अरविंद श्रीवास्तव की कविताओं में हमारे समय का विद्रूप स्पष्ट देखा गया है - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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अरविंद श्रीवास्तव की कविताओं में हमारे समय का विद्रूप स्पष्ट देखा गया है

पटना, 26 जून। 

कविता पाठ करते अरविन्द श्रीवास्तव बीच में
 और टी-शर्ट में शंशाह आलम,साथ ही 
 कवि परमानंद राम 

प्रगतिशील लेखक संघ, पटना इकाई के तत्वावधान में मधेपुरा से पधारे समकालीन कविता के चर्चित कवि और 'अपनी माटी' वेबपत्रिका के सम्पादक  मंडल सदस्य अरविन्द श्रीवास्तव के सम्मान में एक विशिष्ट कविता -पाठ का आयोजन स्थानीय केदार भवन के कविवर कन्हैया कक्ष, अमरनाथ रोड में किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता चर्चित कवि-कथाकार योगेन्द्र कृष्णा ने की। संचालन युवा कवि शहंशाह आलम ने किया।    इस अवसर पर अरविन्द श्रीवास्तव ने अपनी दर्जन भर कविताओं का पाठ किया। ‘एक डरी और सहमी दुनिया में’, ‘कवि की हत्या’, ‘रात’, ‘देह के अंदर देह और साँस के अंदर साँस’, ‘पुतली’, प्रेम में, साँकल, लोकतंत्र, तथा खींचता हूँ आखिरी कश! आदि कविताएँ को श्रोताओं ने बेहद पसंद किया। इन कविताओं में हमारे समय का विद्रूप स्पष्ट देखा गया। 

परमानन्द राम ने अपनी ‘मसीहा’, ‘आत्मदीप्त’, ‘शिखर पर बाज’, ‘निर्जीव-सा’, तथा ‘भैंस चाचा’ कविताएँ सुनाईं । इन कविताओं में दलित-समस्या उभर कर आईं।    युवा कवि शहंशाह आलम ने अपनी ‘फारबिसगंज’ शीर्षक चार कविताओं का पाठ किया। आलम की ये कविताएँ फ़ारबिसगंज में हुए गोली-कांड पर केन्द्रित थीं। इन कविताओं ने श्रोताओं की संवेदनशीलता को जगा दिया।    इस मौके पर योगेन्द्र कृष्णा, राकेश प्रियदर्शी तथा संजीव सिन्हा ने भी अपनी प्रतिनिधि कविताओं का पाठ किया। धन्यवाद-ज्ञापन परमानन्द राम ने किया। 

अरविंद श्रीवास्तव का पूरा परिचय यहाँ क्लिक कर पढ़ा जा सकता है.

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

शहंशाह आलम
युवा कवि

मोबाइल- 09835417537



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