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प्रमोद वर्मा आलोचना सम्मान-2011,कृष्णदत्त पालीवाल और प्रफुल्ल कोलख्यान को

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on बुधवार, मई 25, 2011 | बुधवार, मई 25, 2011

रायपुर
उल्लेखनीय आलोचना कर्म के लिए वर्ष 2011 का प्रमोद वर्मा आलोचना सम्मान जाने-माने आलोचक कृष्णदत्त पालीवाल, दिल्ली को दिया जायेगा । इसके अलावा प्रमोद वर्मा आलोचना सम्मान (युवा) प्रफुल्ल कोलख्यान, कोलकाता को दिया जायेगा । 13 मई को हुई चयन समिति की बैठक में सदस्य डॉ. धनंजय वर्मा, डॉ. गंगा प्रसाद विमल, डॉ. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, विश्वरंजन और संयोजक ने विधिवित घोषणा की .

पुरस्कार स्वरूप दोनों आलोचकों को क्रमशः 21 एवं 11 हज़ार रुपये, प्रतीक चिन्ह, शाल, श्रीफल से सम्मानित किया जायेगा । इसके अलावा दोनों रचनाकारों पर केंद्रित एकाग्र का प्रकाशन भी संस्थान से किया जायेगा । यह पुरस्कार उन्हें संस्थान के रायपुर में होने वाले वार्षिक आयोजन में 23-24 जुलाई 2011 प्रदान किया जायेगा । यह पुरस्कार अब तक श्रीभगवान सिंह, श्री मुधरेश, कृष्ण मोहन व ज्योतिष जोशी को मिल चुका है ।

कृष्णदत्त पालीवाल के बारे कुछ जानकारी:-4 मार्च, 1943 की सिकंदराबाद, ज़िला फर्रूखाबाद, उ. प्र. में जन्में कृष्णदत्त पालीवाल प्रोफेसर एवं पूर्व विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय, जापान के तोक्यों यूनिवर्सिटी ऑफ फॉरेन स्टडीज़ में विज़िटिंग प्रोफेसर रहे । उनकी प्रमुख कृतियाँ है - भवानीप्रसाद मिश्र का काव्य-संसार, आचार्य रामचंद्र शुक्ल का चिंतन जगत्, मैथिलीशरण गुप्त : प्रासंगिकता के अंत-सूत्र, सुमित्रानंदन पंत, डॉ. अम्बेडकर और समाज-व्यवस्था सीय राम सब जग जानी, सर्वेश्वरदयाल सक्सेना, हिंदी आलोचना के नए वैचारिक सरोकार गिरिजाकुमार माथुर, जापान में कुछ दिन, डॉ. अम्बेडकर : समाज-व्यवस्था और दलित-साहित्य, उत्तर-आधुनिकतावाद की ओर, अज्ञेय होने का अर्थ, उत्तर-आधुनिकतावाद और दलित साहित्य, नवजागरण और महादेवी वर्मा का रचना-कर्म, स्त्री-विमर्श के स्वर, अज्ञेय : कवि-कर्म का संकट निर्मल वर्मा, दलित साहित्य : बुनियादी सरोकार, निर्मल वर्मा : उत्तर औपनिवेशिक विमर्श, अंतरंग साक्षात्कार, नवजागरण, देशी स्वच्छंदबाद और नयी काव्य धारा, अज्ञेय से साक्षात्कार। साहित्य अकादेमी, दिल्ली द्वारा प्रकाशित ‘इंटीग्रेटेड हिस्ट्री ऑव इंडियन लिटरेचर’ के संपादक मंडल के सदस्य, हिंदी माध्यम कार्यान्वयन निदेशालय, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित ‘भारतीय साहित्य का समेकित इतिहास’ में लेखन, नेशनल पब्लिशिंग हाउस, दिल्ली द्वारा प्रकाशित ‘हिंदी साहित्य का इतिहास (डॉ. नगेन्द्र) में लेखन जैसा साहित्येतिहास लेखन का कार्य कर चुके हैं । उन्होंने लक्ष्मीकांत वर्मा की चुनी हुई रचनाएँ, मैथिलीशरण गुप्त ग्रंथावली(बारह खंडों में)जैसी महत्वपूर्ण किताबों का संपादन किया है । उन्हें  हिंदी अकादमी पुरस्कार दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मान, तोक्यो विदेशी अध्ययन विश्वविद्यालय, जापान द्वारा प्रशस्ति पत्र उ. प्र. हिंदी संस्थान का राममनोहर लोहिया अतिविशिष्ट सम्मान सुबह्मण्यम भारती सम्मान, केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा साहित्यकार सम्मान, हिंदी अकादमी दिल्ली हिंदी सम्मेलन, न्यूयॉर्क, अमेरिका में सम्मानित किया जा चुका है ।

प्रफुल्ल कोलख्यान  के बारे कुछ तथ्य :-04 अप्रैल 1962 के दिन मिथिलांचल के गजहरा (मातृक), मधुबनी, बिहार के सामान्य किसान परिवार में जन्मे आलोचक प्रफुल्ल कोलख्यान (मूल नाम - प्रफुल्ल कुमार झा) की प्रकाशित कृतियाँ हैं -  मँजी हुई शर्म का जनतंत्र (कविता संग्रह - 1997), साहित्य समाज और जनतंत्र (आलेख संग्रह- 2003), बाजारवाद और जनतंत्र(आलेख संग्रह- 2006), आजादी और राष्ट्रीयता का मतलब (आलेख संग्रह- 2009), छूटे हुए क्षण(जीवनानुभव -2010)। इसके अलावा अनेक महत्त्वपूर्ण पुस्तकों, पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ, लेख, टिप्पणियाँ प्रकाशित।मातृभाषा मैथिली में भी छिट-पुट लेख टिप्पणियाँ प्रकाशित हो चुकी है । बांग्ला, अंगरेज़ी में कुछ रचनाओं के अनुवाद भी प्रकाशित। सामाजिक-सांस्कृतिक विषयों पर जारी विमर्श में उनकी सक्रिय भागीदारी रही है । उन्हें शोध एवं आलोचना कार्य के लिए बिहार राष्ट्रभाषा परिषद, बिहार लरकार की ओर से साहित्य सेवा सम्मान 1998 मिल चुका है। वे वर्तमान में नाबार्ड के पश्चिम बंगाल  क्षेत्रीय कार्यालय, कोलकाता में कार्यरत हैं ।

सूचना स्त्रोत:-
जयप्रकाश मानस
कवि और कुशल प्रबंधक 
'सृजनगाथा' नामक वेब पत्रिका के सम्पादक 
srijangatha@gmail.com

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