हम सब के बीच कितनी बची है 'ईमानदारी' - अपनी माटी Apni Maati

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हम सब के बीच कितनी बची है 'ईमानदारी'

‘‘ईमानदारी सर्वश्रेष्ठ नीति है।‘‘ आज के भ्रष्टाचार लिप्त युग में यह कथन मात्र पुस्तकों या स्कूलों की दीवारों तक सीमित हो कर रह गया है। मेरा भारत महान में आज हर तीसरा व्यक्ति भ्रष्ट है। मात्र 20 प्रतिशत भर ही ईमानदार हैं, वह भी उनके अपने ही संस्कारों के कारण, जिसे आज की दुनिया बेवकूफी समझती है। ईमानदार आज एक कोने में अलग हो गया है। ईमानदारी की खरी कमाई से वह पूरा जीवन संघर्ष करता रहता है। उसके अपने ही परिवार के सदस्य उसकी ईमानदारी का मजाक बनाते हैं। आज के युग में ईमानदार व्यक्ति मिसफिट है। भ्रष्ट समाज उसे स्वीकार नही करता।

भ्रष्टाचार की खबरें टी.वी. चैनल बढ़ा चढ़ा कर बताते हैं। समाचार पत्रों के मुखपृष्ठ प्रतिदिन किसी केा रिश्वत लेते-देते दिखाते फोटो से रंगे रहते हैं। शिक्षा चिकित्सा जैसे आदर्श क्षेत्रों में भी भ्रष्टाचार है। व्यापारी हो या उघोगपति सरकारी नौकरी हो या प्राइवेट हर क्षेत्र हर स्थान, हर व्यक्ति आज ईमानदारी से कोसों दूर है। भ्रष्टाचार हमारे जीवन का हिस्सा बन गया है। रिश्वत लेते अब संकोच नही होता।

लेकिन फिर भी मैं यही कहूंगा कि ईमानदारी सर्वश्रेष्ठ नीति है। ईमानदार व्यक्ति किसी से डरता घबराता नहीं है। उसमें आत्मविश्वास होता है। उसके चेहरे पर तेज होता है, वह स्पष्टवादी होता है, उसे झूठ बोलने की आवश्यकता नहीं होती। ईमानदार व्यक्ति की कथनी करनी में फर्क नही होता। इनकमटैक्स ऑफिसर हो या बॉस, उसे किसी से डर नही लगता। उसका बैंक बेलेंस चाहे कम हो, पर वह भूखा भी नही सोता। ईमानदार व्यक्ति के घर में मंहगा फर्नीचर या क्राकरी चाहे नही हो, फिर भी उसे सबसे प्यार सम्मान मिलता है।

ईमानदारी बढ़ाने की आवश्यकता है। ईमानदार व्यक्ति केा हीरे के हार पहनने की आवश्यकता ही नही हैं, वह तो स्वयं ही हीरा होता है। उसके माता, पिता, समाज, रिश्तेदार उस पर गर्व करते हैं। नकल करने वाला छात्र किसी तरह चाहे परीक्षा में पास चाहे हो जाए, स्कूल में प्रथम स्थान पाने वाला विद्यार्थी तो ईमानदारी के बल पर ही मुख्य अतिथि से स्टेज पर पुरस्कार लेता है।

भ्रष्टाचार के कैंसर का इलाज करने के लिए ईमानदारी की थैरेपी देनी ही होगी। 120 करोड़ की जनसंख्या वाले देश में हम स्वयं एक भी ईमानदार बने रह सकें, तो भ्रष्टाचार में एक की कमी तो कर ही देंगे। हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि 20 प्रतिशत ईमानदारी की संख्या 30-40-50 प्रतिशत तक पहुंचे ही, आप ईमानदारी का प्रतिशत बढ़ाने में अपना योगदान देंगे ना ? सोचिए व ईमानदार बनने का प्रयास कीजिए। 


दिलीप भाटिया
7 घ 12, जवाहर नगर
जयपुर- 302004 (राजस्थान)
मोबाइल- 09461591498

2 टिप्‍पणियां:

  1. वृक्ष कबहुं नहिं फल भखै, नदी न संचय नीर।
    सुविधा--भोगी संत अब, खरबों की जागीर?
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    मठ में गद्दी के लिए, लड़ते हैं जो संत।
    उनसे होगा किस तरह, जन-कष्टों का अंत?
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