दिलीप भाटिया की रचना-'एकला चालो रे' - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

नवीनतम रचना

दिलीप भाटिया की रचना-'एकला चालो रे'

सविता ने गत वर्ष की पुरानी किताबें
रद्दी की अपेक्षा एक निर्धन छात्रा को दे दी।

मनीषा ने इस साल की कापियों से खाली पेज
निकालकर अगले वर्ष के लिए रफ कापी बना ली।

गौतम अपने हर जन्म-दिन
 पर एक पौधा लगाता है।

सुषमा हर रविवार को अपनी पढ़ाई 
की अलमारी व टेबिल स्वयं साफ करती है।

जया छुट्टियों में नानी के गांव में
 गरीब बच्चों को अग्रेजी पढ़ाती है।

निमिषा रात को दादी से
कहानी सुनकर ही सोती है।

रोहित अपने जूतों पर
स्वयं ही पालिश करता है।

चेतना ने मम्मी के जन्म-दिन पर
अपनी पाकेटमनी से एक साडी दी।

आस्था स्कूल की कक्षा 12 की सभी छात्राओं ने
 नेत्रदान संकल्प पत्र भरा।

जयंत ने अपने 18वें जन्म-दिन पर
जीवन का प्रथम रक्तदान किया।

बड़े साहब की बेटी ममता घर में
काम करने वाली बाई को आंटी बोलती है।

नरेश गर्मी की छुट्टियों में प्याऊ पर
एक घंटे की जल सेवा करता है।

महिमा ने दादी से मिले रुपयों से पुस्तकें
खरीदकर व्यक्तिगत लाइब्रेरी बना ली है।

सुरेश पापा के बैंक व पोस्ट ऑफिस
के काम करना सीख गया है। 

मम्मी की तबियत खराब होने पर
सुधा उनके लिए खिचड़ी बना देती है। 

प्रेरणा हर महीने गांव में रहने वाली
दादी को पत्र लिखती है।

राघव बाल-पत्रिकाओं की
हर प्रतियोगिता में भाग लेता है। 

रुपाली ने अपने पुराने पेनों में रिफिल
डालकर गांव के स्कूल में बच्चों को दे दिए।

पार्थ नई किताबों पर
कवर स्वयं चढ़ाता है।

नम्रता स्कूल बस आने के समय से
एक मिनिट पहले ही तैयार हो जाती है।

इस सूची में जुड़ने के लिए अपना
नाम और काम मुझे बताइए।

दिलीप भाटिया
7 घ 12 जवाहर नगर,
जयपुर - 302004
 09461591498 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

Responsive Ads Here