महिला आयोग की अध्यक्षा डॉ. गिरिजा व्यास ने जाते-जाते कहा - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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महिला आयोग की अध्यक्षा डॉ. गिरिजा व्यास ने जाते-जाते कहा

छह साल के कार्यकाल में राष्ट्रीय महिला आयोग ने 37 विधेयक बनाए, इसमें सात विधेयक पास हुए। 24 विधेयक अभी विचाराधीन हैं। वे इस बात से खुश है कि महिला आयोग की पहचान गांव-गांव में हो गई। परंपरा और रिवाज के नाम पर किए गए अपराध को रोकने के लिए एक नया कानून जल्द आएगा। 

यह बात राष्ट्रीय महिला आयोग की निवर्तमान चेयरपर्सन व सांसद डा. गिरिजा व्यास ने बातचीत में कही। राष्ट्रीय महिला आयोग का कार्यकाल पूरा होने के बाद गुरुवार को यहां आई डा. व्यास ने कहा कि वे अपने कार्यकाल में किए गए कार्यों से संतुष्ठ हैं। महिलाएं आयोग के बारे में जानने लग गई। उन्हें प्रशासनिक, सरकार, संगठन, महिलाओं के साथ प्रधानमंत्री, यूपीए चेयरपर्सन का उनके कार्य में पूरा सहयोग मिला। इस बात का दुख है कि राजस्थान में लिंगानुपात घटा है। पांच साल पहले ही जब उन्हें इस बात की जानकारी मिली तो उन्होंने सबसे पहले पीएनडीटी एक्ट को रिव्यू कराया। कमियां ढूंढ कर उसे दूर करवाई। हालांकि सब कार्य कानून से ही नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि छह वर्षीय कार्यकाल में आयोग ने 37 विधेयक बनाए। इसमें 27 मुख्य रहे। सात विधेयक पास हुए। बाकी विधेयक प्रक्रियाधीन हैं। बालिकाओं के साथ होने वाली छेडछाड़ की घटनाओं को रोकने के लिए कड़ा कानून का प्रावधान किया गया। 

खासतौर पर धारा 326 ए को बी में तब्दील किया गया। अब दुष्कर्म में दंड का प्रावधान कड़ा होना चाहिए। एसिड व दुष्कर्म पीडि़तों के लिए पुनर्वास के प्रस्ताव बनाया गया है। कामकाजी महिलाओं के साथ होने वाले यौन शोषण रोकने के लिए अलग से कानून बनाया गया है। यह बिल राज्यसभा में पास हो चुका है। उन्होंने बताया कि जेंडर के लिए राज्यों में बजट की आडिट होनी चाहिए। महिला आरक्षण का विधेयक भी अगले सत्र तक पास होने की उम्मीद है। बाल विवाह, मेरिज एक्ट, डायन प्रथा, देवदासी के लिए भी कार्य हुए.

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