मैं भारत की नारी हूं, हिम्मत कभी नहीं हारी हूं - अपनी माटी Apni Maati

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मैं भारत की नारी हूं, हिम्मत कभी नहीं हारी हूं

अखिल भारतीय साहित्य परिषद व सृजन साहित्यिक संस्था के संयुक्त तत्वावधान में पेंशनर भवन में नववर्ष की पूर्व संध्या पर रविवार रात्रि स्व.उपेन्द्र चतुर्वेदी की स्मृति में काव्य निशा हुई। मुख्य अतिथि सृजन संरक्षक भजन जिज्ञासु थे। अध्यक्षता पेंशनर समाज के अध्यक्ष मानमल शर्मा ने की। विशिष्ट अतिथि प्रो.कमल नाहर, कमलेश ढेलावत व शिक्षाविद नरेन्द्र शर्मा उपस्थित थे। कवियत्री श्यामा सोलंकी नें एक शख्स खुश मिजाज था, उसके जीने का यही अंदाज था सुनाकर उपेन्द्र चतुर्वेेदी का स्मरण किया। गोपाल व्यास नें आओ खुशियों के दीप जलाएं, गोवर्धन पाटीदार ने ये मन मांगे मोर, कप चाहिये एक और तथा बाल कवि अंकन बोहरा ने हम गीत देश के गाते रहे सुनाई।श्रीपाल सिसोदिया ने धरा देश की पूछे हम से जय हिन्द का नायक कहां है, प्रहलाद क्रांति ने मैं भारत की नारी हूं, हिम्मत कभी नहीं हारी हूं तथा हंसा स्वर्णकार ने मुरझाए ठूंठ खड़े हैं.कविता सुनाई।

विजय सिंह लोढ़ा ने हमने हर शाम चिरागों से सजा रखी है, शायर एजाज अहमद ने बेऐतबार हसीनाओं पर ऐतबार किया और तमाम रात सितारों का दीदार किया सुनाकर श्रोताओं को गुदगुदाया।कन्हैयालाल बजाज ने खुशबुओं में पले आप की जिंदगी, विपिन चतुर्वेदी ने जिन्दगी तो बेवफा है रचना सुनाई। शेरसिंह पारख, दशरथ बोडाणा ने भी अपनी उत्कृष्ट रचनाएं सुनाई। काव्य निशा संयोजक डा.रविन्द्र उपाध्याय ने खजूर का पत्ता कविता द्वारा संस्कृति व राष्ट्र के प्रति निष्ठा प्रकट की। नाथूलाल जैन, यशवंत जोशी, अशोक बाबेल, राजकुमारी पारलिया, शोभा सिसोदिया, सी.पी.जोशी, रमेश पारलिया, अनिल झंवर, अनिल चेलावत सहित कई साहित्यपे्रमी उपस्थित थे।

निम्बाहेडा से हीरालाल लुहार 'हिंद' की रपट 

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