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चिंतन-मनन :-जल है तो कल है

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on शनिवार, अप्रैल 23, 2011 | शनिवार, अप्रैल 23, 2011

उदयपुर, २२ अप्रैल 
पारम्परिक समझ, जनसहभागिता तथा व्यवहारिक नीतियों से ही राजस्थान के पानी का समग्र व एकीकृत प्रंबंध किया जा सकता हैं। यह विचार सेवा मन्दिर की मुख्य संचालिका नीलिमा खेतान ने समग्र जल संसाधन प्रबंधन पर विद्या भवन में आयोजित कार्यशाला मे व्यक्त किए। कार्यशाला का आयोजन इण्डिया वॉटर पार्टनशिप के सहयोग से झील संरक्षण समिति , डॉ. मोहन सिंह मेमोरियल ट्रस्ट तथा विद्या भवन पॉलीटेक्निक की और से किया गया। कार्यशाला मे स्वैच्छिक संस्थाओं, जल उपभोग समुहो, पंचों-सरपंचों, विषय विशेषज्ञों एंव यूरोपियन यूनियन के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। 

कार्यशाला में यूरोपियन यूनियन के राज्य जल कार्यक्रम के प्रमुख जे एम रसेल तथा जल विशेषज्ञ जुली लाडेल ने कहा कि राज्य के कुल जल का 75 प्रतिशत सतही तथा 25 प्रतिशत भूजल हैं। सिचांई मे लगभग 90 प्रतिशत पानी का उपयोग हो रहा हैं। राज्य सरकार यूरोपियन यूनियन की सहायता से ग्राम पंचायतो को जल प्रबंधन योजना बनाने के लिए शिक्षित कर रही है। यह कार्यक्रम 33 जिलो, 239 पंचायत समितियों तथा 9184 ग्राम पंचायतों तक ले जाया जाएगा। 

इण्डिया वॉटर पार्टनरशिप के प्रतिनिधि अनिल मेहता ने कहा कि जल नीति के प्रभावी क्रियान्वयन तथा आई डब्ल्यू आर एम स्थापना के लिये राज्य सरकार व यूरोपियन यूनियन को सहयोग देने के लिए निरन्तर कार्यशालाए आयोजित की जाएगी। कार्यशाला मे पूर्व विदेश सचिव जगत मेहता ने पानी को हर स्तर पर बचाने की बात कही। विद्या भवन के अध्यक्ष रियाज तहसीन ने दूषित पानी के पुनः उपयोग की तकनीकियों को स्थापित करने एंव बढावा देने पर विचार रखें। भारत के पूर्व जल आयुक्त महेन्द्र मेहता कहा कि राज्य मे भूजल प्रबंधन की स्थिति दयनीय है। जंहा सतही जल स्त्रोंतो के प्रबंधन व अनुरक्षण पर हजारो अभियन्ता व कार्मिक है, वही भूजल पर नाम मात्र के कार्मिक ही हैं। उन्होने राजस्थान की पारम्परिक जल प्रबंधन की व्यवस्था पर प्रकाश डाला। 

सी.टी.ए.ई. के प्रोफेसर पी. के. सिंह ने सामान्य व सस्ती संरचनाओं से भूजल पूर्नभरण की तकनीको को समझाया।पंचायतो को जल प्रबंधन के क्षैत्र मे मजबूत बनाने के लिए विद्या भवन पंचायती राज संस्थान के हेमराज भाटी, गांधी मानव कल्याण समिति के मदन नागदा, प्रयत्न समिति के मोहन डांगी, हनुमान विकास समिति के राजकरण यादव ने विभिन्न नीतिगत व व्यवहारिक कार्यक्रमों की जानकारी दी।

समावेशी विकास व जल पर होने वाले विवादो के निराकरण तथा सामुदायिक सहभागिता से जल स्वालम्बन पर भूजल विशेषज्ञ डा. जे. सी. दूबे, वेल्स फौर इण्डिया के ओ.पी.शर्मा तथा कासा के दिनेश व्यास ने प्रस्तुतिकरण दिया। जैव विविधता संरक्षण के विभिन्न आयामो पर वन अधिकारी सतीश शर्मा, फाउन्डेशन फोर इकोलोजिकल सिक्योरिटी के यश सेठिया, एस पी डब्ल्यू डी के डा. जगदीश पुरोहित ने विस्तृत विवेचन किया। जल की कमी वाले क्षैत्रों मे वेज्ञानिक खेती, उद्यानिकी तथा पशुपालन, मत्स्य पालन एंव मुर्गी पालन के माध्यम से रोजगार सृजन करने, आजीविका बढाने पर सेवा मन्दिर के शैलेन्द्र तिवारी, विद्या भवन कृषि विज्ञान केन्द्र के ए. एस. जोधा, डा. वी. के. सेनी, एम.एस. राठौड तथा प्रफुल्ल भट्नागर ने मार्गदर्शन किया। 

प्रारम्भ में ट्रस्ट के सचिव नन्दकिशोर शर्मा ने आई डब्ल्यू आर एम के विभिन्न आयामो पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के समापन समारोह में सेवा मन्दिर की संचालिका प्रियका सिंह एंव ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय सिंह मेहता ने पानी के मुद्दो पर समग्रता से एंव मिलजुल कर कार्य करने की अपील की। उन्होने जल प्रबंधन क्षैत्र मे महिलाओं की सहभागिता बढाने पर जोर दिया। कार्यशाला में सी.टी.ए.ई. के डीन डा. आर. सी. पुरोहित, संभागीय आयुक्त कार्यालय मे उपनिदेशक ललीता कर्नावट, भूजल बोर्ड के पूर्व निदेशक ओ.पी. माथुर, मत्स्य विभाग के पूर्व उपनिदेशक इस्माइल अली इत्यादि ने भी विचार रखें।        

नंद किशोर शर्मा
मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट सचिव 
और सामाजिक कार्यकर्ता   
9414160960

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