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'सिद्धान्तों के बिना सु-सभ्य समाज की कल्पना बे-मानी है ':-स्वतंत्रता सैनानी हुकमराज मेहता

उदयपुर, 4 मार्च ।

हुकमराज मेहता जी 
सत्य अहिंसा और अपरिग्रह के पवित्र सिद्धान्तों को अपनाएं बिना सु-सभ्य समाज की कल्पना बे-मानी है । भारतीय नागरिक और समाज में बढ़ती लालची वृति को रोके बिना ईमानदारी, जवाबदेही और जिम्मेदारी की आस लगाना कोष भ्रम है । उक्त विचार स्वतंत्रता सैनानी हुकमराज मेहता ने डॉ0 मोहनसिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा आयोजित ‘‘ आम नागरिक और सभ्य समाज ‘‘ विषयक संवाद में व्यक्त किए । मेहता ने कहा कि सभ्य समाज के पुर्ननिर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।जवाहर लाल नेहरू वि.वि. दिल्ली के पूर्व कुलपति प्रो0 शफी अगवानी ने कहा कि भूमण्डलीकरण से बेलगाम धन की प्रचुरता ने कानूनी शाषण एवं कानून के भय से व्यक्ति मुक्त हो रहा है । समाज में हावी हो रही लालची वृति को रोकना तथा शाषण को प्रभावी बनाना जरूरी है । सषक्त समाज सरकार का दर्पण होता है ।
वरिष्ठ वास्तुकार बी0एल0 मंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार मुक्त सरकार और नागरिक समाज के लिए प्रभावी गवर्नेन्स का होना जरूरी है ।वरिष्ठ चिन्तक रवि भण्ड़ारी ने कहा कि भारतीय समाज का बने रहना यह दर्शाता है कि सामाजिक नागरिक मूल्यों का भारतीय समाज में गहरी पैठ है ।

प्रतिभागी मनीषी 
संवाद में सजीव सेवा समिति के शांती लाल भण्डारी, तेजशंकर पालीवाल, प्रकाश  तिवाड़ी, हाजी सरदार मोहम्मद, भंवरसिंह राजावत, बसन्तीलाल कूकड़ा, सोहनलाल तम्बोली, विजय मेहता, सुषील दशोरा एवं कन्हैयालाल बापना ने भी विचार व्यक्त किए ।संवाद का संयोजन करते हुए ट्रस्ट सचिव नन्द किशोर शर्मा ने कहा कि मूल्य आधारित नागरिक दायित्वों के निर्वहन के बिना सुसंस्कृत समाज का निर्माण कठिन है । धन्यवाद नितेश सिंह ने ज्ञापित किया 

नन्द किशोर शर्मा

सचिव 
मोहन सिंह मेहता मेमोरियल संस्थान 

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