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‘विहंग’ (संचयन- हिन्दी कविता में चिड़िया) हेतु सहयोग चाहिए

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on शुक्रवार, मार्च 11, 2011 | शुक्रवार, मार्च 11, 2011

चिड़िया हिंदी कविता में यत्र-तत्र-सर्वत्र है । चिड़ियों के बग़ैर हिंदी कविता की कल्पना नहीं की जा सकती है । ‘विहंग’ नाम से कविता संचयन की परियोजना मेरे द्वारा व्यक्तिगत स्तर पर संपादित की जा रही है ताकि हिन्दी कविता में पक्षी की उपस्थिति और उड़ान का अध्ययन एक साथ हो सके । एक साथ चिड़िया से जुड़ी कविताओं का आस्वाद पाया जा सके  

अब तक इस संचयन में 20 वीं सदी की हिंदी कविता में पक्षी की उपस्थिति का लगभग समादरण किया जा चुका है। इस पाण्डुलिपि के 6 खंडों में अबत 70 उन कवियों की कविताओं का चयन किया जा चुका है । मैं आभारी हूँ कि इस महती कार्य में आदरणीय कांति कुमार जैन, रमेश दत्त दुबे, डॉ. बलदेव जी का अहैतुक सहयोग मिला है । अब तक संग्रहित खंडवार कवियों की जानकारी निम्नानुसार है – 

  • प्रथम खंड- 
लोचन प्रसाद पांडेय, मुकुटधर पांडेय, मैथिलीशरण गुप्त, बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ माखनलाल चतुर्वेदी।
  • द्वितीय खंड - 
जयशंकर प्रसाद, निराला, पंत, महादेवी, बच्चन, रामधारी सिंह दिनकर, विद्यानिवास मिश्र । 
  • तृतीय खंड - 
अज्ञेय, मुक्तिबोध, वीरेंद्र कुमार जैन, भवानी प्रसाद मिश्र, नागार्जुन, त्रिलोचन, विजय देव नारायण साही, धर्मवीर भारती, नरेश मेहता, कुँवर नारायण । 
  • चतुर्थ खंड - 
रघुवीर सहाय, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, श्रीकांत वर्मा, केदारनाथ सिंह, अशोक वाजपेयी, विनोद कुमार शुक्ल, प्रयाग शुक्ल, कमलेश, रमेशचंद शाह, विष्णु खरे, डॉ. देवराज, अजीत कुमार, दुष्यंत कुमार, प्रमोद वर्मा, प्रभात त्रिपाठी, ज्योत्सना मिलन, शिवकुमार मिश्र, रमेश दत्त दुबे । 

  • पंचम खंड - 
गिरधर राठी, ब्रदीनारायण, ज्ञानेंद्र पति, गोरख पांडे, गोविंद द्विवेदी । 
  • षष्ठम् खंड – 
शरद बिल्लौरे, ध्रुव शुक्ल, राधेलाल विजधावने, एकांत श्रीवास्तव, शहशाह आलम, शत्रुघ्न चौधरी, पवन करण, रामकुमार तिवारी, अपूर्वानंद, दिनेश अत्रि, मुनि श्री क्षमा सागर । 
  • सप्तम् खंड के प्रस्तावित कवि – 
शरद बिल्लौरे, मंगलेश डबराल, विष्णु नागर, लीलाधर मंडलोई, वेणु गोपाल, निरंजन श्रोत्रिय, डॉ. सुधीर सक्सेना, विश्वरंजन, हेमंत शेष, रामकुमार कुम्भज, कुमार विकल, आलोक धन्वा, दिविक रमेश, गोविंद माथुर, दिनेश कुमार शुक्ल, विमल कुमार, कृष्ण मोहन झा, रति सक्सेना, अष्टभुजा शुक्ल, बोधिसत्व, नीलेश रघुवंशी, पुष्पिता, शरद कोकाश, विमलेश त्रिपाठी, अनवर सुहैल, सुरेश सेन निशांत, मनोज झा, उमा शंकर चौधरी, वजीद खान, अग्निशेखर, ओम भारती, मोहन सगोरिया, किरण अग्रवाल, रंजना जायसवाल, पूनम सिंह, रंजना श्रीवास्तव, परमेश्वर वैष्णव, शरद कोकाश, नासिर अहमद, कमलेश्वर साहू, रजत कृष्ण, निर्मल आनंद, माझी अंनत, पथिक तारक, विजय राठौर, बी. एल. पाल, विजय सिंह, भास्कर चौधरी, सूरज राठौर, अरुण शीतांश, कुमार सुरेश, अरुण देव, बसंत त्रिपाठी, आर. चेतन क्रांति हरेप्रकाश उपाध्याय, कुमार विश्ववंधु, आदि उन महत्वपूर्ण और चर्चित कवियों की कविताओं का चयन करना चाहते हैं जिनकी कविताओं में पक्षी मौज़ूद हो । 

प्रकाशन- इस महत्वाकांक्षी संचयन का प्रकाशन मई के प्रथम सप्ताह में बोधि प्रकाशन (श्री मायामृग), जयपुर द्वारा हो रहा है । 

आपसे अपेक्षा – 
1. सप्तम खंड में 21 वीं सदी के समकालीन कवियों की उन कविताओं को मैं यहाँ जोड़ना चाहता हूँ जहाँ प्रभाती गाती विहंग हो, डाल पर बैठे चिरैय्या की चहचहाहट हो, अनंत आकाश में विचरण करने वाली चिड़ियों की उड़ान हों, लहुलूहान डैनों की दर्द हो । इस रूप में विहंग के सारे पर्यायवाची शब्दों से बुनी गई कवितायें, चाहे वे किसी ख़ास पंथ, विचारधारा, विष्य पर रची गई हों, की मुझे आवश्यकता है । आप मेरी प्रस्तावित सूची के बाहर के उन कवियों की कविताओं को भी उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं जिन्हें यहाँ लिया जाना ज़रूरी हो । 
2. आप बीसवीं सदी के उन कवियों और उनकी कविताओं के चयन में भी मदद कर सकते हैं जिन्हें 1-6 खंड में अवश्य रखा जाना चाहिए । 
3. आप हमें ऐसे कवियों की 1-1 कविता 20 मार्च के पूर्व मुझे कुछ समय देकर उपलब्ध कराके सहयोग कर सकते 
जयप्रकाश मानस
एफ-3, छगमाशिम, 
आवासीय परिसर, पेंशनवा़ड़ा रायपुर, 
छत्तीसगढ़-492001 
मो. - 94241-82664 
ई-मेल- srijangatha@gmail.com
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2 टिप्‍पणियां:

  1. सर
    एक कविता भेजी है पसन्द आये तो स्थान दीजियेगा…………हार्दिक आभार्।

    उत्तर देंहटाएं
  2. namaskar
    vihang ke bare me aaj abhi padha. chidiya par likhi apni kavita #BASERA# preshit hai. aasha hai pasand aayegi. yadi sambhav ho patrika ke liye sweekar kare. Aabhar.

    उत्तर देंहटाएं

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