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फादर्स डे पर बेटी के नाम एक पत्र 'सफल नहीं, सार्थक बनो'

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on सोमवार, जून 20, 2011 | सोमवार, जून 20, 2011

आत्मजा मिली,
स्नेह !
पिता के लिए जून का तीसरा रविवार निर्धारित है। पिता संतान के मध्य ईमेल, एस.एम.एस. कार्ड बुके गिफ्ट रिटर्न का फैशन मेरा भारत महान में भी कुछ वर्षो से चल रहा है। तुम मेरी इकलौती संतान हो एवं तुमने अपनी मम्मी के 14 नवम्बर, 2003 को असामयिक निधन के पश्चात् जिस प्रकार मुझे आदर-सम्मान, प्यार-संभाल, स्नेह-अपनापन सब कुछ दिया है व दे रही हो, उस का मूल्यांकन करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं।मां का स्थान हमेशा खाली रहता है। मैनें स्वयं अपनी मां को चार माह पूर्व ही 15 फरवरी 2010 को खोया है। पच्चीस वर्ष पूर्व 16 फरवरी 1985 को जब मेरे सिर से पिता का साया उठ गया था, उस समय मेरे पास मां थी। गतः छः-सात वर्षो से तुम्हारे पास मां का साया तो नहीं है, पर पिता की सुरक्षा तो है ही।

अपना पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा कर तुम शोध छात्रा बन डॉक्टर की उपाधि का लक्ष्य रखकर शोध यात्रा पर चलती जा रही हो। भविष्य में जब तुम डा. मिली भाटिया से जानी जाओगी तो इस सुदामा पापा की तपस्या सार्थक हो जाएगी।तुमने अपने जीवन साथी का चुनाव भी स्वयं ही कर लिया है। यह प्रमाणित करता है कि तुम अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेने का साहस हिम्मत रखती हो। जीवन पथ कभी भी निष्कंटक नही होता। आत्मनिर्भरता के लिए मैंने तुम्हे शिक्षा दिला दी है। तुम्हारी मम्मी तुम्हे संस्कार और तुम्हारी दादी अनुशासन के पाठ पढ़ा ही गई हैं। संस्कार, अनुशासन एवं शिक्षा का संगम तुम्हें आत्मनिर्भर बनने एवं जीवन में पूर्णिमा के समय शीतल चांदनी का सुख देने के साथ अमावस्या के समय टार्च की रोशनी का भी कार्य करेंगे एवं जीवन में आंधी तूफान के समय तुम्हें सहनशक्ति हिम्मत एवं सही निर्णय लेने में भी निश्चित ही सहायक होगा।

किसी भी इंसान के लिए एक साथ मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारे एवं चर्च चारों स्थानों पर प्रार्थना, इबादत, जाप, प्रेयर करना संभव नहीं है, इसी प्रकार मेरे लिए भी गत वर्षों में एक साथ मम्मी, पापा, भाई, बहन चारों रोल करने संभव नहीं थे। मैं तुम्हे मम्मी का स्नेह ममता देने का प्रयास करता था, तो पापा का नियंत्रण नहीं कर पाता था। पापा का रोल करने का प्रयास करता था, तो तुम मम्मी को याद करके अपनी पलकें भीगी कर लेती थी। फिर भी इस दिलीप ने दिल से अपने उचित कर्त्तव्य निभाने का प्रयास किया है।मेरे जीवन की संध्या में मात्र मैं तुम्हें मंगल शुभकामनाऐं दे रहा हूँ। तुम्हारी आगे की जीवन यात्रा सफल से अधिक सार्थक हो यही प्रयास करना।

इस ‘‘फादर्स-डे‘‘ पर मैं अपनी भावनाऐं तुम्हे इस पत्र के माध्यम से ‘‘गिफ्ट‘‘ दे रहा हूॅ। तुम्हारे ‘‘रिटर्न गिफ्ट‘‘ की प्रतीक्षा रहेगी।

सस्नेह,
शुभाकांक्षी पापा


दिलीप भाटिया
7 घ 12, जवाहर नगर
जयपुर- 302004 (राजस्थान)
मोबाइल- 09461591498


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1 टिप्पणी:

  1. wakt ke sath sab kuch badal jata hai....reh jaate hai to bas aatma per kuch padchinho ke nishaan.....

    aapne apni beti ke liye jo kuch bhi kiya dil se kiya.........aur jaha se mein dekhti hu..........dil se kiya gaya har kaam sahi hi hota hai.......

    उत्तर देंहटाएं

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