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आर.ए.एस. परीक्षा सुधार:- भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु जितेन्द्र सोनी का जवाबी पत्र

(ये पत्र जितेन्द्र जी ने राजस्थान सचिवालय के कार्मिक विभाग को लिखा है सुझाव सहित पत्र का मसौदा निम्न है-सम्पादक)

[1] महोदय, मुख्य परीक्षा से वैकल्पिक विषयों को हटा लेने के पीछे कोई तार्किक कारण नज़र नहीं आता है । अगर यह कारण स्केलिंग से जुड़ा है तो फिर आपको विदित ही है  कि देश के लगभग  सारे राज्य लोक सेवा आयोग और संघ लोक सेवा आयोग के द्वारा वैकल्पिक विषयों का पेपर लिया जाता है और स्केलिंग भी की जाती है । राजस्थान में अगर आर.ए.एस. 2007 की भर्ती में स्केलिंग पर विवाद होता है तो उससे बचने के लिए वैकल्पिक विषयों को ही हटा देना अनुचित है क्योंकि, जहां तक मैं समझता हूँ , इसके निम्न दुष्परिणाम  सामने आयेंगे -

[ क ] वैकल्पिक विषयों के ना होने पर एक विद्यार्थी ग्यारवीं से ही यह धारणा बना लेगा कि इन विषयों का मुझे क्या करना है जो इनको गंभीरता से पढूं ...... स्नातक के दौरान तो जो आर.ए.एस. की तैयारी करना चाहेंगे वे विषयों को सिर्फ स्नातक पास करने के लिए ही पढेंगे जिसका परिणाम शैक्षिक समझ का क्षरण ही होगा ।

[ख ] अगर वैकल्पिक विषय हटा दिए गये तो बेरोजगार अभ्यर्थी केवल राजस्थान के लिए ही खुद को तैयार कर पांएगे क्योंकि अन्य राज्यों की लोक सेवाओं में तो वैकल्पिक विषय लेने जरूरी हैं  , और जिनकी तैयारी के अभाव में राजस्थान के युवकों के पास केवल राजस्थान की लोक सेवाओं का ही एक विकल्प होगा , दूसरे लोक सेवा योग नहीं । अब अगर यह माना जाए कि उन्हें वैकल्पिक विषयों की तैयारी साथ साथ करते रहना चाहिए , तो महोदय , यह भी एक अन्याय होगा क्योंकि एक राजस्थान का बेरोजगार जो अन्य राज्यों की लोक सेवाओं के मद्देनज़र वैकल्पिक विषयों को तैयार करता है उसे कुल आठ पेपर तैयार करने होंगे , और उसी राजस्थान का दूसरा कोई बेरोजगार [जो अन्य राज्य लोक सेवाओं की परीक्षा में  वैकल्पिक विषयों को चुने जाने की अनिवार्यता और खुद की अक्षमता के कारण नहीं बैठना चाहता है ] केवल चार पेपर तैयार करेगा और आनुपातिक रूप से इन प्रश्न पत्रों को ज्यादा वक्त दे पायेगा और लाभप्रद स्थिति में रहेगा । 

[ग] एक और महत्तवपूर्ण बात यह है कि अभी तक जो आर.ए.एस. परीक्षा की तैयारी करते आये हैं उनकी वही तैयारी आई.ए.एस. परीक्षा में भी काम आ जाती है क्योंकि सिवाय राजस्थान के पेपर के सभी पेपर वहां देने पड़ते हैं , और इन सबका फायदा यह होता है कि ज्यादातर आर.ए.एस. की तैयारी करने वाले प्रतियोगियों का आई.ए.एस. में भी चयन हो जाता है ।

