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‘सृजन’ ने आयोजि‍त की प्रभावी साहि‍त्‍य चर्चा

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on गुरुवार, अप्रैल 21, 2011 | गुरुवार, अप्रैल 21, 2011

विशाखापट्नम   की साहि‍त्‍य संस्‍था सृजनने डाबा गार्डेन्‍स स्‍थि‍त पवन एनक्‍लेव में साहि‍त्‍य चर्चा कार्यक्रम का आयोजन कि‍या।  कार्यक्रम का संचालन सृजन के सचि‍व डॉ टी महादेव राव ने कि‍या।स्‍वागत भाषण करते हुए डॉ. सन्‍तोष अलेक्‍स, संयुक्‍त सचि‍व ने संस्‍था की गति‍वि‍धि‍यों का वि‍वरण प्रस्‍तुत कि‍या और साहि‍त्‍य चर्चा कार्यक्रम के उद्देश्‍य पर प्रकाश डाला।  परि‍स्‍थि‍ति‍यां और परि‍वेश लेखकों और कवि‍यों को लि‍खने के लि‍ये प्रेरि‍त करती है और नये कवि‍यों और वरि‍ष्‍ठ रचनाकारों को प्रोत्‍साहि‍त करने के उद्देश्‍य से ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन सृजन करता आ रहा है।  इससे न केवल लेखन की प्रेरणा मि‍लती है, नई रचनाओं का जन्‍म होता है, बल्‍कि‍ हमारा हि‍न्‍दी साहि‍त्‍य भी नये सौंदर्य से अलंकृत होता है।

सृजन के सचि‍व डॉ. टी महादेव राव ने कहा कि‍ साहि‍त्‍य सृजन करने वाले कवि‍यों और लेखकों को संबल प्रदान करने वाली संस्‍था सृजन सही मार्गदर्शन दे रहा है।  सभी रचनाकार ऐसी संस्‍था में आयेंगे और गुणवत्‍तापूर्ण कार्यक्रम हम जो आयोजि‍त कर रहे हैं, उन्‍हें और अधि‍क स्‍तरीय बनाने में सहयोग करेंगे ऐसा मेरा वि‍श्‍वास है।  उन्‍होंने कहा साहि‍त्‍य का अर्थ है समाज का हि‍त चाहने वाला और समाज के प्रति‍ अपने कर्त्तव्‍यों और दायि‍त्‍वों के बारे में अधि‍क जागरूक होते हैं कवि‍, लेखक और समाज के हि‍त में रचनाधर्मि‍ता अपनाने की आज के युग में आवश्‍यकता है।  उन्‍होंने सृजन की आगामी गति‍वि‍धि‍यों की जानकारी देते हुए कहा अभि‍व्‍यक्‍ति‍, जो कि‍ सृजन का वार्षि‍कांक होगा, का कार्य ज़ोरों से चल रहा है।  जि‍न कवि‍यों लेखकों ने अपनी रचनाएं नहीं दी हैं आर्थि‍क सहयोग के साथ भेजें। 
साहि‍त्‍यचर्चा कार्यक्रम की शुरुआत टी. चंद्रशेखर के व्‍यंग्‍य से हुआ तकनालॉजी के नये रूप से मेरा सामना, जि‍समें कंप्‍यूटर के माध्‍यम से जानकारी हासि‍ल करने की दीर्घ प्रक्रि‍या पर व्‍यंग्‍य नि‍हि‍त था।  लक्ष्‍मीनारायण अग्रवाल ने दो कवि‍ताएं सुनाई ज़ि‍न्‍दगी  मोबाइल है और मुंबइया कवि‍ता जि‍समें सेलफोन से आ रही गलत फहमि‍यों और एकाकी होते महानगरीय मानव की संवेदना थी।
युग चेतना शीर्षक से भ्रष्‍टाचार के खि‍लाफ आवाज़ उठाते अन्‍ना हज़ारे का समर्थन करती कवि‍ता और नारी उत्‍पत्ति‍ कवि‍ता में नारी की स्‍थि‍ति‍ का बखान कि‍या श्रीमती सीमा शेखर ने।  कुछ व्‍यंग्‍य कवि‍ताएं और एक गीत सुनाया जी. अप्‍पाराव ‘’राज’’ ने जबकि‍ डॉ के शांति‍ ने सृजनपर अपना ओलख प्रस्‍तुत कि‍या।  एम शि‍व प्रसाद ने एकावी होते पारि‍वारि‍क संबंध, प्रेम, अनुराग पर अपने आलेख में एकाकी होते मानव की बात रखी।  भारती शर्मा ने स्‍त्रीऔर ‘’हि‍न्‍दी - स्‍वाभि‍मान’’ कवि‍ताएं पढ़ी जि‍नमें नारी की स्‍थि‍ति‍ और राष्‍ट्रीय एकता की कड़ी के क्रम में हि‍न्‍दी भाषा पर उनके वि‍चार थे।  डॉ. सन्‍तोष अलेक्‍स ने अशोककवि‍ता में अशोक से आम आदमी की बातचीत का ब्‍यौरा और महात्‍वाकांक्षा और समाज सेवा के बीच का अंतर नि‍हि‍त था।  डॉ. टी. महादेव राव ने अपनी मार्मि‍क दो लघुकथाओं – ‘आशि‍कऔर ‘’ गीता की कसम’’ में वर्तमान स्‍थि‍ति‍ में समाज में नारी की स्‍थि‍ति‍ पर संवेदनशीलता थी।

पढ़ी गई सभी रचनाओं पर चर्चा कार्यक्रम का आयोजन हुआ।  अच्‍छे साहि‍त्‍य के लि‍ये ऐसे कार्यक्रमों की महत्‍ता को सभी रचनाकारों ने माना।इस कार्यक्रम में वि‍जयकुमार राजगोपाल, सीएच ईश्‍वर राव ने भी सक्रि‍य रूप से हि‍स्‍सा लि‍या।  संस्‍था के संयुक्‍त सचि‍व डॉ संतोष अलेक्‍स के धन्‍यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम समाप्‍त  हुआ।

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-
डॉ.टी.महादेव
लेखक,कवि और संस्कृतिकर्मी के रूप में जाने जाते हैं.साथ ही 'सृजन' संस्था क सचिव भी है.

संपर्क 
ई-मेल:-mahadevraot@hpcl.co.in
मोबाइल:- 09394290204
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