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मालवा की एक सांस्कृतिक परम्परा :-'मालवी छल्ला '

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on रविवार, मई 22, 2011 | रविवार, मई 22, 2011

मालवा में उत्सव मानाने की पुराणी परम्परा री हे | पेला सेज मालवा में लोग टेम टेम पे उत्सव मनाता आया हे | पण आज जैसा लाल बाघ ने राजवाडा जेसा  उत्सव नि होता था | 
मालवा में शादी ब्याव हो के तेवार सगळा उत्सव जैसा मनाया जावे हे | शादी ब्याव की अपन बात करा तो शादी मालवा में १५ दन से कम की कदी नि होती थी ने अबे भी १० दन की तो होय हे | कणी भी गाम या सेर में बियाव होई तो १० से १५ दन आखो गाव ने सगला नातेदार ने रिश्तेदार भेला हुई के बियाव को पुरो आनंद ले | दस दन पेला से लाड़ा /लाड़ी के हल्दी लगे ने फिर शुरू होई बाना झेलने को काम | कदी अणि गाव में तो कदी अणि गाव में | कदी बा का या तो कदी काकाजी का या | रोज बाणों झेलो ने लाड़ा /लाड़ी के रोज कोल्या दी के सान्जे " बनोलो " निकलने को रिवाज हे | "बनोलो " को मतलब हे के सान्जे लाड़ा लाड़ी को जुलुस निकल्नो | मालवा में छोरा/छोरि होण के नाचवा को रिवाज नि हे | अबे तो सेर का देखा देखि छोरा छोरि होण नाचवा लगी गया पण पेला छोरा छोरि के नाचवा को रिवाज नि थो | तो शादी व्ह्याव में ढोल बजे ने गाम के पेलवान ने जवान छोरा ढोल पे लठ, तलवार , बनेठी ,फरसा घुमावे ने अपनी ताकत को प्रदर्शन करे जीके देखि के गाव की छोरि होण उनकी बड़ाई करे ने सब उनके देखि के खुस होवे.

छल्ला गाने को रिवाज भी अणि ब्याव होण की जान होवे हे | छल्ला मतलब पेला कवि होता था पण सब लिख्या पड्या नि होता था | तो वि लोग कविता जोड़ी के छल्ला का रूप में शादी बियाव में सुनाता था | इ छल्ला श्रग़ार,सामयिक ,वीरता आदि रस का होता था | अणिके सुणावा को तरीको भी भोत मस्त थो | एक हाथ में तलवार ने मुछ पे टाव देता हुआ कटिलो जवान जड़े छल्ला गातों तो खूब अच्हो लागे | छल्ला का हर दोहा पे ढोल को डंको ने पूरी होने पे अखाडा को ढोल ने फिर छल्ला गाने वालो तलवार ली के ढोल पे नाचतो ने तलवार घुमातो | रात रात भर लोग "बनोलो " निकालता

छल्ला को आनंद लेता |

श्रग़ार रस का छल्ला :

सुन छल्ला रे हा रे छल्ला रे
नदी किनारे छल्ला दिवा बाले रे कई
काजल पड़े रे खंडार |
थारी सोई राम दोई काजल पड़े रे खंडार
आँजन वाली गोरी पातली रे कई
निरखन वालो रे गवार |

सामयिक विषय पे छल्ला


सुन छल्ला रे हा रे छल्ला रे
गाँधी बाबा ने छल्ला चकर चलायो ने कई
अग्रेज ने छोड़ी सरकार |
थारी सोई राम दोई  अग्रेज ने छोड़ी सरकार
नेहरु जी बनया परधान मंत्री ने कई चली पड़ी सरकार ||

पर्यावरण पे छल्ला

सुन छल्ला रे हा रे छल्ला रे
गोया काकड़ सब चली गया ने चारा की मारा मार |
थारी सोई राम दोई चारा की मारा मार
चारो तो सगलो नेता खाई गया ने ढोर  राहे निराहार ||

भ्रस्ट नेताओ पे  छल्ला

सुन छल्ला रे हा रे छल्ला रे
बेन बेटी ना इज्जत लुटी रिया खाकी वाला गद्धार |
थारी सोई राम दोई खाकी वाला गद्धार
खद्दर वाला ने इमान छोड़ी दियो ने जूता की रेलम पार ||
छल्ला गाने हो ने सुननो होई तो मालवा में जाओ जा असली मालवा बस्यो हे | 



राजेश भंडारी "बाबु"
१०४ महावीर नगर
इंदौर-फ़ोन 9009502734
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