Latest Article :

वेब रिपोर्टिंग एवं ई-मेल के कड़वे अनुभव

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on रविवार, अप्रैल 03, 2011 | रविवार, अप्रैल 03, 2011

आजकल कुछ ऐसे रिर्पोटर्स देखने को मिलेंगे जो चाहते हुए भीं आप के मेल पते पर ऊल-जुलूल किस्म की खबरें भेजते हैं। शायद ऐसा करना उनकी आदत है जो एकड्रग एटिक्टकी तरह कई मेल आई0डी0 पर एक साथ अपने वाहियातआर्टिकल्सभेजते हैं। हाई प्रोफाइल कहलाने के चक्कर में ब्लाग/फेसबुक आदि इत्यादि वेब स्पेस पर अपनी सिरदर्द जैसी बकवासों को लिखने/चैटिंग करने वालों से एक तरह सेएलर्जीहो गई है। इन्टरनेट की सेवा प्रदान करने वालों ने थोड़े से पैसों में असीमित डाउन/अपलोडिंग की सुविधा दे रखा है सो वेब का बेजा इस्तेमाल करने वाले अराजक तत्वों की भरमार हो गई है। इन लोगों ने इन्टरनेट को मजाक सा बना लिया है।

कुछेक कथित लेखकों ने हमें भीं अपने लेख/न्यूज आदि मेल करना शुरू कर दिया। खीझ होने लगी थी, यह कहिए कि ऐसे लोगों से एलर्जी होने लगी। सैकड़ों मेल आई.डी. पर भेजे गए इन तत्वों केआलेख तो सारगर्भित होते हैं, और ही प्रकाशन योग्य। हमने अपने सहकर्मी से कहा कि रिप्लाई आल करके ऐसे लोगों को ताकीद कर दो कि आइन्दा बेवजह मेल बाक्स मेंवाहियातआलेख भेजें। कोई दिल्ली के हैं, उन्होंने काल करके कहा कि वह ऐसा इसलिए करके हैं ताकि गरीब लोग जो वेब साइट्स/न्यूज पोर्टल की तरह संचालित कर रहे हैं, उन्हें मुफ्त में न्यूज (खबरें) मिल जाएँ। उनकी बातें सहकर्मी ने सुनी और कुछ बताया। हँसी आई फिर मानव होने की वजह से दुर्गुण रूपी गुस्सा भी आया। कहा वह बेवकूफ है। पहले तो इसे छपास रोग था, जब छपने लगा तब आल पर मेल करने लगा। यह सोचकर कि वह वेब पोर्टल चलाने वाले आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को फ्री में खबरें दे रहा है। इसी तरह कईयों के मेल्स आते रहते हैं।

मानव हूँ गुस्सा तो आएगा ही। सहकर्मी से कहा कि लिख दो कि फार गॉड सेक अब इस तरह के मेल सेन्डिंग बन्द करें। सहकर्मी नहीं समझ पाये उन्होंनेरिप्लाई आलकर दिया। जाहिर सी बात है कि जिनसे हमारा किसी भी प्रकार का सम्बन्ध नहीं है वे गुस्सा तो करेंगे ही। एक छोटी सी त्रुटि ने कई लोगों केईगो को हर्टकिया। उनके रिटर्न मेल्स आए, जिनमें सभीं ने अपने-अपने तरीके से मुझे भला-बुरा कहा था। मैने महसूस किया कि पत्रकारिता से सम्बद्ध लोगों में स्वाभिमान के स्थान पर दर्प यानि घमण्ड कुछ ज्यादा है, वह भी ऐसे लोग जिन्होने दो हजार, पाँच हजार खर्च करके अपनी वेब साइट्स बना लिया है उनके तो रूतबे का कोई सानी नहीं।

