डॉ0 महेन्द्र प्रताप पाण्डेय का गीत 'मां' - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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डॉ0 महेन्द्र प्रताप पाण्डेय का गीत 'मां'

 मॉ 
मॉ तुम कितनी भोली हो, मॉ तुम कितनी भोली हो।
तुम ही मेरी पूजा अर्चन, तुम ललाट की रोली हो।। 


मॉ तुम ...........
तुम्ही धरा सी धारण करके, मुझको हरदम ही है पाला,
भूख सहा है हरदम तुमने, पर मुझको है दिया नेवाला,
नही कदम जब मेरे चलते, ऊंगली पकड़ संग हो ली हो।। 


मॉ तुम .............
धीरे - धीरे स्नेह से तेरे, मैने चलना थोड़ा सीखा,
पर आहट जब मिली कहीं कि, लाल हमारा थोड़ा चीखा,
दौड़ पड़ी नंगे पद हे मॉ, करूण स्वरों में तुम बोली हो।। 


मॉ तुम ..............
बिना तुम्हारे सारा जीवन, लगता माते है यह रीता,
जब तक है आशीष तुम्हारा, तब तक मै हूॅ जग को जीता,
तुम तो हो ममता की मूरत, सुखद स्नेह की झोली हो।। 


मॉ तुम .............
अगर तुम्हारे ऊपर अपना, सारा जीवन अर्पित कर दूॅ,
नही मिटेगा कर्ज तुम्हारा, चाहे सभी समर्पित कर दूॅ,
भले कुपुत्र हुआ मै बालक, कभी नही तुम डोली हो।। 
मॉ तुम .................

डॉ0 महेन्द्र प्रताप पाण्डेय ‘‘नन्द’’ 
राजकीय इण्टर कॉलेज 

द्वाराहाट अल्मोड़ा

 दूरभाष - 09410161626 

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