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''राष्ट्रीय एकता में जाति सबसे बड़ा संकट है ''- आर.के. सचान ‘होरी’

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on सोमवार, अप्रैल 11, 2011 | सोमवार, अप्रैल 11, 2011



आर.के.सचान जी 
वरिष्ठ साहित्यकार एवं चर्चित कवि राजकुमार सचान ने राष्ट्र के सशक्तीकरण के लिए जाति प्रथा को समूल समाप्त किये जाने का आवाहन करते हुए जाति तोड़ो राष्ट्र जोड़ो नामक संस्था द्वारा जागरूकता अभियान चलाये जाने तथा खासकर युवाओं  को जागरुकता के इस महाअभियान में आगे आने व राष्ट्र  को मजबूत बनांये जाने की अपील की है । उन्होंने जाति प्रथा को देष के विकाश में बड़ी बाधा बताया उनका मानना है की इस देश के फलने और फूलने में जातियां  सबसे बड़ी बाधा हैं भारतीय समाज सदियों से विभिन्न जातियों और वर्गों में बटा चला आ रहा है जिसके चलते आपस में प्रथकता का भाव समाज में  बना हुआ है और राष्ट्र सषक्त नहीं हो पा  रहा है ! 

सचान ने एक अनौपचारिक भेंट में कहा कि जिस प्रकार दहेज प्रथा ,बालविवाह ,सती प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों को जड़ से मिटाने हेतु कानून बनाये गए उसी तरह से जातिवाद जैसी राष्ट्रघाती और मानव विरोधी इस कुरीति को भी जड़ से समाप्त करने हेतु संस्था भारत सरकार से अधिनियम बनाये जाने की मांग करेगी ताकी इस घिनौनी प्रथा का उन्मूलन हो सके !

होरी ने जोर देते हुए कहा कि अब तक इस कुप्रथा के समाप्त करने पर ध्यान नहीं दिया गया जब की लोहिया व गाँधी जी भी जातिप्रथा उन्मूलन हेतु बराबर प्रयाषरत रहे। होरी ने कहा कि जब सभी जातियां वैवाहिक संबंधों से एक दूजे से जुड़ जायेंगी तो स्वयमेव आरक्षण जैसी समस्या का समाधान हो जायेगा और लोकतंत्र भी मजबूत होगा । उन्होंने गांधी व लोहिया की चर्चा करते हुए कहा की इन महापुरुषों को आदर्श मानने वालों ने  भी जाति प्रथा को समाप्त करने के लिये कोई खास ध्यान नही दिया श्री सचान ने कहा की विभिन्न जातियों में रोटी बेटी के संबंध होने पर राष्ट्र में भाईचारा तो बढेगा ही साथ ही साथ एकता व समरसता से राष्ट्र को भी मजबूती भी मिलेगी।

ये बातचीत  के अंश 
हमारे लिए पत्रकार साथी
 रिज़वान चंचल ने प्रेषित किए हैं.

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