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विचार व कर्म से एक सक्रिय मार्क्सवादी के रूप में यादगार व्यक्तित्व प्रो.चन्द्रबली सिंह

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on बुधवार, जून 01, 2011 | बुधवार, जून 01, 2011

नयी दिल्ली 
30 मई : जनवादी लेखक संघ केंद्र की ओर से प्रो. चंद्रबली सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए साहित्य अकादमी के सभागार में राजधानी क्षेत्र के लेखकों की एक सभा आयोजित की गयी खचाखच भरे सभागार में उपस्थित लेखक समुदाय ने चंद्रबली सिह के चित्र पर पहले पुष्प अर्पित किये और उसके बाद सभा में उपस्थित रचनाकारों ने अपने वक्तव्यों से उन्हें भावभीनी पुष्पांजलि भेट की। सबसे पहले मुरली मनोहर प्रसाद सिंह, महासचिव ने अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्हें याद किया और उसके बाद गिरीश चंद्र मिश्र ने चंद्रबली जी के साथ बिताये क्षणों को याद किया, उसके बाद डा. विश्वनाथ त्रिपाठी ने उन्हें याद करते हुए अपने विचार व्यक्त किये। राजेंद्र यादव ने आगरा के अपने दिनों को याद करते हुए उन क्षणों को पुनर्जीवित किया जब चंद्रबली जी और रामविलास शर्मा बलवंत राजपूत कालेज में अंग्रेजी के प्राध्यापक थे। जानी मानी लेखिका रमणिका गुप्ता ने उन्हें याद करते हुए अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की, एन सी पी के महासचिव, देवीप्रसाद त्रिपाठी ने उनके साथ साहचर्य के क्षणों को याद किया, उसके बाद अशोक चक्रधर ने हिंदी अकादमी की ओर से और केंद्रीय हिंदी संस्थान की ओर से श्रद्धांजलि  अर्पित की। भगवान सिंह और शिवमंगल सिद्धांतकर ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्हें याद किया। जलेस के केंद्रीय कोषाध्यक्ष, जवरीमल्ल पारख ने जलेस के गठन के समय से उनके साथ सांगठनिक कार्य करने के अपने क्षणों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

    सी पी आइ (एम) के महासचिव, का. प्रकाश करात ने उनकी अडिग विचारधारात्मक प्रतिबद्धता और विचार कर्म से एक सक्रिय मार्क्सवादी के रूप में उनके व्यक्तित्व की सराहना की और अपने तीस साल के परिचय को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। जनसंस्कृति मंच के महासचिव प्रणय कृष्ण ने  चंद्रबली जी की उस प्रेरणा को याद किया जिससे जलेस, प्रलेस जसम ने संयुक्त कार्रवाइयां की और संयुक्त मोर्चे के गठन के कदम को सच्ची श्रद्धांजलि के रूप में पेश किया, साहित्य अकादमी की ओर से नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष डा. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने चंद्रबली जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। सुनीत चोपड़ा ने खेत मजदूर यूनियन की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि दी और जलेस के सगठनात्मक काम में उनके नेतृत्व की सराहना की, दिल्ली के जन नाट्य मंच की ओर से सुधन्वा देशपांडे ने उन्हें याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मशहूर दलित लेखिका सुशीला टाकौरे ने भी दो शब्द कह कर अपने श्रद्धासुमन अर्पित किये।

वाणी प्रकाशन के मुख्य प्रबंधक अरुण माहेश्वरी ने अस्पताल से अपनी बेटी अदिति के माध्यम से संवेदना संदेश भेजा, दिल्ली विश्वविद्यालय में स्पैनिश की प्रोफेसर विभा मौर्य ने उन्हें स्मरण करते हुए कहा कि उनके पास अभी पिछले दिनों ही उन्होंने लैटिन अमेरिकन कविताओं के कुछ अनुवाद देखने के लिए भेजे थे जिनके सिलसिले में उनसे बात करना चाहती थीं, लेकिन वह बात नहीं हो पायी और वे हम सबसे बिछड़ गये।

 अंत में जलेस के कार्यकारी अध्यक्ष जुबैर रज़वी ने उन्हें याद किया और फिर नामवर सिंह ने उनकी पुस्तकों के प्रकाशन के बारे में तथा वाराणसी के दिनों को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की जलेस के महासचिव चंचल चौहान ने सभी लेखकों की ओर से शोकप्रस्ताव पढ़ा, फिर खड़े हो कर दो मिनट मौन रख कर सभी उपस्थित लेखकों ने उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

नई दिल्ली से मुरली मनोहर प्रसाद सिह,
महासचिव,जनवादी लेखक संघ 


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