जया द्विवेदी की दो कवितायेँ - अपनी माटी Apni Maati

India's Leading Hindi E-Magazine भारत की प्रसिद्द साहित्यिक ई-पत्रिका ('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

नवीनतम रचना

जया द्विवेदी की दो कवितायेँ


एक स्त्री की वसीयत
जीते जी बोटी-बोटी नोच डाला
इंसानों ने
क्या बिगाड़ा है परिंदो ने
कर देना उनके हवाले लाश मेरी!
  
बँटवारा
माना कि
ज़िंदगी होती है कड़ी धूप सी
पर मेरे हिस्से में तो
एक पेड़ भी न आया



जया द्विवेदी 
अंबिकापुर, छत्तीसगढ़
मो.-900998110

2 टिप्‍पणियां:

ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

Responsive Ads Here