बहरहाल मैं क्या गुस्सा करूँ। मैं तो बस इतना ही कहुँगा कि कभीं-कभी ऐसे लोगों से पाला पड़ जाता है जिनकी वजह से हमारी रिप्लाई से एक से एक योद्धा तलवारें भाँजने लगते हैं, जिन्हें युद्ध के मैदान में जंग लड़ने का तरीका ही नहीं मालूम।  इस इलेक्ट्रॉनिक युग में अमेरिकी राष्ट्रपति को प्रेषित मेल गलती से किसी अन्य देश के राष्ट्राध्यक्ष को मिल जाए तो कोई आश्चर्य की बात नहीं। आपा खोया करें मैंने भी प्रिण्ट मीडिया में अब तक अपनी सेवाएँ देते हुए 37 वर्ष पूरे कर लिए हैं। तब तो इसकी पढ़ाई थी, और ही मास कम्युनिकेशन का प्रशिक्षण जो पढ़ना-लिखना जानता था वहीं सिकन्दर होता था। आप वेबसाइट संचालित करते हैं, यह आप के लिए गौरव की बात हो सकती है। हम भी अपना अखबार निकालते हैं, और वेब पोर्टल ऑपरेट करते हैं, शौकिया। रही बात चैटिंग या फिर नए तकनीक से संवाद करने की तो वह मुझे नहीं मालूम।

इन्टरनेट ऑपरेट करने के लिए सहयोगी की मदद लेता हूँ। सहयोगी से चूक हो जाए तो जाहिर सी बात है कि वह गलती मेरी ही मानी जाएगी। लेकिन आप तूफान सिंह हों या चक्रवात मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं भीबैतालके नाम से अपनीयुवावस्थामे चर्चित पत्रकार हुआ करता था, लेकिन तहजीब और एखलाक को ताक पर नहीं रखा लेागों के बीच सम्मानित ढंग से स्थान पाता था। अब भीं पाता हूँ। आज तो मेट्रोसिटी में झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले भी सपनामक्काका देखते हैं। हमारे यहाँ कहावत है कि ‘‘रहैं भरसाएँ में और देखै सपना मक्का कै’’ मैं आप को नहीं कह राह हूँ। अब मैं इस कहावत से भी इनकार नहीं कर सकता किचोर की दाढ़ी में तिनका यदि आप की मेल आई0डी0 पर रिप्लाई आल के क्रम में कुछ मेरी तरफ से भेजा गया हो जिससे आप काईगो हर्टहुआ हो तो उसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूँ क्योंकि मैंअकारणकिसी शरीफ को दिल नहीं दुखाना चाहता। आप से भी अपेक्षा करता हूँ कि जो लोग अपने मेल्स सेण्ड आल करकेबकवासभेजते हैं उन्हें नसीहत जरूर दें। अनजाने में हुई गलती के लिए एक बार फिर क्षमा चाहूँगा। फिलवक्त बस इतना ही। 

भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी
अम्बेडकरनगर

सम्पर्क नम्बर- 09454908400
www.rainbownews.in
Share this article :

4 टिप्‍पणियां:

  1. bahut badhiya,, sahi fadi aapne sabhi bakwas likhne wale, tutpunjiya lekhkon ki (khaskar hindi bloggers).

    उत्तर देंहटाएं
  2. एक ज़रूरी आलेख था शुक्रिया
    मैने इसे अपने सर्वाधिक लोक प्रिय ब्लाग मिस फ़िट पर डाला है
    आपत्ति हो तो कहिये
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  3. apne vahi likha jo sab mahsoos karte h apko vahut vahut dhanyabad

    उत्तर देंहटाएं

संस्थापक:माणिक

संस्थापक:माणिक
अपनी माटी ई-पत्रिका

सम्पादक:जितेन्द्र यादव

सम्पादक:जितेन्द्र यादव
अपनी माटी ई-पत्रिका

एक ज़रूरी ब्लॉग

एक ज़रूरी ब्लॉग
बसेड़ा की डायरी:माणिक

यहाँ आपका स्वागत है



ज्यादा पढ़ी गई रचना

यहाँ क्लिक करके हमारी डाक नि:शुल्क पाएं

Donate Apni Maati

रचनाएं यहाँ खोजिएगा

हमारे पाठक साथी

सम्पादक मंडल

साहित्य-संस्कृति की त्रैमासिक ई-पत्रिका
'अपनी माटी'
========
प्रधान सम्पादक
सम्पादक
सह सम्पादक
तकनिकी प्रबंधक
========
संपर्क
apnimaati.com@gmail.com
========

ऑनलाइन

Donate Us

 
Template Design by Creating Website Published by Mas Template