डॉ0 अजीत कुमार सारस्वत की गज़ल-' ज़िन्दगी की हर गली में तुम मिले' - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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डॉ0 अजीत कुमार सारस्वत की गज़ल-' ज़िन्दगी की हर गली में तुम मिले'


यादगारों के चले ये काफिले।
चल रहे जाने ये कब से सिलसिले।।
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याद उनको पड़ रहा अच्छी तरह।
ज़िन्दगी की हर गली में तुम मिले।।
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फंस न जाओ तुम कहीं तूफान में।
डाल हम लंगर दुआओं के चलें।।
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दूर तुम हम से कभीं होना नहीं।
हम न सह सकते तुम्हारे फासले।।
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ज़िन्दगी की हर डगर कितनी कठिन!
तय न इसको कर सके अच्छे-भले।।
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तुम भटक जाना नहीं इनमें कहीं।
जिन्दगी के हैं कठिन कितने किले।।
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जिस नज़र से हो हमें तुम देखते।
उस नजर में खूब अपनापन मिले।।
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मुस्कराता चन्द्रमा हमको मिला।
मुस्कराते तुम हमें जब भी मिले।।



डॉ0 अजीत कुमार सारस्वत
डी0लिट्0
प्राचार्य
 बी0एन0के0बी0 पी0जी0 कालेज
 अकबरपुर-अम्बेडकरनगर (उ0प्र0)
 मो0नं0 09415327342

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