मोहन थानवी की कुछ कवितायेँ - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

नवीनतम रचना

मोहन थानवी की कुछ कवितायेँ

मोहन थानवी
साहित्यिक अभिरुचि
 संपन्न पत्रकार,

वर्तमान में हिंदी दैनिक
 के उप-सम्पादक
mohanthanvi@gmail.com
पहली:-सारंगी रोये तबला पोंछे आंसू


सारंगी रोये तबला पोंछे आंसू
 सरगम का परिवार विकल है
 वाद्य खो रहे पहचान
 ढीले-नीचे सुर छू रहे आसमान
 स्वर खिंच रहे कसे तारों से
 सारंगी रोये तबला पोंछे आंसू
 राग ढूंढ़ रहे रागिनियां
 इकतारा छिप गया
 वीणा वादन करती
 हारमोनियम सांसें भर रहा
 सुरों की दुनिया की लय-ताल
 बेसुरों ने कर दी बेहाल
 ढोल-मंजीरे, खड़ग-ताल चीख रहे
 हिन्दुस्तानी राग विदेशी दुल्हनिया से बहल रहे
 तबले पर थाप नहीं संयमित
 गीत-संगीत वही है कलाकार भ्रमित
 सरगम का परिवार बिखर रहा
 वाद्य खो रहे पहचान

दूसरी:-मां कहती है...


मां कहती है...
बेटी हौसला रखना
अपना -
- पराया
भरोसा न करना
वरना
अपने लूट ले जाएंगे
मेरा तुम्हारा -
- पराये
घर जाने का सपना
बेटी
सुनना सबकी
भगवान बनकर
भगवान की तरह
करना अपने मनकी
...2...
पिता ऐसा ही कहते हैं...
बढ़ता अनाचार रिश्तों को डुबो रहा
आंख का पानी सूखा इशारे बेमानी हुए
जमाना पैसे की गुड़िया का दास बना
कलपुर्जों की भीड़ में इनसान कहां होंगे
आदमी को ढूंढ़ता रोबोट पृथ्वी पर आएगा
युग बीते कितने इतिहास में नहीं दर्ज हुए
पुराण कथाओं के किस्से... पिता कहते हैं
बीत रहा युग नया जमाना आएगा
खेलने की उम्र में अपने ही बच्चों को खेलाएंगे
पिता ऐसा ही कहते हैं हर बार लगता रहा
हैरानगी बढ़ी जानकर समाज सोता रहा
पता चला मानव अपना ही गुर्दा बेच रहा
रिश्ते रिसते रहे जीवन एकाकी बनता रहा
शाख से शाख न निकली पेड़ ठूंठ बन गया
फूलों का मकरंद कहां भंवरा ढूंढ़ता रहा.

तीसरी:-सूरज जब हँसता है

लगता है
फिर कोई बादल बरसने को है
रहमत का फ़रिश्ता आने को है
जो निजात दिलाएगा
चाँद के टेढ़ेपन से
निजवाद और
आतंकवाद से
फिर ज़रूर कोई चिडया
चहकेगी
मेरे आँगन मे
जो सूरज के कुपित होने पर
सूना हो गया था....

चौथी और अंतिम:-फलसफा


सागर मंथन से मिला जरा-सा
सूरज-सा चमकता कौस्तुभ जीवन
व्योम-सा पसरा
कोटर मे श्वास लेता जीवन
सूर्य-चन्द्र-रश्मियों से घिरा 
अँधेरे कोटर मे जीवन
सागर-सा गहरा
बादल-सा जीवन
वंशवृक्ष पर बसा जरा
नागों के बीच जीवन
बबूल-सा कडुवाहट भरा
परजीवी लता-सा जीवन
प्रकाश समाये अपने मे सारा
दीपक तले  अँधेरे मे पसरा जीवन

2 टिप्‍पणियां:

  1. aapki charon kavitayen bahut hee kamal hai maa kahtee haito wakai kamal hai charon hardysprshee kavitaon ke liye meree bdhai sweekaren Mohan ji

    उत्तर देंहटाएं

ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

Responsive Ads Here