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परमाणु बिजली घर;कुछ भ्रांतियां

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on सोमवार, मई 30, 2011 | सोमवार, मई 30, 2011

 परमाणु बिजली, एक विश्वसनीय, पर्यावरण, मित्र, उचित मूल्य पर एक सर्वश्रेष्ठ विकल्प बिजली उत्पादन हेतु अन्य स्रोतों की सीमाऐं, ईंधन की कमी, हानिकारक गैसें अधिक लागत इत्यादि के कारण बढ़ती हुई बिजली की मांग की पूर्ति हेतु मेरा भारत महान में 20 परमाणु रिएक्टर 4780 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता रखते हैं। विदेशों से यूरेनियम मिलने के पश्चात कई रिएक्टर पूर्ण क्षमता पर बिजली उत्पादन कर कई अंधेरे घरों को रोशनी दे रहे हैं। निर्माण के साथ नए प्रस्तावित स्थलों पर प्रारम्भिक कार्य का श्रीगणेश हो रहा है। परमाणु ऊर्जा का भूतकाल निर्मल सुरक्षित रहा, वर्तमान उत्पादन व सुरक्षा दोनों ही कसौटियों पर खरा उतर रहा है एवं भविष्य में कई मील के पत्थर स्थापित होंगे। विश्व में किसी भी दुर्घटना से भारतीय रिएक्टरों की सुरक्षा प्रणाली का विश्लेषण मूल्यांकन कर सुरक्षा कवच को अधिक मजबूत किया जाना संस्कृति है। 

भारत माँ की सेवा में परमाणु बिजली घरों के देशभक्त कर्मचारी पूर्ण समर्पण निष्ठा व सेवा से अधिकतम उत्पादन के लक्ष्य के साथ सम्पूर्ण सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हैं। गलतियों से शिक्षा लेेते हैं, ज्ञान में वृद्धि करते हैं तथा किसी उपकरण में खराबी आने पर बिजली घर को तुरन्त बन्द कर रेडियेशन यानि विकिरण को रिएक्टर के अन्दर ही सीमित रखने का सफल एवं सार्थक उपाय अपनाते हैं। 

हर परमाणु बिजली घर स्थल पर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष पर्यावरण सर्वेक्षण प्रयोगशाला द्वारा पानी, हवा, मिट्टी, खाने की वस्तुएं इत्यादि की नियमित जांच, पर्यावरण प्रबंधन का आई एस ओ- 14001 प्रमाण-पत्र, यूरेनियम ईंधन का रेडियेशन पर्यावरण तक नहीं पहुंचने के लिए 7 बेरियर, आफ साइट एमरजेन्सी ड्रिल, परमाणु ऊर्जा नियामक परिषद की आज्ञा का पालन, रिएक्टर चलाने के लिए प्रशिक्षण, लाइसेंस, कर्मचारियों व परिवारों की मेडिकल जांच, अस्पताल में रेडियेशन उपचार की व्यवस्था, सुरक्षा प्रणालियों की नियमित जांच, समीप के स्कूलों मंे मोबाइल टीम द्वारा प्रशिक्षण, मीडिया से स्पष्टता इत्यादि अनेकों बिन्दु साक्षात प्रमाण हैं कि सुरक्षा व उत्पादन एक ही सिक्के के दो पहलू होते हुए भी सुरक्षा हमेशा ‘हेड’ है व उत्पादन ‘टेल’।

प्राकृतिक आपदाओं में भी हमारे परमाणु बिजली घरों ने सुरक्षित रहकर स्पष्ट दृष्टिगोचर कर दिया कि ‘‘सुरक्षा सर्वोपरि’’ मात्र कथनी ही नही, करनी भी है, उत्तर भारत के भूकंप के झटकों से नरोरा, गुजरात के भूकंप से काकरापार व दक्षिण भारत की सुनामी के समय मद्रास के परमाणु बिजली घर अग्नि परीक्षा में खरे उतरे-जनता जनार्दन-पर्यावरण किसी पर भी कोई आंच नही आने दी।

इन पंक्तियों का लेखक 38 वर्ष परमाणु बिजली घर में कार्य करते हुए पूरे जीवन में हजारों मिलीरेम रेडियेषन ले चुका है लेकिन आज वह 63 बसंत पार करने के पश्चात भी स्वस्थ निरोगी युवा ही है। लेखक स्वयं सेवानिवृत होने के पश्चात् भी बिजली घर के समीप ही प्राइवेट कॉलोनी में रहा है एव अभी भी उसका स्थायी निवास स्थान वही पर है। सीमित नियंत्रित मात्रा में अग्नि के समान रेडियेषन भी मित्र ही है। अपषिष्ट ईधन पहले रेल मार्ग व अब सड़क मार्ग से रिप्रोसेसिंग प्लान्ट में प्लूटोनियम निकालने हेतु भेजा जाना नियमित प्रक्रिया है, सुरक्षा के पूरे कारवां-काफिले के साथ।

तो फिर कैसा डर? षंका क्यो? संदेह क्यों? अफवाहों से क्यों घबराना? जानकारी नही हो तो पता कर ले पूछ लंे, सूचना का अधिकार है ही। मोबाइल को 24 घंटे साथ रखते हैं। 5-6 घंटे काम पर लगाकर रखते हैं। एक्स-रे, सी.टी.स्केन, केमोथेरेपी-सोनोग्राफी इत्यादि जो भी डॉक्टर कहते है स्वस्थ होने के लिए डॉक्टर पर विष्वास रखकर करवाते हैं। परमाणु बिजली घर चलाने वाले भी भारत मां के ही सपूत है, उन पर विष्वास कर उन्हें नैतिक समर्थन देकर उनका मनोबल बढ़ाकर इन देषभक्तों के कार्य ही सराहना करे। सीमा पर खड़ा जवान हो या इन बिजली घरों के कर्मचारी अपने-अपने स्थल पर हर देषभक्त देष की सेवा के साथ देषवासियों की सुरक्षा के प्रति समर्पित है।

प्रष्न पूछिए, फोन करिए, एस.एम.एस./ई-मेल करिए, पत्र लिखिए, अपने स्थल पर बुलाकर वार्ता करवाइए, हर जिज्ञासा/प्रष्न का उतर देना मुझे भी संतोष देगा कि जिस देष का नमक मैं खा रहा हूँ उस भारत मां का सच्चा सपूत स्वयं को सिद्ध कर सकूं। इति।


दिलीप भाटिया
7 घ 12, जवाहर नगर
जयपुर- 302004 (राजस्थान)
मोबाइल- 09461591498

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