aap re lekhan ne mara ghana maan salam he...!
    sa-samman
    Dr. Ram 'Akela'

    उत्तर देंहटाएं
  2. jabar likhi hon ...bohoot hi jordaar ..basss inya samajh lyo ke sabad hi koini tareef saru...bhoot jordaar...

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