 आर.ए.एस. 2007  की परीक्षा परिणाम का ही विश्लेषण कर लें - इस परीक्षा में अंतिम रूप से चुने गये सफल प्रतियोगियों ने अपनी आर.ए.एस. की तैयारी के दम पर ही आई.ए.एस. की परीक्षा भी समानांतर दी थी और यही वजह है कि इस परीक्षा में चयनित मनीष गोदारा , मालविका गर्ग , श्याम लाल , शंकर कुमावत , प्रीति , सोनिका सहित लगभग पचास से ज्यादा लोगों का सिविल सर्विस परीक्षा 2009 में चयन हो गया और जिन लोगों का नहीं हुआ था , उन्होंने आर.ए.एस. 2008 परीक्षा की तैयारी की तो इसका फायदा यह हुआ कि इनमें से कुछ और लोगों का सिविल सेवा परीक्षा 2010 में चयन हो गया । ऐसा इसीलिए ही संभव हो सका कि इन प्रतियोगियों की आर.ए.एस. और आई.ए.एस. की तैयारी में ज्यादा भिन्नता नहीं थी और इसी वजह से इन सब को अपना सर्वोत्तम पाने में आसानी हुई ।  अब अगर आप आर.ए.एस. से विकल्पिक विषय हटा देंगे तो  क्या यह सतत और समरूप तैयारी का फायदा राजस्थान के युवाओं को मिल पायेगा ?

मुझे तो लगता है कि वे इस उहापोह से ही नहीं निकल पाएंगे कि आर.ए.एस. [जिसमें वैकल्पिक विषय की परीक्षा नहीं होगी] की तैयारी करें या आई.ए.एस.     [जिसमें वैकल्पिक विषय की परीक्षा होगी ] ।

[घ] महोदय , अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों के लिए हर तरफ लाभ की स्थिति रहेगी - अपने राज्य की लोक सेवा परीक्षा की जब वे तैयारी कर रहे होंगे तो उनकी वही तैयारी आई.ए.एस. में भी काम आ जाएगी और वे चाहें तो  आर.ए.एस. भी दे लें [ वो भी चार पेपर कम की लाभप्रद स्थिति के साथ ] ।  मगर राजस्थान का युवक या तो आर.ए.एस. चुनेगा या फिर आई.ए.एस. ......... दोनों के बीच की स्थिति उसके लिए फायदेमंद नहीं होगी ।  इस तरह हम अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारेंगे क्योंकि इससे राजस्थान से आई.ए.एस.में उत्तीर्ण होने वाले युवकों की संख्या में जबरदस्त कमी आएगी जिसका नुकसान इस राज्य को झेलना पड़ेगा जिसकी सिविल सेवा परीक्षाओं में आगे ही कोई ख़ास स्थिति नहीं है  

[ड़ ] कोई अभ्यर्थी जो वर्तमान स्थिति की आर.ए.एस. देना चाहता है वह स्नातक करने के बाद अधिस्नातक भी साथ साथ कर लेता है या अधिस्नातक करके ही तैयारी में जुटता है क्योंकि उसे मालूम होता है कि यह अधिस्नातक का विषय उसे मुख्य परीक्षा में लेना होगा और इसकी अच्छी तैयारी उसे फायदा पहुंचाएगी । मगर , यदि विषय हटा दिए जाते हैं तो अभ्यर्थी सिर्फ स्नातक ही करेगा [क्योंकि यह न्यूनतम शेक्षणिक योग्यता है] और अधिस्नातक करने की जहमत नहीं करेगा क्योंकि सोचेगा कि इसका क्या फायदा , आर.ए.एस. में तो काम आएगी नही        [ यहाँ में बात उन अभ्यर्थियों की कर रहा हूँ जो मुख्यत आर.ए.एस. को लक्ष्य मानते हैं ] क्या यह उच्चतर शिक्षा का दीर्घकालीन नुकसान नहीं है । क्योंकि मैं ऐसे बहुत से अभ्यर्थियों को जानता हूँ जिन्होंने वर्तमान प्रशासनिक सेवा के पैटर्न को देखकर अधिस्नातक किया और फिर उस विषय के इन परीक्षाओं की तैयारी के दौरान गहन अध्ययन ने उन्हें इतना समर्थ बना दिया कि उन्होंने जब आर.ए.एस. और आई.ए.एस. में कई कोशिश के बाद सफलता प्राप्त नहीं की तो अपने उसी मजबूत विषय में पी.एच.डी. या नेट या बी.एड. करके व्याख्याता पद प्राप्त कर लिया ।  अब इन विषयों हटा लेने के बाद ऐसी संभावना नज़र नहीं आती है ।

