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संस्कृतिकर्मी रमेश चन्द्र जी वाधवानी नहीं रहे

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on रविवार, अप्रैल 24, 2011 | रविवार, अप्रैल 24, 2011


चित्तौड़गढ़ नगर से एक बड़ी दु:खद खबर कि मूलत: शिक्षक और अपनी रूचियों के बूते एक सादे  और सृजनशील संस्कृतिकर्मी के रूप में पहचान बनाने वाले रमेश चन्द्र वाधवानी तेबीस अप्रैल की रात दस बजे हमें छोड़ गए.सांस्कृतिक आन्दोलन स्पिक मैके,साहित्यिक संस्था संभावना,पूज्य सिंधी समाज समिति,वरिष्ठ नागरिक मंच,पेंशनर समाज,मीरा स्मृति संस्थान सहित शहर की लगभग बारह संस्थाओं से बहुत गहरे रूप में जुड़े हुए थे.वे बेहद सादे और सज्जन आदमी थे.इन सभी संस्थाओं के बीच प्राथमिकता के आधार में स्पिक मेके की लाड की संस्था रही है.

हर तरह के सांस्कृतिक-सामाजिक आयोजन में अपनी और से कुछ जोड़ने की प्रवृति वाले वाले रमेश जी के असमय जाने पर हम भी शोक संतप्त है.उनकी जिंदादिली भरी जीवन शैली और मस्तमौला चेहरे के हम हमेशा कायल रहे हैं.आज स्पिक मैके और अन्य संस्थाओं के बैनर तले उनके साथ बिताएं पलों को याद करते हुए  ईश्वर से उनकी आत्मा की शान्ति के लिए प्रार्थना करते हैं.उनकी रूचियों में रंगोली बनाने से लेकर चित्र उकेरने,फोटोग्राफी करने,लम्बी यात्राएं करने तक को अपनी जीवन का हिस्सा उन्होंने बनाया है.

विचारों और कार्यशैली में एकदम युवा प्रतीत होने वाले वाधवानी जी हर आयुवर्ग के साथियों के साथ अपनी कड़ी बिठा लेते थे.उनके जैसा लुभावना व्यक्तित्व हमें सदैव याद आता रहेगा.एक बड़ी सचाई कि उनके फेर में जो भी आया,गहराई से जुड़े बगैर नहीं रह पाया.सोंपे गए काम को करने में उनका समर्पण देखने योग्य होता था.दायित्व के तौर पर काम चिंता के आख़िरी लेवल तक वे डटे रहते थे.आज हम सभी उनकी जीवन शैली को सलाम करते हैं.साथ ही उनके शोक संतप्त परिवार को इस सदमें को सहने करने की शक्ति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं.


आज वाधवानी जी की अंतिम यात्रा में कई सारे परिचित लोग आए.जानकारी के लिए बता दूं,डॉ. के.सी.शर्मा,एम्.एल.डाकोत सा.,डॉ. .एल. जैन,गुरविंदर सिंह जी ,लालूराम सालवी ,गोवर्धन , बंजारा,लक्षमण व्यास,प्रहलाद सिंह जी शक्तावत,.एस.सक्सेना,डॉ.आर.के.दशोरा,लक्ष्मीनारायण दशोरा,गुलशन जांगिड,अब्दुल सत्तार,डॉ. एम्.बी.बक्शी,जे.पी.भटनागर,एस.के.शर्मा.उनका उठावना मंगलवार,शाम साढ़े पांच बजे गांधी नगर स्थित विवेकानंद गार्डन (उनके घर के सामने ही) में होगा.अगर आप संभव हो तो ज़रूर


उनकी स्पिक मेके के हित कोहिमा यात्रा के कुछ छायाचित्र जो उनकी अंतिम बड़ी यात्रा थी.



माणिक,स्पिक मैके 



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6 टिप्‍पणियां:

  1. इश्वर उनकी आत्मा को शांति दे. वे हमे ड्राईंग पढाते सिखाते थे . लंबा कद,घने बाल,गोरा चित्तारंग शांत स्वभाव के कारण वे अपने स्टुडेंट्स के बहुत ही चहेते थे.मै उनकी बहुत ही लाडली स्टूडेंट थी. अब भी वो जब मिलते मुझे उसी स्कर्ट ब्लाउज में घूमने वाली इंदु की तरह ही प्यार देते थे.एक अच्छे टीचर,गुरु के रूप में वो मेरे दिल में हमेशा जिन्दा रहेंगे.

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  2. bahut dukhad hai. meri hardik sradhanjali.is dukh me unke prijano ke sath hu.
    kaushal kishor

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  3. Vikas Agrawal Said- रमेश जी का नहीं रहना एक अपूरणीय क्षति है। शहर ने एक संवदनशील कलाकार ही नही खोया है, ब्लकि एक ऐसे जिंदादिल शख्य को उन बच्चों से दूर कर दिया है जो उनकी आँखों में सांस्कृतिक आनंद की झलक देखते थे ।
    शब्दों की अपनी सीमाऐ हैं पर भावनाएं सदा रह रह कर उनकी सेवाभावना के जज्बे का दिल से दूर नहीं होने देगी । परिवार को विकट घडी में इस असीम दूख के सहने की शक्ति देने की परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना के साथ सादर आदराजंलि.........एक मधुर स्मृति के साथ जो अब तस्वीरों से ही बयां होगी पर प्रेरणा का पूंज सदैव प्रज्जवलित रखेगी।

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  4. Aarti Joshi Ramsh ji ka hamaare beech se chale jana hamare liye bahut badi Kshati hai mere liye to he was like an elder brother Unhone mujhe Nagaland tour ke waqt Gaargi ko lekar nishchint kar kiya tha he was a real Gem.Chittaur will always remember him and so will I May God Rest his soul in PEACE Om Shanti

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