छायाचित्र:-शंकर घट्टा,चित्तौडगढ - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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छायाचित्र:-शंकर घट्टा,चित्तौडगढ

ये हमारे शहर का एक पुराना स्थल है जिसे लोगों ने शमशान घाट समझ कर भुला दिया है. साफ़ सफाई ज़रूर यहाँ नहीं रहती मगर जब हमारी गम्भीरी नदी में बहुत पानी होता है तो इसी शंकर घाट पर हुजूम उमड़ पड़ता है. इसे लोग प्यार से शंकर घट्टा कहते है. ख़ास तौर पर शहर के लोगों का इस पर मोह उमड़ता है.चित्तौड़ के बाहर से आए हुए लोग इसे उतना नहीं जानते हैं.


यहाँ गोस्वामी परिवार के लोगों की समाधियाँ बनी हुई है. साथ ही कुछ ख़ास मुनियों की समाधियाँ हैं.इसके तट पर बैठ कर हम गंभीरी को निहार सकते है.यहाँ से दोनों पूल हमें साफ़ नज़र आते हैं.यहाँ एक तरफ शमशान घाट भी है.गम्रियों में यहाँ पानी कम ही रहता है,जिसका कारण दोनों और अनिकत का बन जाना है. बाकी बरसात के दिनों में यहाँ नहाने-कूदने और घंटों बैठने का आनंद कुछ और ही है.यहीं भगवान शिव,गणेश जी और हनुमान जी का भी एक एक मंदिर बना हुआ है.हर सोमवार यहाँ बहुत आनंद के साथ आरती और प्रसादी होती है.एक और बात की यहाँ मल्ल विद्या सिखाने के नाम पर एक पुराना अखाड़ा भी संचालित होता है.नदी के पानी के ठंडक के साथ ही यहाँ का एकांत हमें अपनी तरफ खीच ले जता है.हालांकि साफ़-सफाई ज़रूर कम ही रहती है .ख़ास तौर पर घाट पर. मंदिर परिसर में पूरी तरह से सफाई व्याप्त मिलेगी.


एक और ख़ास बात कि यहाँ आने वाले लोगों में कपडे धोने-झकोलने वाले के अलावा श्राद्ध-कर्मकांड आदि के  उद्धेश्य से भी आए लोग शामल होते हैं.गर्मियों में यहाँ का पानी बहुत गंदालाया हुआ हो जता है.बैठने की तनिक भी इच्छा नहीं हो सकती है. मगर देखने में बेहद आकर्षक जगह है ये.एक तो शहर के एकदम बिचोंबीच दूजा यहाँ नदी की लहरों के उठाव और गिराव से सराबोर आलम.यहाँ तक जाने का रास्ता शहर में चंद्रलोक टाकिज के ठीक पास से जाता है.घने पेड़ों वाले इस इलाके में पूरी तरह से शांति और ठंडक मिलती है.आम रास्ते से कुछ हटकर बने इस प्राचीन स्मारकनुमा स्थल को लगभग अनदेखा ही किया गया है.यहाँ कुछ फेरबदल करके एक अच्छे पर्यटन स्पोट के रूप में बदला जा सकता है.हम ये सोचते हैं कि के शहरों में नदी के होने पर उस शहर की फिजा में एक नई बात हो जुड़ती है इस शहर में अभी तक इस बात को अनुभव नहीं किया गया है,ऐसा मेरा मानना है.


माणिक 





























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