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‘पंत’ की कवि‍ता ,युगों तक सम्‍हाली जानेवाली धरोहर

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on सोमवार, मई 30, 2011 | सोमवार, मई 30, 2011

वि‍शाखपटनम की हि‍न्‍दी साहि‍त्‍य संस्‍था ‘सृजन’ ने छायावाद के प्रमुख स्‍तंभ एवं महान कवि‍ सुमित्रानंदन पंत के साहि‍त्‍य पर 29-05-2011 को एक संगोष्‍ठी का आयोजन डाबा गार्डेन्‍स स्‍थि‍त पवन एनक्‍लेव में कि‍या।  सुमित्रानंदन पंत के साहि‍त्‍य के वि‍भि‍न्‍न पहलुओं पर वक्‍ताओं ने प्रपत्र पढ़े और उन पर चर्चा हुई।
   
      कार्यक्रम का आरंभ ‘सृजन’ के सचि‍व डॉ टी महादेव राव के स्‍वागत भाषण से हुआ।  उन्‍होंने कार्यक्रम के वि‍षय में बताते हुए पंत के असीम प्रति‍भा के कुछ पहलुओं पर वि‍चार वि‍मर्श को संगोष्‍ठी का उद्देश्‍य बताया।  ‘सृजन’ के द्वारा आयोजि‍त स्‍तरीय कार्यक्रम का वि‍द्वज्‍जनों की प्रति‍भागि‍ता की अपील की गई।  कार्यक्रम का संचालन करते हुए ‘सृजन’ के अध्‍यक्ष नीरव कुमार वर्मा ने सुप्रसि‍द्ध छायावादी कवि‍ ‘पंत’  की कवि‍ता को युगों तक सम्‍हाली जानेवाली धरोहर कहा।
 
      सर्वप्रथम श्रीमि‍त सीमा वर्मा ने अपने आलेख ‘प्रकृति‍ का सुकुमार कवि‍ - पंत’ पढ़ा जि‍समें पंत की कवि‍ताओं में प्रकृति‍ की उपस्‍थि‍ति‍ के साथ उनकी कवि‍ताओं में नि‍हि‍त मार्क्‍सवाद, छायावाद, प्रगति‍वाद और अरविंद दर्शन की बात बताई।  डॉ सन्‍तोष अलेक्‍स ने अपने पत्र ‘सुमि‍त्रानंदन पंत एवं प्रकृति‍ चि‍त्रण’ में पंत की आदर्शवादि‍ता और दार्शनि‍कता के साथ प्रकृति‍ संबंधी कवि‍ताओं के वि‍षय में चर्चा की।  तोलेटि‍ चंद्रशेखर ने सुमि‍त्रानंदन पंत को अनुभूति‍ का कवि‍ मानते हुए अपने लेख में उनकी कवि‍ताओं में प्रस्‍तुत संवेदना संचालन एवं अनुभूति‍ की प्रधानता पर उदाहरण सहि‍त बात रखी।  श्रीमति‍ सीमा शेखर ने अपने आलेख ‘’सौंदर्य चेतना और पंत’’  में कहा कि‍ मानव ही उनकी दृष्‍टि‍ में वि‍श्‍व में सबसे सुंदर है।     वे बिंब वि‍धान के प्रमुख कवि‍ रहे।

      श्री राम प्रसाद ने सुमि‍त्रानंदन पंत की समग्र काव्‍य साधना की चर्चा करते हुए कहा कि‍ पंत के कृति‍त्‍व को आज नये सि‍र से, नये दृष्‍टि‍कोण से, नये परि‍प्रक्ष्‍य में देखने और वि‍चार करने की आवश्‍यकता है क्‍योंकि‍ उनकी नि‍धन के 34 साल के बाद आज स्‍थि‍ति‍यां, देश, काल, परि‍वेश वे नहीं है, जो पंत के समय थीं।  ‘’प्राकृति‍क चि‍त्रण का महान कवि‍ - पंत’’ शीर्षक अपने पत्र में डॉ टी महादेव राव ने उन्‍हें प्रकृति‍मय कवि‍ कहते हुए उनकी एकाकीपन की, प्रकृति‍ से जुड़ी कवि‍ताओं का उदाहरण दि‍या।  उनका कहना था उनकी कवि‍ताओं पर प्रगति‍वाद का, शैली, कीट्स जैसे वि‍देशी कवि‍यों का प्रभाव देखा जा सकता है।  श्रीमति‍ मीना गुप्‍ता ने अपने लेख – सुकुमार कवि‍ताओं का सर्जक – पंत पढ़ा जि‍समें उनकी कवि‍ताओं में नि‍हि‍त कोमल, मर्मस्‍पर्शी मगर प्रभावोत्‍पादक भावनाओं का जि‍क्र कि‍या गया।  नीरव कुमार वर्मा ने अपने ‘’मानवता की कल्‍याण कामना से जुड़े कवि‍ पंत’’ शीर्षक आलेख में पंत को प्राकृति‍क, मानवतावादी, लोक कल्‍याण की कामना करने वाला महान कवि‍ की संज्ञा दी।
 
      इनके अलावा बी. एस. मूर्ति‍, वि‍श्‍वनाथ आचारी, अशोक गुप्‍ता, आर. वि‍जय कुमार,     सी. एच. ईश्‍वर राव ने भी संगोष्‍ठी में सक्रि‍य प्रति‍भागि‍ता की।  सभी पर्चों पर चर्चा हुई और सबने इसे एक सार्थक पहल माना।  डॉ सन्‍तोष अलेक्‍स, संयुक्‍त सचि‍व, सृजन के धन्‍यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम संपन्‍न हुआ।  
पन्त जी की क कविता:-
याचना 


बना मधुर मेरा जीवन!
नव नव सुमनों से चुन चुन कर
धूलि, सुरभि, मधुरस, हिम-कण,
मेरे उर की मृदु-कलिका में
भरदे, करदे विकसित मन।
बना मधुर मेरा भाषण!
बंशी-से ही कर दे मेरे
सरल प्राण औ’ सरस वचन,
जैसा जैसा मुझको छेड़ें
बोलूँ अधिक मधुर, मोहन;
जो अकर्ण-अहि को भी सहसा
करदे मन्त्र-मुग्ध, नत-फन,
रोम रोम के छिद्रों से मा!
फूटे तेरा राग गहन,
बना मधुर मेरा तन, मन!
रचनाकाल: जनवरी १९१९


योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-
डॉ.टी.महादेव
लेखक,कवि और संस्कृतिकर्मी के रूप में जाने जाते हैं.साथ ही 'सृजन' संस्था क सचिव भी है.

संपर्क 
ई-मेल:-mahadevraot@hpcl.co.in
मोबाइल:- 09394290204
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