फिर कोई हुसैन न बने:जन संस्कृति मंच की श्रद्धांजलि - अपनी माटी

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शुक्रवार, जून 10, 2011

फिर कोई हुसैन न बने:जन संस्कृति मंच की श्रद्धांजलि


 मकबूल फिदा हुसैन से
-गोबिन्द प्रसाद की कविता 

आंखों में
उतर रहा है
सलेटी गाढ़ा-सा
आसमान
चीड़ का जंगल
सनसनाता हुआ
गुजर गया है
अलगू की बस्ती से
बूढ़े की आंखों में
तमाखू की
लपटों का सुलगाव
कांपकर रह गया है
मेहनतकश चेहरों पर
धूप की थिगलियां
कब तक लगाओगे
मकबूल फिदा हुसैन!
सिमट रहा है समुद्र
धीरे धीरे
बच्चों की नन्हीं हथेलियों के बीच
मुझे मालूम है
तुम फिर
रंगों की चट्टानी भाषा से
लड़ते हुए
गूंगे हो जाओगे
मकबूल फिदा हुसैन
और ... मेरे शब्द
बच्चे की तरह
अपनी माँ से
लिपट कर सो जाएंगे
आसमान... कुछ नहीं बोलेगा
बस्ती को काठ मार जाएगा
बच्चों की नन्हीं हथेलियां
और बूढ़े की आंखों में
कांपती लपटों का सुलगाव
बेहतर यही है
इन्हें हवाओं में, पागल हवाओं में
तिर जाने दो मकबूल फिदा हुसैन

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ये कविता फेसबुक से साभार लिया है.
 लखनऊ, 9 जून

हमें यह दुखद खबर मिली है कि प्रसिद्ध चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन नहीं रहे। लन्दन में आज सुबह उनका निधन हुआ। हुसैन हमारे पिकासो थे, कला के लिए पूरी तरह समर्पित। उनके चित्रों को लेकर साम्प्रदायिक ताकतों ने उन्हें निशाना बनाया, सैकड़ों की संख्या में उनके ऊपर मुकदमें दायर किये और हमारे इस कलाकार को मजबूर कर दिया कि वे देश छोड़कर चला जाय। उन्होंने कतर की नागरिकता ली। लेकिन कतर की नागरिकता लेने के बावजूद वे कहते रहे कि भले मैं हिन्दुस्तान के लिए प्रवासी हो गया हूँ लेकिन मेरी यही पहचान रहेगी कि मैं हिन्दुस्तान का पेन्टर हूँ, यहाँ जन्मा कलाकार हूँ। अर्थात हुसैन के कलाकार की जड़े यहीं है और अपने जड़ो से कटने का जो दर्द होता है, वह हुसैन के अन्दर काफी गहरे था। कलाकार स्वतंत्रता चाहता है। वह प्रतिबन्धों, असुरक्षा में नहीं जीना चाहता है। पर व्यवस्था ऐसी है जो कलाकार को न्यूनतम सुरक्षा की गारण्टी नहीं दे सकती। फिदा हुसैन नहीं रहे, पर इस व्यवस्था पर सवाल छोड़ गये। हम शायद अपने को माफ कर पायें। जब भी कलाकार की स्वतंत्रता की बात होगी, हुसैन की बात होगी - यह चीज कहीं कही हमें टिसती रहेगी। अपने इस कलाकार के जाने का हमें गम है। जन संस्कृति मंच की ओर से अपने इस अजीज कलाकार को इस संकल्प के साथ याद करते हैं और अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं कि फिर कोई हुसैन बने।

कौशल किशोर
संयोजक
जन संस्कृति मंच, लखनऊ
मो-08400208031, 09807519227 


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