लोकार्पण समारोह:'राव राजपूत रासो', 'भक्ति रासो' तथा 'जायंदा जात का गुणहीन अंधकूपी अहंकार' - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

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लोकार्पण समारोह:'राव राजपूत रासो', 'भक्ति रासो' तथा 'जायंदा जात का गुणहीन अंधकूपी अहंकार'

दिलीपसिंह चंदज निवासी राज्यास गंगरार की तीन पुस्तकों का लोकार्पण रविवार शाम श्रीसांवलियाजी विश्रान्ति गृह में हुआ। पुस्तकों का लोकार्पण आल इंडिया फेडरेशन के उम्मेदसिंह धौली व समारोह के अध्यक्ष गुमानसिंह, अहमदाबाद से आए शिक्षाविद् चतुरसिंह ने किया। इन तीनों पुस्तकों के नाम हैं राव राजपूत रासो, भक्ति रासो तथा जायंदा जात का गुणहीन अंधकूपी अहंकार। लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि पद से बोलते हुए डा. स्वामी ओमआनंद सरस्वती ने कहा कि चंदज की इससे पहले तीन पुस्तके प्रकाशित हो चुकी है और जीवन के आठवे दशक में सामान्य ग्राम में रह कर शोधपूर्ण कार्य किया है। राव रजपूत रासो में एतिहासिक सर्वेक्षण के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, साहित्य और इतिहास के अनेक अनुबंध उद्घाटित किए हैं। 

उम्मेदसिंह धौली ने कहा कि राव समुदाय के प्राचीन कवियों ने क्षत्रियों को सदा अपनी पैनी लेखनी से जागृत रखा। तीनों पुस्तकों के लेखक दिलीपसिंह चंदज ने अपने रचित साहित्य का मंतव्य और सार बताया। इस अवसर पर पूर्व डीवाईएसपी पीके एल राव, पूर्व रणधीरसिंह, कालेज शिक्षा के डा. आदितेन्द्र राव, डा. अलका राव, बांसवाड़ा महाविद्यालय में प्रवक्ता महिपालसिंह, राजस्थान विश्वविद्यालय में रीडर नंदसिंह, बीकानेर संभाग की महिला एवं बाल विकास अधिकारी रानी राव और जयपुर के रवीन्द्रसिंह, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी सुनील झा ने चंदज के साहित्य सृजन के विषय में विचार विचार रखे। इसके अतिरिक्त नगर के प्रसिद्व कवि अब्दुल जब्बार ने सरस्वती वंदना पेश की। पूर्व आयुर्वेद अधिकारी योगेश शर्मा ने शांति पाठ किया। सीमा श्रीमाली ने वेदों की ऋचाएं सुनाई। 

संचालन सत्यनारायण समदानी ने किया। इस आयोजन में राजस्थान और सीमा प्रांतीय राज्यों के राव, रजपूत समाज के साहित्यप्रेमियों के अलावा नगर के साहित्यकार, कवि, लेखक भी मौजूद हुए। आयोजन के सूत्रधार शिक्षाविद् नारायणसिंह का आभार जताया गया। इनके पिता स्व. प्रेमसिंह राव की पुण्यतिथि पर श्रद्वांजलि अर्पित की गई।

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