डॉ0 अजीत कुमार सारस्वत की दो गज़लें - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

नवीनतम रचना

डॉ0 अजीत कुमार सारस्वत की दो गज़लें


       हम बता देंगे तुम्हें

तुम यहाँ आये हो कैसे, हम बता देंगे तुम्हें।
जाओगे कैसे यहाँ से, हम बता देंगे तुम्हे।।
 
यह इमामों का शहर है, खाँसना भी है मना।
जाओगे उस पार कैसे, हम बता देंगे तुम्हें।।

पत्थरों के इस शहर में, रो पड़ी संवेदना।
उनको समझाओगे कैसे, हम बता देंगे तुम्हें।।

रात-दिन खटते रहो बस, मुँह कभीं खोलो नहीं।
पार तुम पाओगे कैसे, हम बता दंेगे तुम्हें।।

ज़िन्दगानी की डगर आसान कितनी है यहाँ।
पूँछना उनसे नहीं तुम, हम बता देंगे तुम्हें।।

देख कंचन मृग हजारो, तुम यहाँ भरमा गये।
उन मृगों की असलियत क्या, हम बता देंगे तुम्हें।।

दूसरों की राय को, ज्यादा नहीं तुम मानना।
राय कम है चाल ज्यादा, हम बता देंगे तुम्हें।।

राम के इस देश में, रावण के कितने वेश हैं।
तुम नहीं पूंछो किसी से, हम बता देंगे तुम्हें।।

कह रही थी हमसे मीरा, देश है यह कृष्ण का।
है यहाँ कितने वकासुर, हम बता देंगे तुम्हें।।

एक चेहरा हे सुबह का, दोपहर का दूसरा।
तीसरा चेहरा भी उनका, हम बता देंगे तुम्हें।।

तुम समझते थे सभी को, हैं सभीं अपने यहाँ।
कौन अपना है यहाँ पर, हम बता देंगे तुम्हें।।


दर्द का रिश्ता न समझा आपने

यों हमें ठुकरा दिया क्यों आपने।
प्यार का रिश्ता न समझा आपने।।

याद में हम आपकी तपते रहें।
फिर भीं मेरी सुधि नहीं ली आपने।।

आँसुओं के मोतियों के हार की।
कोई भी कीमत न समझी आपने।।

याद कर हम आपको पागल हुए।
दर्द का रिश्ता न समझा आपने।।

कत्ल मेरी है मोहब्बत का किया।
तोड़ कर यह शीशये दिल आपने।।

याद के फूलों में काँटे दर्द के।
ढेर से बिखरा दिये हैं आपने।।

मेरी सुधियों के झरोखों से कभीं।
झांक कर देखा नहीं है आपने।।

मेरे तन-मन में भी बसकर रात दिन।
प्यार की दस्तक नहीं दी आपने।।


 डॉ0 अजीत कुमार सारस्वत
  डी0लिट्0
  प्राचार्य
  बी0एन0के0बी0 पी0जी0 कालेज
  अकबरपुर-अम्बेडकरनगर।





1 टिप्पणी:

ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

Responsive Ads Here