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डॉ0 अजीत कुमार सारस्वत की गज़ल-' ज़िन्दगी की हर गली में तुम मिले'

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on बुधवार, जून 01, 2011 | बुधवार, जून 01, 2011


यादगारों के चले ये काफिले।
चल रहे जाने ये कब से सिलसिले।।
    
याद उनको पड़ रहा अच्छी तरह।
ज़िन्दगी की हर गली में तुम मिले।।
    
फंस न जाओ तुम कहीं तूफान में।
डाल हम लंगर दुआओं के चलें।।
    
दूर तुम हम से कभीं होना नहीं।
हम न सह सकते तुम्हारे फासले।।
    
ज़िन्दगी की हर डगर कितनी कठिन!
तय न इसको कर सके अच्छे-भले।।
    
तुम भटक जाना नहीं इनमें कहीं।
जिन्दगी के हैं कठिन कितने किले।।
    
जिस नज़र से हो हमें तुम देखते।
उस नजर में खूब अपनापन मिले।।
    
मुस्कराता चन्द्रमा हमको मिला।
मुस्कराते तुम हमें जब भी मिले।।



डॉ0 अजीत कुमार सारस्वत
डी0लिट्0
प्राचार्य
 बी0एन0के0बी0 पी0जी0 कालेज
 अकबरपुर-अम्बेडकरनगर (उ0प्र0)
 मो0नं0 09415327342
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