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चौदह बाल कथाओं की प्रेरक श्रृंखला का द्वीभाषी प्रकाशन

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on शुक्रवार, जून 10, 2011 | शुक्रवार, जून 10, 2011


भारत की प्रसिद्ध और प्राचीन संस्था सस्ता साहित्य मंडल, नई दिल्ली द्वारा चौदह बाल कथाओं की एक सुरुचिपूर्ण बहुरंगी प्रेरक श्रृंखला हिंदी और अंग्रेजी भाषा में साथ-साथ प्रकाशित
 लेखिका धीरा वर्मा
  1. चित्रकार संजय अहलुवालिया
  2. अंग्रेजी  अनुवाद सुनंदा वी. अस्थाना 


नानी ओंर दादी की कहानियां सदियों से बालकों का मनोरंजन तो करती ही रही हैं , उन्हें जीवन जीने की कला भी सिखाती हैं, विपरीत परिस्थितियों में संकट से उबरने के तरीके भी बताती हैं तथा प्रकृति और मानव के स्वभाव से भी परिचित कराती हैं यही कारण  है कि ये लोक बाल कथाएँ  विश्व भर में बड़ी लोकप्रिय  हैं।

आज माता और पिता वाले छोटे – छोटे परिवारों में यह दायित्व अब  दादी और  नानी के साथ न रहने से  माँ और पिता पर आ गया है  और आज अति व्यस्त रहते हुए भी सोते समय बच्चे माँ और पिता से रोज   कहानी  सुनाने की मांग करते हैं। ये  रोज़ रात को सुनी हुई कहानियां बाल   मन  पर गहरी छाप छोड़ती  हैं। यही कारण है कि यदि हम बच्चे को अच्छा संस्कार देना चाहते हैं तो उन्हें ऐसी कहानियां सुनाएं जिनके पीछे जीवन मूल्यों  का  जैसे  ईमानदारी,  सच्चाई,  साहस,  सहयोग, आत्मनिर्भरता, प्रेम, सद्भाव, भाईचारा, दया, कृपा आदि का कहानियों में उल्लेख हो जिनको पढ़कर बच्चे अपने जीवन में इन गुणों को उतारना चाहें और जो बच्चो को सफल जीवन जीने की राह दिखा सकें।  ऐसी  प्रेरणा दायक कहानियां बच्चों के सर्वतोमुखी विकास में बड़ी सहायक होतीं हैं।

इस महीने जून  २०११  में  देश की प्रसिद्ध और पुरानी प्रकाशन  संस्था सस्ता साहित्य  मंडल,  नई दिल्ली  ने  १४   बाल कहानियों  का एक   सचित्र  ओंर सुरुचि पूर्ण सेट  प्रकाशित  किया है। ये कहानियां आर्ट पेपर पर प्रकाशित हैं। सम्पूर्ण पुस्तक  बहुरंगी  चित्रों से  सुसज्जित  है  ओंर इन पुस्तकों के चित्रकार हैं  संजय अहलुवालिया। ये सारी पुस्तकें  धीरा वर्मा द्वारा लिखी गयी हैं. इस चौदह कहानियों के सेट में जो पुस्तकें है। उनके शीर्षक हैं-

१. चतुर पीटर
 २. सूरज और चाँद 
३. बाघ आया बाघ आया 
४ . सिद्धार्थ 
५. ग्वाला भैया 
६ . अर्जुन 
 7. मोनिका 
 8. बहू की खोज
  9. चाणक्य 
१०. सेर को सवा सेर 
११ . कंकड़ की सब्जी
१२ बुद्धिमान बीरबल
13. सुखी कौन
14. पंडितजी.

इस सेट की सभी कहानियां अंग्रेजी अनुवाद में भी अलग से उपलब्ध हैं। अंग्रेजी अनुवाद सुनंदा वी. अस्थाना द्वारा  किये गए हैं   इस प्रकार अट्ठाईस  कहानियों के इस अंग्रेजी और हिंदी सेट  से अंग्रेजी जानने वाले जो हिंदी सीखना चाहते हैं बड़ी आसानी से हिंदी भी सीख सकते हैं।

धीरा वर्मा लेखिका संघ की उपाध्यक्ष हैं और पिछले चार दशकों से बच्चों के साहित्य पर काम कर रहीं हैं। वह दिल्ली विश्वविद्यालय के स्लावोनिक और फ़ीनो-उग्रीयन विभाग में अतिथि प्राध्यापक हैं। वह भारत के वरिष्ठतम बल्गारियन अनुवादकों में हैं और उनके अनेक बल्गारियन साहित्यिक रचनाओं के अनुवाद प्रकाशित हुए हैं। अन्तोन दोनचेव की ‘व्रेमे राज़देलनो’, एमिल्यान स्तानेव की ‘क्रेदेतसेत न प्रास्कोवी’, गेओ मिलेव की प्रसिद्ध कविता, ‘सेप्तेम्वरी’ के अलावा धीरा वर्मा ने ‘बल्गारिया का इतिहास’ का अनुवाद भी किया है। फ़ीजी में हिन्दी स्वरूप और विकास, शोध कार्य की वह सहलेखक हैं।

धीराजी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में एम ए किया है और डीसीसीडबल्यू के ‘पालना’ में सलाहकार मनोवैज्ञानिक के रूप में सेवा की है। आकाशवाणी पर उनकी सौ से ज़्यादा सोदाहरण वार्ताएं प्रसारित हुई हैं।

सरोज शर्मा 
प्रबंध संपादक, प्रवासी दुनिया.काँम
www.pravasidunia.com
M-9899552099
O-00124504648
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