[च] इन बातों के साथ साथ यह भी एक यक्ष प्रश्न है कि स्केलिंग को ध्यान में रखकर इन विषयों को हटाने की बजाय क्यों नहीं अन्य राज्यों के स्केलिंग मोडल को भी खंगाला जाये और फिर मिले जुले अनुभवों के आधार पर स्केलिंग प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी बनाकर लागू किया जाये ताकि कहीं बवाल ही पैदा न हो ।
समस्या को सुलझाना बेहतर है न कि उस क्षेत्र को ही छोड़ देना ।

[२]. महोदय , सभी राज्य लोक सेवाओं में प्राय: राज्य विशेष के अध्ययन पर ज्यादा जोर दिया जाता है क्योंकि राज्य विशेष की जानकारी उस क्षेत्र के आमजन और प्रशासनिक अधिकारी के बीच भाषाई संवादहीनता तथा  क्षेत्रीय समस्याओं और जरूरतों से अनभिज्ञता की स्थिति को उभरने नहीं देती है और सही अर्थों में एक संवेदनशील प्रशासन का जन्म होता है ।  अत : इस को ध्यान में रखकर प्रारम्भिक और मुख्य परीक्षाओं के लिए कहना चाहूँगा -

[क] प्रारम्भिक परीक्षा - इसमें पचास  प्रतिशत प्रश्न राजस्थान भाषा , संस्कृति , इतिहास , कला , भूगोल , अवसरंचना , उद्योग धंधे , खनिज आदि से  , पच्चीस प्रतिशत  राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सामान्यज्ञान से और शेष पच्चीस प्रतिशत प्रशासनिक अभिरूचि और अभिवृति से जुड़े हों [ एक और बात कि इस प्रश्न पत्र का पचास प्रतिशत अंकभार इस तरह आई.ए.एस. में भी काम आ जायेगा ] ।

[ख] मुख्य परीक्षा –
  1.   प्रथम प्रश्न पत्र- राजस्थान का सामान्य ज्ञान और सामान्य अध्ययन
  2.   द्वितीय प्रश्न पत्र- भारत का सामान्य ज्ञान और सामान्य अध्ययन
  3.  तृतीय प्रश्न पत्र- विश्व का सामान्य ज्ञान और सामान्य अध्ययन
  4.  चतुर्थ प्रश्न पत्र- भाषागत ज्ञान [ 50 % अंक भार राजस्थानी भाषा , संस्कृति और साहित्य , 30 % हिन्दी का व   20 % अंक भार अंग्रेजी के ज्ञान का रखा जाए ]
  5.  पांचवा प्रश्नपत्र और छठा प्रश्न पत्र - वैकल्पिक विषय - भाग 1 और 2 
  6.  सातवाँ और आठवाँ प्रश्न पत्र  - वैकल्पिक विषय - भाग 1 व 2


         आशा है  कि आप इन सुझावों पर ध्यान देंगे और उचित निर्णय लेंगे जो कि  राज्य के बेरोजगारों को ज्यादा विकल्प दे और जीवन में विकास के उच्च आयाम देने में भी समर्थ हो ।इन सुझावों को आप एक ऐसे आम युवक की ओर से ही माने जिसने इन रास्तों को देखा है और वही जाना व समझा है जो ऊपर वर्णित है ।

धन्यवाद ,

भवदीय 
जितेन्द्र कुमार सोनी 
पुराने राधास्वामी सत्संग भवन के पास ,
रावतसर , जिला - हनुमानगढ़ [ राज ] 335524
Email – jksoni2050@gmail.com 


यह मेल मैंने कार्मिक विभाग को किया है और सभी चयनित साथियों, तैयारी करने वाले युवाओं , सुधि साथियों , शिक्षाविदों आदि से निवेदन है कि आप भी अपने सुझावों को कार्मिक विभाग, राजस्थान [ Email ID- dopcomputer@yahoo.co.in ] को मेल करें  । यह एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण विषय है जिसमें किसी भी प्रकार का परिवर्तन आने वाली युवा पीढ़ी का भविष्य तय करेगा । आशा है कि आप विषय कि गंभीरता को देखकर अपने सुझाव और टिप्पणियों से मुझे भी लाभान्वित करेंगे ।
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